आंदोलनकारियों ने दी उग्र कदम उठाने की चेतावनी
133 दिन से धरने पर राज्य आंदोलनकारी
अविकल उत्तराखंड
देहरादून। राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों की नियुक्तियों का मामला 13 साल से लंबित है। नियुक्ति की मांग को लेकर 15 जून 2026 से शहीद स्मारक, देहरादून में धरना दे रहे आंदोलनकारियों को कैबिनेट की हालिया बैठक से भी निराशा हाथ लगी। उनका आरोप है कि शासन स्तर पर आश्वासन दिए जाने के बावजूद मांग पर कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ है।
मंच संयोजक अंबुज शर्मा ने कहा कि आंदोलनकारी वर्ष 2013 से नियुक्तियों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। मुख्यमंत्री के साथ हुई वार्ता के क्रम में 14 सितंबर 2026 को मुख्य सचिव आनंद वर्धन और गृह सचिव शैलेश बगौली के साथ बैठक हुई थी। इसमें आंदोलनकारियों के मामले को अगली कैबिनेट बैठक में लाकर कैबिनेट उपसमिति गठित करने पर सहमति बनी थी।
अंबुज शर्मा के अनुसार, गृह सचिव के आश्वासन के बाद आंदोलनकारियों ने अपना क्रमिक अनशन स्थगित कर दिया था। इसके बावजूद अब तक सरकार की चार कैबिनेट बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन उनकी मांग पर कोई निर्णय नहीं लिया गया।
उन्होंने कहा कि लंबे समय से आंदोलन कर रहे लोग शारीरिक, आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान हो चुके हैं। यदि आगामी कैबिनेट बैठक में उनकी मांग पर विचार नहीं किया गया तो आंदोलनकारी सामूहिक रूप से आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर होंगे। उन्होंने इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होने की बात कही।
शुक्रवार को धरने को समर्थन देने वालों में प्रशांत तड़ियाल, विकास रावत, वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी खुशपाल सिंह परमार, सुनीता ठाकुर, अंबुज शर्मा, मनोरथ प्रसाद ध्यानी, प्रभात डंडियाल, राम किशन, रेखा शर्मा, गीता नेगी, शांति तड़ियाल और विनोद रविंद्र सहित अन्य लोग मौजूद रहे।




