हिंदी दिवस पर हिमवंत कवि बर्त्वाल को याद किया

देहरादून। हिमवंत कवि चंद्रकुंवर बर्त्वाल की 79वीं पुण्यतिथि और हिंदी दिवस के अवसर पर चौपाल कार्यालय में साहित्यकारों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।


इस दौरान बर्त्वाल के हिंदी साहित्य में योगदान पर चर्चा के साथ उनकी कविताओं का पाठ किया गया। डॉ. पुष्पा खंडूड़ी की पुस्तक छायावादी कवि सुमित्रानंदन पंत एवं हिमवंत कवि चंद्रकुंवर बर्त्वाल का काव्य एवं तुलनात्मक अनुशीलन पर भी वक्ताओं ने विचार रखे।


मुख्य अतिथि साहित्यकार राजेश सकलानी ने बर्त्वाल की काव्य यात्रा और उनकी रचनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके साहित्य पर अभी व्यापक शोध की जरूरत है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के अन्य साहित्यकारों और इतिहासकारों के योगदान को भी शोध के केंद्र में लाया जाना चाहिए। सूर्य प्रकाश त्रिपाठी ‘निराला’, सुमित्रानंदन पंत, शिवप्रसाद डबराल, गोविंद चातक, कमल अलंकार और शिवानंद नौटियाल के साहित्य पर भी शोध को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।


सुरेंद्र कुमार ने कहा कि बर्त्वाल ने अल्पायु में ही हिंदी साहित्य को असंख्य कविताओं का समृद्ध भंडार दिया। विवेकानंद खंडूरी, समर भंडारी, डॉ. रानू बिष्ट और लोकेन्द्र कैंतूरा ने बर्त्वाल के काव्य पर विचार व्यक्त किए और उनकी कविताओं का पाठ किया।


कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के अध्यक्ष मनोहर सिंह रावत ने की और संचालन उपाध्यक्ष मोहन सिंह नेगी ने किया। इस अवसर पर सुरेंद्र सिंह सजवाण, जगदीश कुकरेती, सोहन सिंह रजवार, ललित बिष्ट, संजय कोठियाल, सतीश धौलाखंडी, विनोद खंडूरी और नरेंद्र बिष्ट सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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