जमीन के मुद्दे पर भाजपा सरकार को घेरा
भूमि बचाओ आंदोलन से गरमाई उत्तराखंड की सियासत
2027 के चुनाव से पहले कांग्रेस ने खोला मोर्चा
अविकल थपलियाल
देहरादून। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 6 नवंबर को देहरादून आगमन से ठीक पहले उत्तराखंड में सियासी पारा चढ़ गया है। विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच कांग्रेस ने सरकारी जमीनों और ऐतिहासिक धरोहरों को निजी हाथों में सौंपने के मुद्दे को धामी सरकार के खिलाफ बड़े राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।
बुधवार को प्रदेशव्यापी ‘भूमि बचाओ-धामी हटाओ’ अभियान के तहत कांग्रेस ने 11 स्थानों पर प्रदर्शन कर सरकार को घेरा। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य समेत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने अलग-अलग मोर्चों पर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। मसूरी समेत कई स्थानों पर भाजपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के साथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं की तीखी बहस भी हुई। इससे साफ है कि जमीन का मुद्दा अब केवल प्रशासनिक या नीतिगत विवाद नहीं, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनाव की सियासी लड़ाई का अहम हिस्सा बनने जा रहा है।
कांग्रेस ने इस आंदोलन के जरिये भाजपा सरकार को घेरने के साथ ही प्रदेश में जमीन, रोजगार, स्थानीय अधिकार और उत्तराखंड की अस्मिता से जुड़े सवालों को चुनावी बहस के केंद्र में लाने की कोशिश की है। पार्टी का आरोप है कि पर्यटन और सर्विस सेक्टर के नाम पर सरकारी संपत्तियों को लंबे समय की लीज पर निजी कंपनियों को सौंपने की तैयारी की जा रही है। कांग्रेस ने इसे प्रदेश के संसाधनों की बंदरबांट करार देते हुए आंदोलन को गांव-गांव तक ले जाने का ऐलान किया है।
अलकनंदा होटल से हरीश रावत की हुंकार
हरिद्वार में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ऐतिहासिक अलकनंदा होटल परिसर के समीप प्रदर्शन किया। रावत ने आरोप लगाया कि धामी सरकार उत्तराखंड की बहुमूल्य जमीनों और ऐतिहासिक सरकारी संपत्तियों को पूंजीपतियों और बाहरी भू-माफियाओं के हवाले कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य का गठन जल, जंगल और जमीन पर स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए हुआ था, लेकिन वर्तमान सरकार उन्हीं संसाधनों को निजी हाथों में सौंपने की नीति पर चल रही है।
उन्होंने चेतावनी दी कि कांग्रेस उत्तराखंड की धरोहरों और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए चुप नहीं बैठेगी। आंदोलन को हर गांव और हर गली तक पहुंचाया जाएगा। कांग्रेस ने अलकनंदा होटल सहित सरकारी संपत्तियों के निजीकरण पर रोक, कड़े भू-कानून और स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने की मांग उठाई।
आईडीपीएल की 633 एकड़ जमीन पर हरक सिंह का हमला
ऋषिकेश के आईडीपीएल परिसर में प्रदेश कांग्रेस चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत के नेतृत्व में प्रदर्शन हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आईडीपीएल की लगभग 633 एकड़ जमीन को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है। उनके अनुसार, यह भूमि औद्योगिक विकास, स्वास्थ्य सेवाओं और स्थानीय युवाओं के रोजगार के लिए इस्तेमाल होनी चाहिए, न कि बड़े पूंजीपतियों के व्यावसायिक हितों के लिए।

