ध्यान भटकाने के लिए राहुल गांधी पर आरोप लगा रही भाजपा
अविकल उत्तराखंड
देहरादून। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं एआईसीसी सदस्य सूर्यकांत धस्माना ने भाजपा और राज्य सरकार पर पेपर लीक, युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ तथा जन मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया है।
उन्होंने कहा कि एक ओर प्रदेश में लगातार पेपर लीक के मामले सामने आ रहे हैं, वहीं भाजपा वास्तविक मुद्दों पर जवाब देने के बजाय विपक्ष और राहुल गांधी पर आरोप लगाने में जुटी है।
कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में धस्माना ने कहा कि वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय में सामने आए पेपर लीक मामले ने सरकार के तमाम दावों की पोल खोल दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश में लगभग एक दर्जन पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं, जिससे लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। प्रदेश में बेरोजगारी चरम पर है और नकल माफिया को संरक्षण मिला हुआ है।

धस्माना ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में आस्था के केंद्र भी सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने केदारनाथ धाम में 223 किलो सोना गायब होने, बद्रीनाथ धाम में करोड़ों रुपये के चढ़ावे की चोरी तथा अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से संबंधित कथित अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इन मामलों पर मौन हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव में पेपर लीक, नकल माफिया और मंदिरों के चढ़ावे की चोरी के मुद्दे को जन-जन तक पहुंचाएगी।
कैबिनेट मंत्री खजान दास की ओर से राहुल गांधी पर लगाए गए आरोपों पर पलटवार करते हुए धस्माना ने कहा कि देशभर में युवा और छात्र परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता तथा शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। विपक्ष संसद और सड़कों पर युवाओं की आवाज उठा रहा है, लेकिन भाजपा इन मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए राहुल गांधी पर अनर्गल आरोप लगा रही है।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार युवाओं की मांगों की अनदेखी करती है और आंदोलनरत छात्रों पर बल प्रयोग करती है, तो विपक्ष का दायित्व है कि वह लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराए। राहुल गांधी ने भी युवाओं और छात्रों के मुद्दों को उठाने का काम किया है, जिससे भाजपा असहज महसूस कर रही है।
धस्माना ने आरोप लगाया कि उत्तराखंड में पेपर लीक की घटनाएं रुक नहीं रही हैं, जबकि भाजपा और राज्य सरकार वास्तविक समस्याओं का समाधान करने के बजाय राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में व्यस्त हैं।



