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मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट पाखरो टाइगर सफारी पर एनजीटी ने लगाई रोक

NGT का 21 अक्टूबर के आदेश- केंद्र व उत्तराखण्ड सरकार को साफ कहा, प्रोजेक्ट पर कोई काम नहीं किया जाय. वन विभाग, वाइल्ड लाइफ व प्रोजेक्ट टाइगर के डायरेक्टर जनरल की तीन सदस्यीय कमेटी बनाने के भी आदेश दिए

अविकल उत्तराखण्ड

नई दिल्ली। कार्बेट नेशनल पार्क में पाखरो टाइगर सफारी प्रोजेक्ट के तहत कटे 6421 पेड़ों के कटान सम्बन्धी FSI की रिपोर्ट के बाद नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने पीएम मोदी के इस ड्रीम प्रोजेक्ट पर रोक लगाते हुए डीजी लेवल की तीन सदस्यीय कमेटी के गठन के आदेश दिए।

NGT ने आदेश में कहा है कि वन विभाग, वाइल्ड लाइफ व प्रोजेक्ट टाइगर के डायरेक्टर जनरल की तीन सदस्यीय कमेटी बनाने के भी आदेश दिए। यह कमेटी कार्बेट में वन व पर्यावरण के नियमों के उल्लंघन के बाबत आवश्यक कफम उठाएगी। NGT ने तीन सदस्यीय कमेटी को दो महीने के अंदर रिपोर्ट सौंपने को भी कहा है। इस अवधि तक इस प्रोजेक्ट पर कोई काम नहीं किये जाने के भी आदेश किये गए हैं। corbett national park

कार्बेट के बफर जोन में कटे पेड़ों के मामले में 21 अक्टूबर को सुनवाई करते हुए NGT के अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल, न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल व एक्सपर्ट मेंबर प्रो ए सेंथिल वेल ने केंद्र व उत्तराखण्ड सरकार को इस प्रोजेक्ट पर फिलहाल काम करने से भी मना किया है। साथ ही एक महीने के अंदर स्पष्टीकरण देने को भी कहा है। Pakhro tiger safari project

टाइगर सफारी प्रोजेक्ट पर रोक लगाने के अलावा NGT ने सम्बंधित विभागों को विशेष सिफारिश से जुड़ी रिपोर्ट एक महीने के अंदर देने को कहा है। यह रिपोर्ट केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय व जलवायु परिवर्तन climate change को सौंपने को कहा गया है।

गौरतलब है कि पीएम मोदी के 2019 में कार्बेट पार्क में उसने के बाद उत्तराखण्ड सरकार ने पाखरो टाइगर सफारी प्रोजेक्ट की घोषणा की थी। और इसे पीएम मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट बताया था।

एडवोकेट गौरव कुमार बंसल ने कार्बेट के बफर जोन में पेड़ काटे जाने की शिकायत National tiger conservation authority के समक्ष की थी। इसके बाद FSI ने कार्बेट में मामले की छानबीन की थी। FSI ने अपनी रिपोर्ट में 6 हजार से अधिक पेड़ काटे जाने की बात कही थी।

NTCT को की गई शिकायत में अधिवक्ता बंसल ने कहा था कि एशिया के पहले कार्बेट नेशनल पार्क में बाघों का घनत्व विश्व के अन्य पार्कों से सबसे ज्यादा है। यहां अवैध पेड़ कटान के अलावा कई बिल्डिंग भी अवैध रूप से बनाई गई।

फारेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के बाद NGT अध्यक्ष आदर्श कुमार गोयल की बेंच ने मामले की सुनवाई के बाद प्रोजेक्ट के निर्माण पर रोक लगा दी। FSI की रिपोर्ट में कहा गया था कि कार्बेट के बफर जोन में निर्माण कार्य व सिविल वर्क करने की इजाजत नहीं है।

NTCA ने अपनी रिपोर्ट में कार्बेट में हुए निर्माण कार्यों को प्रशासनिक व प्रबंधकीय अनियमितता का अभूतपूर्व उदाहरण बताया। NTCA के गंभीर रुख के बाद FSI ने कार्बेट के बफर जोन का सर्वे करने के बाद 6 हजार से अधिक पेड़ काटे जाने सम्बन्धी तथ्य पेश किए थे।

लगभग 20 दिन पहले FSI ने 16.21 हेक्टेयर में 6 हजार से अधिक पेड़ काटे जाने सम्बन्धी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी थी। उस समय पीसीसीएफ विनोद सिंघल ने रिपोर्ट में तकनीकी खामियां बतायी थी।

बिना अनुमति बना दिये बाघों के बाड़े

पाखरो में बाघों के बाड़ों के अंतिम डिजाइन को राष्ट्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण से पास नहीं कराया गया।

पाखरो टाइगर सफारी प्रोजेक्ट में गड़बड़ी

पिछली भाजपा सरकार में वन मंत्री हरक सिंह रावत पर कार्बेट बफर जोन में अवैध कटान, निर्माण व बिना टेंडर के ठेकेदारों से काम कराने के आरोप लगे। आरोपों की जांच फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया ने की और अक्टूबर 2022 के पहले सप्ताह में 81 पन्नों की रिपोर्ट सरकार को सौंप दी । 16 हेक्टेयर से ज्यादा बफर जोन में 6 हजार पेड़ कटने की बात कही गयी।

पाखरो टाइगर सफारी प्रोजेक्ट में गड़बड़ी की विजिलेंस ने भी की थी जांच

कालागढ़ टाइगर रिजर्व पाखरो क्षेत्र में टाइगर सफारी के निर्माण के लिए की गई गड़बड़ी की जॉच विजिलेंस ने भी की थी। पाखरो इलाके में वन विभाग ने 106 हेक्टेयर वन क्षेत्र में टाइगर सफारी के लिए बाड़ों का निर्माण समेत कई अन्य निर्माण कार्य कराए थे। जांच में अवैध कटान की बात भी सामने आई थी। जांच में निर्माण कार्यों के लिए वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति नहीं लेने की बात सामने आयी थीं।

वन विभाग के दो बड़े अफसर हो चुके हैं निलम्बित

इस मामले में गड़बड़ी की पुष्टि होने के बाद कालागढ़ टाइगर रिजर्व के तत्कालीन डीएफओ किशन चंद और तत्कालीन मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक जेएस सुहाग को निलंबित कर दिया गया था। हालांकि, अब दोनों रिटायर हो चुके हैं। इसके अलावा, कालागढ़ टाइगर रिजर्व के तत्कालीन निदेशक राहुल को फारेस्ट मुख्यालय में अटैच कर दिया गया था।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की टीम ने भी इन अधिकारियों पर एक्शन लेने की बात कही थी

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