धामी सरकार ने बनाया कठोर नकल-विरोधी कानून
राहुल के दौरे से भाजपा घबरा गयी-गोदियाल
34 हजार से अधिक युवाओं को मिली सरकारी नौकरी
अविकल उत्तराखंड
देहरादून। उत्तराखंड में भर्ती घोटालों को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के देहरादून दौरे से पहले भाजपा ने भर्ती घोटालों के इतिहास का हवाला देते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा है।
उधर, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष का कहना है कि राहुल गांधी की छात्रों की गूंज कार्यक्रम से भाजपा में घबराहट फैल गयी है। गोदियाल ने कहा कि परेड ग्राउंड मैदान की अनुमति रद्द करने से साफ हो गया कि भाजपा नेतृत्व राहुल गांधी के कार्यक्रम में रोड़े अटका रहा है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कार्यक्रम से जुड़े सामान को परेड ग्राउंड में जाने से रोका गया। और पुलिस के साथ पार्टी कार्यकर्ता व नेताओं की जोरदार भिड़ंत हुई। उन्होंने कहा कि 17 जुलाई को देहरादून में राहुल गांधी लाखों युवाओं को पेपर लीक की असलियत बताएगी।
भाजपा के अमित मालवीय का प्रहार
दूसरी ओर, भाजपा आईटी सेल के हेड अमित मालवीय ने X पर की गई।पोस्ट में कांग्रेस काल के भर्ती घोटालों को रेखांकित किया है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं की शुरुआत कांग्रेस शासनकाल में हुई थी, जबकि वर्तमान सरकार ने भर्ती घोटालों के खिलाफ सख्त कानून बनाकर नकल माफियाओं पर कार्रवाई की और भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता स्थापित की है।
भाजपा की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि एन.डी. तिवारी सरकार के दौरान दरोगा भर्ती और पटवारी भर्ती में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे थे। पटवारी भर्ती में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों के आरोपों के बाद भर्ती प्रक्रिया निरस्त करनी पड़ी थी। इसी प्रकार हरीश रावत सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2016 की यूकेएसएसएससी वीपीडीओ भर्ती परीक्षा विवादों में रही, जिसमें बाद में आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष, सचिव और परीक्षा नियंत्रक सहित कई लोगों की गिरफ्तारी हुई। इसके अलावा सिडकुल भर्ती, यूबीटीईआर और आयुर्वेद विश्वविद्यालय की भर्तियां भी विवादों में रही थीं।
भाजपा ने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में भर्ती प्रक्रियाओं पर लगातार सवाल उठते रहे, लेकिन व्यवस्था में सुधार के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। इसके विपरीत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कार्यकाल में यूकेएसएसएससी भर्ती घोटाले के सामने आने पर सरकार ने देश के सबसे कठोर नकल-विरोधी कानूनों में से एक को लागू किया और नकल माफियाओं के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया।
भाजपा के अनुसार, भर्ती घोटालों में संलिप्त 100 से अधिक नकल माफियाओं को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।
भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए संस्थागत सुधार किए गए हैं। पिछले चार वर्षों में प्रदेश के 34 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से सरकारी नौकरियां उपलब्ध कराई गई हैं।
बयान में कहा गया है कि उत्तराखंड का युवा केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि सरकारों के कामकाज और उनके रिकॉर्ड को देखता है।
युवाओं के भविष्य पर राजनीति करने वालों को भर्ती घोटालों के पूरे इतिहास और उनके लिए जिम्मेदार परिस्थितियों पर भी जवाब देना चाहिए।
भाजपा आईटी सेल के अमित मालवीय का ट्वीट देखें
देहरादून आने से पहले उत्तराखंड की जनता और युवाओं को पूरा सच भी बता दीजिए
उत्तराखंड को भर्ती घोटालों का “epicentre” किसने बनाया था? इतिहास गवाह है कि इसकी जड़ें कांग्रेस के शासनकाल में हैं।
एन.डी. तिवारी सरकार (2002–2007) के दौरान-
- दरोगा भर्ती में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे। मामला इतना गंभीर था कि जांच CBI तक पहुंची।
- पटवारी भर्ती में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों के आरोप लगे। एक ही परिवार के कई सदस्यों के चयन और लेन-देन के आरोपों के बाद भर्ती निरस्त करनी पड़ी।
हरीश रावत सरकार (2014–2017) के दौरान-
- 2016 की UKSSSC VPDO भर्ती परीक्षा विवादों में रही। बाद की जांच में आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष, सचिव और परीक्षा नियंत्रक सहित कई लोगों की गिरफ्तारी हुई।
- सिडकुल भर्ती विवाद में पक्षपात और प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने के आरोप लगे। SIT जांच तक करनी पड़ी।
- UBTER और आयुर्वेद विश्वविद्यालय की भर्तियां भी लगातार विवादों और अनियमितताओं के आरोपों में घिरी रहीं।
यानी जिस दौर में कांग्रेस सत्ता में थी, उस समय भर्ती प्रक्रियाओं पर लगातार सवाल उठे, जांच एजेंसियां लगीं, भर्तियां रद्द हुईं और युवाओं का विश्वास टूटता गया।
अब वर्तमान की भी बात कर लेते हैं।
जब मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के कार्यकाल में UKSSSC भर्ती घोटाले का मामला सामने आया, तो क्या उसे दबाया गया? नहीं।
- देश का सबसे कठोर नकल-विरोधी कानून बनाया गया।
- 100 से अधिक नकल माफियाओं को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।
- भर्ती प्रक्रियाओं को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए व्यापक सुधार किए गए।
- पिछले चार वर्षों में 34,000 से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से मिली हैं।
यही फर्क है-
कांग्रेस के दौर में घोटाले होते थे, कार्रवाई नहीं होती थी। भाजपा सरकार में गड़बड़ी सामने आई तो कानून बना, माफिया जेल गए, जांच हुई, गिरफ्तारियां हुईं और व्यवस्था बदली गई।
युवाओं के भविष्य पर राजनीति करने से पहले यह भी बताइए कि जिन भर्ती घोटालों की नींव कांग्रेस के शासनकाल में पड़ी, उनके लिए जवाबदेह कौन था?
उत्तराखंड का युवा सब याद रखता है। उसे भाषण नहीं, रिकॉर्ड दिखाई देता है। एक तरफ भर्ती घोटालों का इतिहास है, दूसरी तरफ कठोर कानून, माफियाओं पर कार्रवाई, पारदर्शी भर्ती व्यवस्था और हजारों युवाओं को योग्यता के आधार पर मिली सरकारी नौकरियां।
युवाओं के सपनों की सबसे बड़ी दुश्मन वह राजनीति है जिसने वर्षों तक व्यवस्था को सड़ने दिया। और युवाओं का सबसे बड़ा साथी वह शासन है जिसने व्यवस्था को साफ किया, कानून को सख्ती से लागू किया और भर्ती प्रक्रिया में विश्वास बहाल किया।



