आंगनबाड़ी राशन की गुणवत्ता पर उठे सवाल, मंत्री रेखा आर्य पर साधा निशाना
भाजपा के जारी सर्वे में कई मंत्री व विधायक ‘फेल’
गर्भवती महिलाओं, किशोरियों और बच्चों की खाद्य सामग्री मानकों पर खरी नहीं
‘टेक होम राशन की जगह डीबीटी लागू हो’, जन संघर्ष मोर्चा ने की व्यवस्था बदलने की मांग
अविकल उत्तराखंड
विकासनगर। चुनावी साल में भाजपा के मंत्रियों व विधायकों की घेराबंदी बढ़ती जा रही है। बीते दिनों मंत्री सुबोध उनियाल और उक्रांद नेत्री प्रमिला रावत की स्थानीय निकाय के मतदान केंद्र पर हॉट टॉक लगातार सोशल मीडिया व राजनीतिक हलकों की सुर्खियां बनी हुई है।
इधऱ, कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य के विभाग की।कमियों को लेकर भी बयानबाजी तेज हो गयी है।
ताजे घटनाक्रम के तहत महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों में वितरित किए जा रहे पोषाहार की गुणवत्ता को लेकर जन संघर्ष मोर्चा ने गंभीर सवाल उठाए हैं।
मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने आरोप लगाया कि गर्भवती महिलाओं, किशोरियों और बच्चों के लिए भेजी जा रही खाद्य सामग्री मानकों के अनुरूप नहीं है, जिससे लाभार्थियों में असंतोष है।
पत्रकारों से बातचीत में नेगी ने कहा कि केंद्रीय भंडार, मसूरी के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों को दलिया, सत्तू, कुक्ड फूड, बाल भोग और हलवा जैसी सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। उनका दावा है कि कई स्थानों पर लाभार्थी इन खाद्य उत्पादों का उपयोग नहीं कर रहे हैं, जिसके कारण केंद्रों में राशन का स्टॉक पड़ा रह जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ खाद्य सामग्री की गुणवत्ता बेहद खराब है और उसकी जांच कराई जानी चाहिए।

नेगी ने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि लाभार्थियों तक केवल गुणवत्तापूर्ण और ताजा खाद्य सामग्री ही पहुंचे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विभाग द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को उपलब्ध कराए जा रहे वस्त्रों की गुणवत्ता को लेकर भी लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं।
मोर्चा अध्यक्ष ने सुझाव दिया कि टेक होम राशन योजना की समीक्षा कर लाभार्थियों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से राशि उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे अपनी आवश्यकता और पसंद के अनुसार खाद्य सामग्री खरीद सके। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और गुणवत्ता संबंधी विवाद भी समाप्त होंगे।
उन्होंने सरकार से पूरे मामले की जांच कराने तथा आपूर्ति व्यवस्था में सुधार करने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि लाभार्थियों के हितों की अनदेखी जारी रही तो मोर्चा आंदोलन का रास्ता अपनाने पर विचार करेगा।
पत्रकार वार्ता में दिलबाग सिंह और पछवादून अध्यक्ष अमित जैन भी मौजूद रहे।
गौरतलब है कि चुनाव के मद्देनजर भाजपा के लगातार हो रहे सर्वे में कई मंत्री व विधायक हार के कगार पर खड़े है। सर्वे में जनता की नाराजगी भी खुलकर सामने दिख रही है।
कई मंत्रियों और विधायकों के खिलाफ सोशल मीडिया में जनता का भड़क रहा गुस्सा साफ झलक रहा है। भाजपा जनप्रतिनिधियों की बेहद कमजोर परफार्मेन्स की वजह से दस साल से उत्तराखण्ड की सत्ता में काबिज भाजपा के लिए जीत की हैट्रिक लगाना टेढ़ी खीर माना जा रहा है। धामी सरकार के लिए कई मंत्रियों व विधायकों की विफलताएं भाजपा हाईकमान के लिए चिंता का सबब बनी हुई है।



