सेवानिवृत्त अधिकारी का 98 हजार का क्लेम 10 माह से लंबित, गोल्डन कार्ड व्यवस्था कटघरे में
अविकल उत्तराखंड
रुद्रपुर। सरकारी योजनाओं की फाइलों में उलझी लापरवाही ने एक बुजुर्ग पिता से उसका इकलौता बेटा छीन लिया। पंतनगर विश्वविद्यालय के निर्माण विभाग से सहायक निदेशक पद से सेवानिवृत्त प्रदीप कुमार गर्ग का हार्ट अटैक के इलाज में खर्च हुए 98 हजार रुपये का मेडिकल क्लेम 10 महीने बीत जाने के बाद भी अटका रहा। इसी बीच कैंसर से जूझ रहे उनके इकलौते पुत्र शंशाक गर्ग (52) का 6 जनवरी को निधन हो गया। परिजनों और परिचितों का कहना है कि यदि समय रहते प्रतिपूर्ति की राशि मिल जाती, तो संभव था कि शंशाक को बेहतर इलाज मिल पाता। राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण स्तर पर भुगतान में हुई देरी ने न सिर्फ एक परिवार को गहरे शोक में डुबो दिया, बल्कि सरकार की गोल्डन कार्ड स्वास्थ्य योजना की संवेदनशीलता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

फाइल में ‘प्रोसेस्डÓ, खाते में पैसा नहीं
राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के पोर्टल के अनुसार प्रदीप कुमार गर्ग का क्लेम 12 सितंबर 2025 को प्राप्त हुआ था और 4 अक्टूबर 2025 को प्रक्रिया पूरी कर दी गई। बावजूद आज तक भुगतान नहीं हुआ। ‘क्लेम प्रोसेस्डÓ होने के बाद भी राशि न मिलना व्यवस्था की गंभीर खामी को उजागर करता है।
तेरहवीं में छलका दर्द, व्यवस्था पर उठा सवाल
रविवार को दिवंगत शंशाक गर्ग की तेरहवीं के मौके पर फ्रेंड एन्क्लेव कॉलोनी स्थित आवास पर शोक जताने वालों का तांता लगा रहा। हर आंख नम थी और हर जुबान पर एक ही सवाल—जब इलाज का हक था, तब मदद क्यों नहीं मिली? लोगों ने कहा कि अगर गोल्डन कार्ड जैसी योजना में भी समय पर भुगतान नहीं होता, तो आम आदमी आखिर जाए तो जाए कहां।
‘मेरे साथ जो हुआ, वह किसी और के साथ न होÓ
उत्तराखंड कार्मिक एकता मंच के संस्थापक अध्यक्ष रमेश चंद्र पाड्डडे और गवर्नमेंट पेंशनर्स वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन के प्रांतीय प्रवक्ता एसके नैय्यर से बातचीत में बुजुर्ग पेंशनर प्रदीप कुमार गर्ग भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि वे लंबे समय से क्लेम के भुगतान का इंतजार कर रहे थे। जो होना था वह हो गया, लेकिन सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भुगतान में देरी के कारण किसी और परिवार को ऐसी पीड़ा न झेलनी पड़े।
गोल्डन कार्ड की साख पर संकट
कार्मिक और पेंशनर संगठनों ने कहा कि गोल्डन कार्ड से इलाज न मिलना या क्लेम भुगतान में देरी होना सीधे-सीधे सरकार की साख को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने मांग की कि स्वास्थ्य योजना के तहत इलाज और प्रतिपूर्ति में लापरवाही बरतने वालों की जवाबदेही तय की जाए।
- प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी भुगतान क्यों रुका?
- राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण में जवाबदेही किसकी?
- कितने पेंशनरों के क्लेम ऐसे ही अटके पड़े हैं?
- क्या गोल्डन कार्ड योजना सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है?

