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बेजुबान रसोई से मिली काफी राहत

पशुपालन विभाग की रसोई में 41 दिन तक बनी बेजुबानों के लिए रोटियां

7 अप्रैल से 17 मई तक चली बेजुबान रसोई
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कोरोना लॉकडौन के शुरू होते ही लावारिस जानवरों के भोजन पानी का संकट खड़ा हो गया था। प्रधानमंत्री मोदी के 21 मार्च को दिए गए भाषण के ठीक अगले दिन से स्थानीय स्तर पर इनके भोजन प्रबन्ध के लिए शासन-प्रशासन स्तर पर अपनी बात पहुंचाने का सिलसिला भी शुरू हो गया था। पशु प्रेमी व संस्थाएं अपने स्तर से घूम-घूम कर बेजुबानों के भोजन पानी की व्यवस्था करने लगे। अंततः पशु प्रेमियों की गुहार सरकार के कानों तक पहुंची। नतीजतन 7 अप्रैल से पशुपालन विभाग ने देहरादून में बेजुबान रसोई का श्रीगणेश किया। इस रसोई में 17 मई तक बेजुबानों के लिए रोटियां बनती रही।
सहस्त्रधारा में विभागीय संगठन के भवन की रसोई में एक दिन में करीब 1000 से 1100 अंडायुक्त परांठे बनाये जाने लगे। यह हम सभी के लिए बेहद सुकून देने वाली खबर थी। लॉकडौन में शहर के ढाबे-रेस्टॉरेन्ट में ताले लग चुके थे। इनकी जूठन पर निर्भर देहरादून के सैकड़ों आवारा कुत्ते निर्भर थे। यह सब भूखे प्यासे भटकते देखे जा रहे थे। इन डॉग्स के विभिन्न गैंग्स के बीच झड़प देर रात तक गलियों को गुंजायमान रखती थी।
इस रसोई से बनी रोटियां विभाग के चिकित्सालय व डिस्पेंसरियों में भेजी जाने लगी। जहां से पशु प्रेमी इन्हें लेकर अपने अपने मोहल्लों में घूम रहे आवारा कुत्तों को खिलाते थे। कोई 50 तो कोई 30 रोटी ले जाता था,अपनी आवश्यकतानुसार। लगभग 1 हजार रोटियां बनाने में प्रतिदिन 300 से 350 अंडे की खपत होती थी। इन अंडों की मुफ्त सप्लाई venkys India limited के डिप्टी जनरल मैनेजर डॉक्टर नेत्रपाल सिंह ने पूरे 41 दिन तक की।
पशुपालन विभाग के ड्राइवर मनोज कुमार प्रतिदिन 9 बजे तक चिन्हित सभी 10 चिकित्सालय व डिस्पेंसरी में रोटियां पहुंचा देते थे। बेजुबानों की रोटियों वाला वाहन प्रेमनगर, राजपुर,मालसी, गढ़ी कैंट, सहस्त्रधारा, सर्वे चौक, पण्डितवाड़ी, अजबपुरकलां, सुभाषनगर व रायपुर स्थित विभागीय केंद्रों में नियमित रोटियां पहुंचाता रहा।
रसोई की जिम्मेदारी मनजीत ने संभाली हुई थी जबकि लगभग पांच महिलाएं प्रतिदिन रोटियां बनाने में जुटती थी। डॉक्टर कैलाश उनियाल समेत चिकित्सकों की एक बड़ी टीम पूरी व्यवस्था की निगरानी में जुटी हुई थी।
इन रोटियों से लॉकडौन में काफी बेजुबानों की भूख शांत हुई। पौष्टिक आहार मिला। बीते 17 मई तक बेजुबानों की रसोई को विराम दे दिया गया। चूंकि, अभी ढाबे नही खुले हैं लिहाजा पूरे उत्तराखण्ड व देश में पशु प्रेमी संस्थाएं व आम नागरिक कोरोना संकट में बेजुबानों की रोटी के प्रबंध में जुटे हुए है। बेजुबानों की भूख का संकट अभी बरकरार है।
यहां लखनऊ नगर निगम का बेजुबानो के लिए किए गए भोजन प्रबन्ध पर साधुवाद बनता है। लखनऊ नगर निगम ने पशु प्रेमियों व संस्थाओं की कमेटी गठित कर लावरिस जानवरों के भोजन का प्रबंध किया। सभी का बहुत आभार।

Posted by Avikal Thapliyal on Saturday, May 23, 2020

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