मेरे सरकार, अब चांद को कुछ न कहियो !

कोरोना काल में देहरादून की एक चटख सुबह। समय, यही कोई 8 बजे। दिन मंगलवार और जगह किशनपुर। थाना, राजपुर। किशनपुर मस्जिद के पास जल रहे कूड़े से धुंआ उठता हुआ। पास ही पटरी पर एक शख्स बाल कटवा रहा है। और दो लोग अपनी बारी के इंतजार में बेंच में बैठे हैं। lockdown की सख्ती में यह जानलेवा ढिलाई की कहानी। प्रधानमंत्री मोदी जी के 10 बजे के बहुप्रतीक्षित tv प्रसारण से ठीक पहले उत्तराखंड की अस्थायी राजधानी dehradun में lockdown में भी वह हो रहा जो किसी भी कीमत पर नही होना चाहिए। अगर ऐसे ही लोगों की हजामत बनती रहे तो कोरोना को फलने फूलने से कोई नही रोक सकता।
एक ताजा वीडियो पोस्ट कर रहा हूँ। 4 मिनट 52 सेकंड का यह वीडियो जाखन निवासी प्रवीण भारद्वाज ने बनाया है।वीडियो में राजपुर थाना के तहत किशनपुर मस्जिद के पास चांद मोहम्मद फुटपाथ किनारे इस्लाम की कटिंग करते नजर आ रहे हैं। बकौल, चांद मोहम्मद, पुलिस ने ही उसे 11 बजे तक सड़क किनारे दुकान खोलने को कहा है। लखनऊ निवासी चांद मोहम्मद 24 साल से देहरादून में मेहनत-मजदूरी कर परिवार का पेट पाल रहा है। परिवार जाखन की झुग्गी में रहता है। । चांद मोहम्मद ने वाजिब बात यह कही कि काम नहीं करेंगे तो खाएंगे क्या। यह तर्क अपनी जगह ठीक है। लेकिन कोरोना संकट के lockdownमें पटरी पर हजामत की दुकान का सज जाना भी प्रशासन की कलई खोल देने के लिए काफी है। वीडियो में यह बात भी सामने आती है कि मेहनतकश चांद मोहम्मद को अभी तक कहीं से भी किसी प्रकार की कोई इमदाद नहीं मिली है। न सरकारी राशन का पैकेट ही उसकी झोपड़ी में पहुँचा और न ही किसी सामाजिक संस्था का सदस्य ही उसके हाथ में भोजन पानी दे फ़ोटो खिंचवाता नजर आया।
हालांकि, चांद मोहम्मद बार-बार यह कहता नजर आया कि वह दवाई से अपने औजार धो रहा है। लेकिन इससे सोशल डिस्टेंसिंग का भी खुला उल्लंघन हो रहा। यह दृश्य देख कोरोना से बचने के लिए सरकार के प्रचार और कोशिशें भी दम तोड़ती नजर आयी।
चांद मोहम्मद ने यह भी साफ कहा कि पुलिस की गाड़ी आयी थी और 11 बजे तक हजामत बनाने की छूट दी। अब यह छूट देने वाले कौन पुलिसकर्मी थे उनकी भी पहचान परेड तो बनती है, अगर चांद मोहम्मद सच बोल रहा है।
इस मामले में चांद मोहम्मद की मजबूरी और गलती भी साफ नजर आ रही। मजबूरी पेट पालने की (राशन की मदद हो जाती तो शायद वह कोरोना संकट में उस्तरा नही पकड़ता) और गलती यह कि उसके उस्तरा पकड़ने से कोरोना का खतरा बढेगा, इस सच से तो चांद मोहम्मद वाकिफ होगा ही होगा।
बहरहाल, यह video प्रधानमंत्री जी के सुबह 10 बजे के प्रसारण से करीब 2 घण्टे पहले शूट किया गया। इधर, लगभग एक सप्ताह पहले गलतफहमी के कारण देहरादून में hair saloons खुल गए थे। लेकिन बाद में DM ने तत्काल दुकानें बंद करवा दी थी।
मैंने यह वीडियो इसलिए पोस्ट नहीं किया कि देहरादून पुलिस अब डंडा लेकर गरीब चांद मोहम्मद की तलाश में निकल जाय। बल्कि इसलिए वीडियो दिखाया कि कोरोना को भगाने के लिए प्रशासन ऐसी किसी भी जानलेवा कोशिशों को मुस्तैदी के साथ रोके।
अब मुख्य जरूरत इस समय चांद मोहम्मद के परिवार को किसी भी नाम की रसोई से अन्न मुहैया कराना है। चांद की कैंची और उस्तरा फिलहाल उसके थैले से बाहर नहीं निकलेगा, यही तो वचन चांद ने साथी प्रवीण भारद्वाज को दिया है। आमीन!

