अंकिता मर्डर केस की सीबीआई जांच चुनावी मुद्दे में तब्दील
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भाजपा नेता दुष्यंत गौतम को साजिशन फंसाने का आरोप
कथित ऑडियो-वीडियो मामले में पूर्व विधायक सुरेश राठौर गिरफ्तार
अविकल थपलियाल
देहरादून। बीते रविवार को गिरफ्तार किए गए भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर को सोमवार को दून की कोर्ट में पेश किया गया। न्यायालय में पेश किए जाने के बाद उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जिला कारागार सुद्धोवाला भेज दिया गया है।
उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े कथित ऑडियो-वीडियो प्रकरण में दून पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए हरिद्वार जिले के ज्वालापुर सीट के पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर को 14 जून की रात गिरफ्तार कर लिया था।
पुलिस का आरोप है कि भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री एवं उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम तथा पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं को एक सुनियोजित साजिश के तहत संवेदनशील मामले में फंसाने और उनकी छवि धूमिल करने के उद्देश्य से सोशल मीडिया पर कथित रूप से भ्रामक एवं मनगढ़ंत ऑडियो-वीडियो सामग्री प्रसारित की गई थी। मामले की विवेचना में पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने यह कार्रवाई की है।
पुलिस के अनुसार, 5 जनवरी 2026 को भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री एवं उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम ने कोतवाली डालनवाला में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि पूर्व विधायक सुरेश राठौर और अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने कुछ राजनीतिक तत्वों के साथ मिलकर आपराधिक षड्यंत्र रचा।
आरोप है कि दोनों ने फर्जी ऑडियो और वीडियो तैयार कर अथवा उनका प्रसार कर भाजपा नेताओं की छवि खराब करने, सामाजिक वैमनस्य फैलाने तथा कानून-व्यवस्था प्रभावित करने का प्रयास किया।
तहरीर के आधार पर कोतवाली डालनवाला में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।
जांच के दौरान पुलिस ने साक्ष्यों, डिजिटल सामग्री और गवाहों के बयानों का परीक्षण किया। विवेचना में सुरेश राठौर के खिलाफ अतिरिक्त अपराध के साक्ष्य मिलने पर बीएनएस की धारा 308(6) भी बढ़ाई गई।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून के निर्देश पर गठित टीम ने 14 जून को मुखबिर की सूचना पर सुरेश राठौर को बिहारीगढ़ फ्लाईओवर के समीप से गिरफ्तार कर लिया। न्यायालय में पेश किए जाने के बाद उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जिला कारागार सुद्धोवाला भेज दिया गया है।
अंकिता भंडारी हत्याकांड: अब तक की प्रमुख स्थिति
सितंबर 2022 में पौड़ी जिले के यमकेश्वर स्थित वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की हत्या का मामला सामने आया था। इस मामले में रिजॉर्ट संचालक पुलकित आर्य, अंकित गुप्ता और सौरभ भास्कर को गिरफ्तार किया गया था। जांच में आरोप सामने आया कि वीआईपी मेहमानों को “विशेष सेवाएं” देने के दबाव का विरोध करने पर अंकिता की हत्या कर उसका शव चीला नहर में फेंक दिया गया।
मामले की जांच के बाद एसआईटी ने आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। कोटद्वार स्थित विशेष अदालत में मुकदमे की सुनवाई जारी रही, जिसमें अभियोजन और बचाव पक्ष के गवाहों के बयान दर्ज किए गए। राज्यभर में इस मामले को लेकर लंबे समय तक जनआक्रोश बना रहा और अंकिता को न्याय दिलाने की मांग लगातार उठती रही। मई 2025 में तीनों अभियुक्तों को उम्र कैद की सजा हुई।
इसी बीच, बीते कुछ महीनों में सोशल मीडिया पर अंकिता प्रकरण से जुड़े कई ऑडियो, वीडियो और कथित खुलासे वायरल हुए। इन्हीं में से कुछ सामग्रियों को लेकर भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम ने आरोप लगाया कि उन्हें और अन्य नेताओं को जानबूझकर मामले से जोड़ने तथा राजनीतिक लाभ के लिए दुष्प्रचार किया गया। इसी शिकायत के आधार पर दर्ज मुकदमे में अब पूर्व विधायक सुरेश राठौर की गिरफ्तारी हुई है।
पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना अभी जारी है और प्रकरण में अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। वहीं सुरेश राठौर की गिरफ्तारी के बाद इस मामले ने एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है।
सीबीआई जांच के परिणाम का इंतजार
गौरतलब है कि बीते दिसम्बर माह में उर्मिला सनावर व राठौर के ‘खुलासे’में भाजपा के नेताओं का नाम कथित वीआईपी के तौर पर सामने आया था। उर्मिला ने इस मामले को वीडियो व ऑडियो के जरिये सार्वजनिक किया। इसके बाद प्रदेश की जनता कथित वीआईपी के मुद्दे पर सड़कों पर उतर गयी। भारी जनाक्रोश के बाद सीएम धामी ने जनवरी में सीबीआई जांच की घोषणा की।
छह महीने बीत जाने के बाद सीबीआई की जांच का कोई रिजल्ट सामने नहीं आया। लेकिन भाजपा ने संगठन महामंत्री का प्रदेश से राजस्थान ट्रांसफर कर दिया। जबकि दुष्यंत गौतम अभी प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहे है।
इधऱ, दून पुलिस ने पूर्व विधायक की गिरफ्तारी कर हलचल बढ़ा दी है। राठौर की गिरफ्तारी पर उर्मिला सनावर का कोई बयान सामने नहीं आया है। अंकिता मर्डर केस की सीबीआई जांच के मुद्दे पर विपक्षी राजनीतिक दल व सामाजिक संगठन सीबीआई कार्यालय का घेराव भी कर चुके हैं।
लगभग चार साल बाद चुनावी साल में अंकिता मर्डर केस की हों रही सीबीआई जांच प्रमुख चुनावी मुद्दा बनती जा रही है।



