झाड़ी.. कूड़े के ढेर और जौहड़  की सूरत ‘जल सृष्टि पार्क’ में तब्दील

MDDA ने  पुराने जलस्रोत के मूल स्वरूप को नहीं छेड़ा

तालाब के मूल स्वरूप को बचाकर विकसित किया गया पार्क

पेडल बोटिंग से योग और जैव विविधता तक सुविधाएं

अविकल उत्तराखण्ड

देहरादून। मियांवाला में लंबे समय से उपेक्षित पड़े पुराने जौहड़ की तस्वीर अब बदल गई है। जहां कभी कूड़े के ढेर और जंगली झाड़ियां नजर आती थीं, वहां मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने करीब 8 करोड़ 64 लाख रुपये की लागत से ‘जल सृष्टि पार्क’ विकसित किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को पार्क का लोकार्पण किया।

पार्क की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके विकास के दौरान पुराने जलस्रोत के मूल स्वरूप को समाप्त नहीं किया गया। जौहड़ को संरक्षित रखते हुए उसके आसपास आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं। मुख्यमंत्री ने इसे स्वच्छ, स्वस्थ और हरित देहरादून की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

राजकीय इंटर कॉलेज मियांवाला के समीप स्थित जौहड़ की भूमि लंबे समय से अव्यवस्था का शिकार थी। यहां कूड़ा डाले जाने के साथ जंगली झाड़ियों का कब्जा था। जलभराव के कारण भी क्षेत्र की स्थिति खराब रहती थी। भूमि पर अतिक्रमण की आशंका भी बनी हुई थी। एमडीडीए ने इस स्थिति को चुनौती के रूप में लेते हुए भूमि के विकास की योजना तैयार की।

परियोजना की लागत 8 करोड़ 63 लाख 83 हजार 518 रुपये है। निर्माण कार्य मार्च 2024 में शुरू हुआ और करीब दो वर्ष में मार्च 2026 में पार्क तैयार हो गया। एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी की निगरानी में विकसित इस परियोजना में पुराने जौहड़ को ही पार्क की पहचान का केंद्र बनाया गया है।

तालाब के बीच आइलैंड, पेडल बोटिंग की सुविधा

जल सृष्टि पार्क में तालाब के बीच आइलैंड विकसित किया गया है। यहां पेडल बोटिंग की सुविधा भी उपलब्ध है। मुख्यमंत्री ने पार्क का निरीक्षण करते हुए इसे देहरादून में ‘नैनीताल जैसी फीलिंग’ देने वाला स्थल बताया।

पार्क में सुबह-शाम टहलने और दौड़ने के लिए जॉगिंग ट्रैक बनाया गया है। योग के लिए अलग योगा डेक, बैठने के लिए बेंच और गजीबो, महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग शौचालय तथा जलपान गृह की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।

बच्चों के लिए चिल्ड्रन पार्क बनाया गया है। फूलों और वनस्पतियों की जानकारी देने के लिए एजुकेशनल फ्लावर गार्डन विकसित किया गया है। इसके अलावा पक्षी एवं जैव विविधता उद्यान भी तैयार किया गया है। इससे पार्क को केवल मनोरंजन स्थल के बजाय प्रकृति और स्थानीय जैव विविधता से जोड़ने का प्रयास किया गया है।

जलस्रोत संरक्षण के साथ हरियाली पर जोर

परियोजना के तहत स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं। छायादार वृक्षों के साथ जलधारण क्षमता बढ़ाने, मृदा कटाव रोकने और भूमि को स्थिर रखने के उपाय किए गए हैं। इस तरह लंबे समय से उपेक्षित पड़ी भूमि को जल संरक्षण, हरियाली, जैव विविधता, स्वास्थ्य और मनोरंजन से जोड़कर जनोपयोगी स्थल के रूप में विकसित किया गया है।

लोकार्पण के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में जल और जंगल को जीवन का अभिन्न हिस्सा माना गया है। पुराने तालाबों और जलस्रोतों का पुनर्जीवन केवल सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि विकास ऐसा होना चाहिए, जिससे लोगों का जीवन सुगम हो, शहर सुंदर बने और पर्यावरण सुरक्षित रहे।

मुख्यमंत्री ने स्थानीय लोगों से पार्क की स्वच्छता और सुविधाओं को बनाए रखने में सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार पार्क का निर्माण कर सकती है और सुविधाएं उपलब्ध करा सकती है, लेकिन उसे लंबे समय तक स्वच्छ और सुंदर बनाए रखना समाज की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने बच्चों और युवाओं से पार्क का अधिक से अधिक उपयोग करने तथा खेल, दौड़ और योग जैसी गतिविधियों से जुड़ने का आह्वान किया।

मियांवाला का जल सृष्टि पार्क इस बात का उदाहरण है कि पुराने जलस्रोत को संरक्षित रखते हुए आधुनिक शहर की जरूरतों के अनुरूप सार्वजनिक स्थल विकसित किया जा सकता है। एमडीडीए की इस पहल से क्षेत्र में हरित क्षेत्र और नागरिक सुविधाओं का विस्तार होने के साथ पुराने जौहड़ को भी नई पहचान मिली है।

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दून में‘नैनीताल जैसी फीलिंग, पेडल बोटिंग और आइलैंड भी

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