विक्रम शर्मा हत्याकांड में एक लाख का इनामी आरोपी गिरफ्तार

हत्या की साजिश रचने और फंडिंग करने का आरोप, सहारनपुर से दबोचा गया यशराज सिंह

अविकल उत्तराखंड

देहरादून। चर्चित विक्रम शर्मा हत्याकांड में फरार चल रहे एक लाख रुपये के इनामी आरोपी को देहरादून पुलिस और एसटीएफ उत्तराखंड की संयुक्त टीम ने सहारनपुर से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी घटना के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए पश्चिम बंगाल भाग गया था। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी ने अपने साथियों के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची थी तथा घटना को अंजाम देने वाले आरोपियों के आने-जाने और ठहरने की व्यवस्था के लिए फंडिंग भी की थी।

गौरतलब है कि 13 फरवरी 2026 को सिल्वर सिटी, राजपुर रोड स्थित जिम से बाहर आते समय विक्रम शर्मा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस संबंध में कोतवाली डालनवाला में मुकदमा दर्ज किया गया था। विवेचना के दौरान झारखंड से आए आरोपियों की संलिप्तता सामने आई थी। पुलिस इससे पहले दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है, जबकि छह अन्य आरोपी लगातार फरार चल रहे थे। फरारी के चलते सभी आरोपियों पर एक-एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था।
पुलिस के अनुसार 12 मई 2026 को मुखबिर की सूचना पर सहारनपुर में दबिश देकर यशराज सिंह पुत्र राजकुमार सिंह निवासी बागबेड़ा, जमशेदपुर, झारखंड को होटल सूर्यलोक के सामने रेलवे रोड से गिरफ्तार किया गया।

पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह वर्ष 2024 से टाटानगर रेलवे स्टेशन पर दुकानों में भुजिया, चिप्स, केक और बिस्किट आदि की सप्लाई का काम करता था। उसने विशाल सिंह के कहने पर अपने साथियों आकाश प्रसाद, अंकित वर्मा और जितेंद्र साहू के साथ मिलकर विक्रम शर्मा की हत्या की योजना बनाई थी। आरोपियों ने इससे पहले नोएडा और दिल्ली में भी हत्या का प्रयास किया था, लेकिन भीड़भाड़ और विक्रम शर्मा के साथ अधिक लोगों की मौजूदगी के कारण वे सफल नहीं हो सके।
इसके बाद आरोपियों ने देहरादून में हत्या की साजिश रची। अंकित वर्मा को विक्रम शर्मा की दिनचर्या और आने-जाने के रास्तों की रेकी के लिए कई बार देहरादून भेजा गया। रेकी के बाद पता चला कि विक्रम शर्मा सुबह जिम अकेले जाते हैं, जिसके बाद जिम आते-जाते समय हत्या की योजना बनाई गई।

पुलिस के मुताबिक घटना में इस्तेमाल संसाधनों के लिए आर्थिक मदद यशराज सिंह ने की थी। उसने आरोपी आकाश प्रसाद को फ्लाइट टिकट और अन्य खर्चों के लिए यूपीआई के जरिए करीब 15 हजार रुपये भेजे थे। हरिद्वार में होटल, स्कूटी और मोटरसाइकिल किराये का भुगतान भी यूपीआई के माध्यम से किया गया था।

एसएसपी डोभाल ने बताया कि हत्या के बाद आरोपी यशराज अपने पिता और अन्य साथियों के साथ फरार हो गया था।
उसका पिता राजकुमार सिंह पहले ही झारखंड से गिरफ्तार किया जा चुका है। यशराज पश्चिम बंगाल के खड़गपुर में अपनी बुआ के घर छिपा हुआ था। पुलिस के अनुसार वह अपने पिता के वकील से मिलने हरिद्वार आया था और बाद में कानूनी सलाह के लिए सहारनपुर पहुंचा, जहां पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

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