ऋषिकेश-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग पर पेड़ कटान का विरोध
अविकल उत्तराखंड
उत्तरकाशी। पर्यावरणविद् सुरेश भाई ने ऋषिकेश-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग पर बड़ी संख्या में हरे पेड़ों की कटाई पर गहरी चिंता जताते हुए इसे पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बताया है। उन्होंने कहा कि केवल कुछ मिनट की यात्रा बचाने के लिए हजारों पेड़ों की बलि देना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। राज्य और केंद्र सरकार को तत्काल पेड़ों की कटाई पर रोक लगानी चाहिए।
सुरेश भाई ने कहा कि पहले से मौजूद सात मोड़ वाले ऋषिकेश-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों की आवाजाही के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध है। इसके बावजूद पिछले दो दिनों से सड़क चौड़ीकरण के नाम पर लगभग चार हजार चौड़ी पत्ती वाले पेड़ों की कटाई शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि यही हरियाली इस मार्ग की पहचान है, जहां से गुजरने वाले यात्री और पर्यटक घने पेड़ों की छांव, ठंडी हवा और हिमालय की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेते हैं। कई श्रद्धालु चारधाम यात्रा के दौरान इसी क्षेत्र में विश्राम भी करते हैं।
उन्होंने कहा कि सड़क चौड़ीकरण के लिए वैकल्पिक उपाय अपनाए जा सकते थे। सड़क के दोनों ओर उपलब्ध खाली भूमि का उपयोग कर विस्तार किया जा सकता था और एलिवेटेड रोड का निर्माण कर प्रसिद्ध एलिफेंट कॉरिडोर तथा वन्यजीवों की भी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती थी। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ यातायात की जरूरत भी पूरी हो जाती।
सुरेश भाई ने आरोप लगाया कि हिमालयी राज्य की राजधानी के आसपास मैदानों जैसी प्रदूषित परिस्थितियां पैदा करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उनका कहना है कि हिमालयी क्षेत्रों में पूर्व में किए गए अवैज्ञानिक सड़क निर्माण कार्यों के कारण मिट्टी, जल स्रोतों और जंगलों को भारी नुकसान पहुंचा है, जिसका परिणाम आज भूस्खलन, भूधंसाव और बाढ़ जैसी आपदाओं के रूप में सामने आ रहा है।
उन्होंने कहा कि बार-बार चेतावनी देने के बावजूद संबंधित एजेंसियां पर्यावरणीय दृष्टि से सुरक्षित निर्माण तकनीकों को अपनाने के बजाय लापरवाही बरत रही हैं। उन्होंने राज्य और केंद्र के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय पर भी पेड़ों के संरक्षण के प्रति उदासीन रहने का आरोप लगाया।
सुरेश भाई ने मांग की कि जनभावनाओं को देखते हुए राज्य और केंद्र सरकार संयुक्त रूप से तत्काल ऋषिकेश-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग पर हरे पेड़ों की कटाई पर रोक लगाए और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए वैकल्पिक निर्माण योजना तैयार करे।



