नई पीढ़ी को देवभूमि की लोक संस्कृति व जड़ों से जोड़ना सामूहिक जिम्मेदारी : धामी
अविकल उत्तराखण्ड
बदरीनाथ। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को बदरीनाथ धाम पहुंचकर भगवान बदरीविशाल के दर्शन-पूजन किए और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने बदरीनाथ मास्टर प्लान के तहत चल रहे विकास कार्यों का निरीक्षण कर उन्हें गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने नंदा अष्टमी उत्सव और भारतीय सेना व जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल-2026 में प्रतिभाग किया। उन्होंने लोक संस्कृति, सीमांत क्षेत्रों के विकास और सेना तथा स्थानीय नागरिकों के बीच सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने बदरीनाथ मास्टर प्लान के तहत चल रहे विभिन्न निर्माण एवं विकास कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। आस्था पथ समेत निर्माणाधीन कार्यों की प्रगति की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप कार्यों को गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ धाम की धार्मिक, आध्यात्मिक और पारंपरिक गरिमा का विशेष ध्यान रखा जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में बदरीनाथ धाम को उसके धार्मिक एवं पौराणिक महत्व के अनुरूप भव्य, दिव्य और सुव्यवस्थित स्वरूप देने की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं। धाम की पारंपरिक पहचान, प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक स्वरूप का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
इसके बाद धामी ने स्वामीनारायण गुरुकुल राजकोट संस्थान के तत्वावधान में आयोजित ‘बदरीनाथ धाम कथा महोत्सव’ में प्रतिभाग किया। महोत्सव में 150 से अधिक संत-साध्वी और 1200 से अधिक श्रद्धालु शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बदरीनाथ धाम भारत की सनातन चेतना और आध्यात्मिक विरासत का प्रमुख केंद्र है। ऐसे आयोजन हमारी परंपराओं, संस्कृति और जीवन मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इससे पहले मुख्यमंत्री ने बामणी गांव पहुंचकर नंदा अष्टमी उत्सव में ग्रामीणों के साथ प्रतिभाग किया। इसके बाद टूरिस्ट अराइवल प्लाजा में भारतीय सेना और जिला प्रशासन चमोली के संयुक्त तत्वावधान में ऑपरेशन सद्भावना के तहत आयोजित दो दिवसीय ‘देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल-2026’ के समापन समारोह में शामिल हुए। उन्होंने विभिन्न सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के विजेता और उपविजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान किए।
मुख्यमंत्री ने महोत्सव परिसर में स्थानीय उत्पादों, महिला स्वयं सहायता समूहों, हस्तशिल्प और पारंपरिक व्यंजनों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को पर्यटन से जोड़ने से सीमांत क्षेत्रों में आजीविका और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने भारतीय सेना की सैन्य प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया और हथियारों व सैन्य उपकरणों की जानकारी ली।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की आत्मा उसकी लोक संस्कृति में बसती है। लोक नृत्य, लोक गीत, परंपराएं और रीति-रिवाज प्रदेश की विशिष्ट पहचान हैं। नई पीढ़ी को भाषा, संस्कृति और अपनी जड़ों से जोड़ना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। ‘विकास भी, विरासत भी’ के मूल मंत्र के साथ सरकार संस्कृति एवं विरासत के संरक्षण के साथ विकास कार्यों को गति दे रही है।
उन्होंने कहा कि वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के माध्यम से सीमांत क्षेत्रों में सड़क, बिजली, दूरसंचार, पर्यटन और आजीविका से जुड़ी सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। माणा, नीति और जादुंग जैसे क्षेत्रों को पर्यटन एवं आजीविका से जोड़कर स्थानीय रोजगार और स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है। पलायन रोकना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने मिलेट मिशन, एप्पल मिशन, होम स्टे, कृषि, बागवानी, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, मधुमक्खी पालन, सुगंधित पौधों और स्थानीय मसालों की खेती के साथ शीतकालीन पर्यटन, साहसिक पर्यटन और ‘वेडिंग इन उत्तराखंड’ जैसी पहलों का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में 3.10 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं स्थानीय उत्पादों, पहाड़ी व्यंजनों और हस्तशिल्प के जरिए आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
धामी ने कहा कि भारतीय सेना और स्थानीय नागरिकों के बीच सहयोग, समन्वय और आपसी जुड़ाव मजबूत करने में ऐसे आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने माणा गांव के ग्रामीणों की पारंपरिक प्रस्तुति की भी सराहना की।

कार्यक्रम में जीओसी-इन-सी सेंट्रल कमान लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता, जीओसी उत्तर भारत एरिया लेफ्टिनेंट जनरल डी.जी. मिश्रा, हरक सिंह, माधव प्रसाद सेमवाल, गजपाल सिंह बर्त्वाल, गजेन्द्र सिंह रावत, विनोद कनवासी, अरुण मैठाणी, जिलाधिकारी गौरव कुमार और पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार सहित सेना के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, स्थानीय नागरिक, युवा, विद्यार्थी और श्रद्धालु मौजूद रहे।



