यूनियनों के माध्यम से पंजीकरण बहाल करने की अपील
अविकल उत्तराखंड
देहरादून। निर्माण मजदूरों की ओर से चलाया जा रहा पोस्टर हस्ताक्षर अभियान गांधी पार्क गेट पर समाप्त हुआ।
इस मौके पर मजदूर प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री एवं श्रम मंत्री से मांग की कि नियमों के अनुसार दिहाड़ी निर्माण मजदूरों का पंजीकरण फिर से यूनियनों के माध्यम से कराया जाए।
प्रतिनिधियों ने कहा कि कुछ वर्ष पहले सरकार ने यूनियनों के जरिए पंजीकरण की व्यवस्था लागू कर सकारात्मक पहल की थी, लेकिन पिछले आठ महीनों से सरकारी ठेकेदार के प्रमाण पत्र जैसी अनिवार्य शर्तें लागू कर दी गई हैं। उनका कहना था कि ये शर्तें अधिकांश दिहाड़ी मजदूरों के लिए पूरी करना संभव नहीं है, जिससे पंजीकरण प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
वक्ताओं ने कहा कि बढ़ती महंगाई और रोजमर्रा की जरूरतों के बीच श्रमिकों के लिए श्रम विभाग की योजनाओं का लाभ बेहद जरूरी है, लेकिन वर्तमान व्यवस्था के कारण वास्तविक निर्माण मजदूर पंजीकरण से वंचित हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा प्रक्रिया में अपात्र लोगों का पंजीकरण आसान हो गया है, जबकि असली मजदूरों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
मजदूर प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि किसी यूनियन पर दलाली या योजनाओं के दुरुपयोग के आरोप हैं तो संबंधित यूनियन के खिलाफ कार्रवाई की जाए, लेकिन सभी यूनियनों को प्रक्रिया से बाहर करना उचित नहीं है। उनका कहना था कि यूनियनों को हटाने से वास्तविक निर्माण मजदूरों का पंजीकरण लगभग असंभव हो गया है।
वक्ताओं ने कैग की पूर्व रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में पात्र मजदूरों में से 10 प्रतिशत से भी कम श्रमिक पंजीकृत हैं और पंजीकृत लोगों में बड़ी संख्या अपात्र व्यक्तियों की बताई गई थी। उन्होंने कहा कि व्यवस्था में सुधार के बजाय नई शर्तों से स्थिति और जटिल हो सकती है।
मजदूर नेताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री के पास ही श्रम विभाग की जिम्मेदारी होने के कारण उनसे आगे भी वार्ता की जाएगी और उचित नियमों के साथ यूनियनों के माध्यम से पंजीकरण व्यवस्था बहाल करने की मांग जारी रखी जाएगी। आगामी दिनों में विभिन्न क्षेत्रों से एकत्र हस्ताक्षरित पोस्टर मुख्यमंत्री आवास भेजे जाएंगे।
कार्यक्रम में सुनीता देवी, अशोक कुमार, मुन्ना कुमार, प्रभुत पंडित, रमन पंडित, संजय, पप्पू, अरुण तांती, इंद्रदेव, सुवा लाल, रामू सोनी, रामदास, मनोज सहित अन्य मजदूर मौजूद रहे।