हरक सिंह ने कहा कि आईडीपीएल की जमीन उत्तराखंड की महत्वपूर्ण सार्वजनिक संपत्ति है। इसके निजीकरण या लीज की प्रक्रिया वापस नहीं ली गई तो कांग्रेस सड़क से सदन तक आंदोलन तेज करेगी। प्रदर्शन में पूर्व मंत्री शूरवीर सिंह सजवाण, जयेन्द्र रमोला, विजय सारस्वत, राजपाल सिंह खरोला, ललित मोहन मिश्रा सहित अनेक कांग्रेस नेता और स्थानीय लोग शामिल हुए। आईडीपीएल की आवासीय कॉलोनियों में रह रहे परिवारों के भविष्य और उनके पुनर्वास का सवाल भी उठाया गया।
पटवाडांगर की जमीन पर यशपाल आर्य ने उठाए गंभीर सवाल
नैनीताल जिले में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने पटवाडांगर की जमीन और ज्योलीकोट निरीक्षण भवन को निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए। कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य गुरदीप सप्पल और अन्य कार्यकर्ताओं के साथ प्रदर्शन करते हुए आर्य ने आरोप लगाया कि सरकार बाजार मूल्य के अनुसार लगभग एक लाख करोड़ रुपये की सरकारी जमीनों और धरोहरों को 60 से 90 वर्ष की लीज पर निजी कंपनियों को देने की तैयारी कर रही है।
उन्होंने पटवाडांगर की जमीन के सरकारी दस्तावेजों में अलग-अलग विभागों के स्वामित्व और अलग-अलग रकबे दर्ज होने का मुद्दा उठाया। आर्य के अनुसार, जनवरी 2025 में शासनादेश के जरिये जमीन को कृषि विभाग के स्वामित्व वाली बताकर यूआईआईडीबी को सौंपने की प्रक्रिया शुरू की गई, जबकि सितंबर 2025 में राजस्व विभाग ने संबंधित क्षेत्र का सर्वेक्षण और अभिलेख तैयार करने की कार्रवाई शुरू की थी। उन्होंने सवाल किया कि जब जमीन का मालिकाना हक और वास्तविक पैमाइश ही स्पष्ट नहीं थी तो उसे होटल परियोजना के लिए कैसे आवंटित कर दिया गया?

आर्य ने दावा किया कि पटवाडांगर की 13.64 एकड़ जमीन 90 वर्ष के लिए 37.80 करोड़ रुपये के रिजर्व प्राइस और पांच रुपये प्रति वर्गमीटर सालाना किराये पर देने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने रामगढ़, रातीघाट, रानीबाग, पाटकोट और जॉर्ज एवरेस्ट जैसी संपत्तियों का उल्लेख करते हुए सभी निविदाएं निरस्त करने, जमीन विभागों को लौटाने और पूरे प्रकरण की उच्च न्यायालय की निगरानी में सीबीआई जांच कराने की मांग की।
रायपुर में प्रीतम सिंह की न्याय यात्रा, अंकिता और वोट चोरी का मुद्दा भी उठा
इसी बीच देहरादून की रायपुर विधानसभा में कांग्रेस कैंपेन कमेटी के अध्यक्ष प्रीतम सिंह के नेतृत्व में उत्तराखंड न्याय यात्रा निकाली गई। बलबीर रोड से शुरू हुई यात्रा विभिन्न मार्गों से होते हुए काली मंदिर, रायपुर पहुंची। इसमें वोट चोरी, बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार, महिला सुरक्षा और अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग प्रमुखता से उठाई गई।
प्रीतम सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में मताधिकार की रक्षा जरूरी है और अंकिता भंडारी को पूर्ण न्याय दिलाने का सवाल आज भी प्रदेश की जनता के सामने है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार भ्रष्टाचार और जनसमस्याओं पर जवाब देने से बच रही है। महानगर कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. जसविंदर सिंह गोगी ने कहा कि कांग्रेस 2027 के विधानसभा चुनाव में पूरी ताकत और एकजुटता के साथ उतरेगी।

अमित शाह के दौरे से पहले सियासी संदेश
राजनीतिक दृष्टि से कांग्रेस का यह प्रदर्शन कई मायनों में महत्वपूर्ण है। अमित शाह के उत्तराखंड दौरे से ठीक पहले कांग्रेस ने जमीन के मुद्दे को प्रदेशव्यापी अभियान का रूप देकर भाजपा सरकार को राजनीतिक चुनौती देने की कोशिश की है। मसूरी सहित विभिन्न स्थानों पर भाजपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के साथ हुई तीखी बहस ने आंदोलन को और राजनीतिक रंग दिया।
दरअसल, 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ऐसे मुद्दों की तलाश में है, जिनके जरिये पहाड़ और मैदान दोनों क्षेत्रों में जनता से सीधा जुड़ाव बनाया जा सके। जमीन, भू-कानून, स्थानीय रोजगार, पलायन और सरकारी संपत्तियों का निजीकरण ऐसे मुद्दे हैं, जिनका असर प्रदेश के व्यापक जनमानस पर पड़ सकता है। कांग्रेस इन्हें भाजपा सरकार की नीतियों से जोड़कर चुनावी विमर्श तैयार करना चाहती है।
दूसरी ओर भाजपा के सामने इन आरोपों का तथ्यात्मक जवाब देने और सरकारी संपत्तियों के उपयोग को लेकर अपनी नीति स्पष्ट करने की चुनौती होगी। फिलहाल कांग्रेस ने ‘भूमि बचाओ-धामी हटाओ’ के नारे के साथ चुनावी रणभूमि में अपना एक बड़ा मुद्दा उतार दिया है। अब देखना होगा कि यह आंदोलन प्रदेश की राजनीति में कितना असर छोड़ता है और भाजपा इसे किस तरह जवाब देती है।