मेरे सरकार, अब चांद को कुछ न कहियो !कोरोना काल में देहरादून की एक चटख सुबह। समय, यही कोई 8 बजे। दिन मंगलवार और जगह किशनपुर। थाना, राजपुर। किशनपुर मस्जिद के पास जल रहे कूड़े से धुंआ उठता हुआ। पास ही पटरी पर एक शख्स बाल कटवा रहा है। और दो लोग अपनी बारी के इंतजार में बेंच में बैठे हैं। lockdown की सख्ती में यह जानलेवा ढिलाई की कहानी। प्रधानमंत्री मोदी जी के 10 बजे के बहुप्रतीक्षित tv प्रसारण से ठीक पहले उत्तराखंड की अस्थायी राजधानी dehradun में lockdown में भी वह हो रहा जो किसी भी कीमत पर नही होना चाहिए। अगर ऐसे ही लोगों की हजामत बनती रहे तो कोरोना को फलने फूलने से कोई नही रोक सकता। एक ताजा वीडियो पोस्ट कर रहा हूँ। 4 मिनट 52 सेकंड का यह वीडियो जाखन निवासी प्रवीण भारद्वाज ने बनाया है।वीडियो में राजपुर थाना के तहत किशनपुर मस्जिद के पास चांद मोहम्मद फुटपाथ किनारे इस्लाम की कटिंग करते नजर आ रहे हैं। बकौल, चांद मोहम्मद, पुलिस ने ही उसे 11 बजे तक सड़क किनारे दुकान खोलने को कहा है। लखनऊ निवासी चांद मोहम्मद 24 साल से देहरादून में मेहनत-मजदूरी कर परिवार का पेट पाल रहा है। परिवार जाखन की झुग्गी में रहता है। । चांद मोहम्मद ने वाजिब बात यह कही कि काम नहीं करेंगे तो खाएंगे क्या। यह तर्क अपनी जगह ठीक है। लेकिन कोरोना संकट के lockdownमें पटरी पर हजामत की दुकान का सज जाना भी प्रशासन की कलई खोल देने के लिए काफी है। वीडियो में यह बात भी सामने आती है कि मेहनतकश चांद मोहम्मद को अभी तक कहीं से भी किसी प्रकार की कोई इमदाद नहीं मिली है। न सरकारी राशन का पैकेट ही उसकी झोपड़ी में पहुँचा और न ही किसी सामाजिक संस्था का सदस्य ही उसके हाथ में भोजन पानी दे फ़ोटो खिंचवाता नजर आया।हालांकि, चांद मोहम्मद बार-बार यह कहता नजर आया कि वह दवाई से अपने औजार धो रहा है। लेकिन इससे सोशल डिस्टेंसिंग का भी खुला उल्लंघन हो रहा। यह दृश्य देख कोरोना से बचने के लिए सरकार के प्रचार और कोशिशें भी दम तोड़ती नजर आयी। चांद मोहम्मद ने यह भी साफ कहा कि पुलिस की गाड़ी आयी थी और 11 बजे तक हजामत बनाने की छूट दी। अब यह छूट देने वाले कौन पुलिसकर्मी थे उनकी भी पहचान परेड तो बनती है, अगर चांद मोहम्मद सच बोल रहा है। इस मामले में चांद मोहम्मद की मजबूरी और गलती भी साफ नजर आ रही। मजबूरी पेट पालने की (राशन की मदद हो जाती तो शायद वह कोरोना संकट में उस्तरा नही पकड़ता) और गलती यह कि उसके उस्तरा पकड़ने से कोरोना का खतरा बढेगा, इस सच से तो चांद मोहम्मद वाकिफ होगा ही होगा।बहरहाल, यह video प्रधानमंत्री जी के सुबह 10 बजे के प्रसारण से करीब 2 घण्टे पहले शूट किया गया। इधर, लगभग एक सप्ताह पहले गलतफहमी के कारण देहरादून में hair saloons खुल गए थे। लेकिन बाद में DM ने तत्काल दुकानें बंद करवा दी थी। मैंने यह वीडियो इसलिए पोस्ट नहीं किया कि देहरादून पुलिस अब डंडा लेकर गरीब चांद मोहम्मद की तलाश में निकल जाय। बल्कि इसलिए वीडियो दिखाया कि कोरोना को भगाने के लिए प्रशासन ऐसी किसी भी जानलेवा कोशिशों को मुस्तैदी के साथ रोके। अब मुख्य जरूरत इस समय चांद मोहम्मद के परिवार को किसी भी नाम की रसोई से अन्न मुहैया कराना है। चांद की कैंची और उस्तरा फिलहाल उसके थैले से बाहर नहीं निकलेगा, यही तो वचन चांद ने साथी प्रवीण भारद्वाज को दिया है। आमीन!

Posted by Avikal Thapliyal on Tuesday, April 14, 2020

Uttarakhandnews

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