…और आरटीओ कर्मी को भारी पड़ गई रसमलाई
आरटीओ कर्मी पर व्यापारी ने लगाया रिश्वत का आरोप
देखें वीडियो
तो रिश्वत से जुड़े पुराने वीडियो से निकलेगी भ्र्ष्टाचार की बेल ?
अविकल थपलियाल
देहरादून। हालांकि, यह मामला प्रत्यक्ष रिश्वत पकड़ने का तो नहीं है। लेकिन रिश्वत.. रिश्वत का शोर खूब हुआ। खूब वीडियो वॉयरल हुए। और शोर बहुत दूर तक चला गया। विभागीय मंत्री को कहना पड़ गया कि जांच में दोषी पाए गए कर्मी को दंडित किया जाएगा। मामले से जुड़ी तहरीर पुलिस चौकी में भी दे दी गयी है।
निलंबन
तहरीर के बाद हुई जांच में आरोपी आरटीओ कर्मी के विभागीय निलंबन की खबर भी सामने आई है। लेकिन पुराने वीडियो फुटेज की जांच में और भी कई तथ्य सामने आ सकते हैं।
अपर परिवहन आयुक्त सनत कुमार ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपी कर्मचारी शशिकांत टेंग्वाल, जो परिवहन उपनिरीक्षक के पद पर तैनात था, को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। विभाग ने आरोपी के वाहन चेकिंग से जुड़े अधिकार भी सीज कर दिए हैं। मामले में विभागीय जांच शुरू कर दी गई है और पूरे प्रकरण की पड़ताल की जा रही है।
पढ़िए पूरा मामला
सुर्खियों में चल रहा यह हैरतअंगेज किस्सा देहरादून के मियांवाला क्षेत्र का है। इस इलाके में गजराम सिंह चौहान का कार्यालय है। हो हल्ला मचा कि ट्रांसपोर्टर गजराम ने अपने कार्यालय में एक दो स्टार वर्दीधारी आरटीओ कर्मी को बंद कर दिया। और मीडिया समेत पुलिस को भो 112 नंबर पर इत्तला दे दी। मौके पर भीड़ जमा हो गयी। और नये खेला पर मौज लेती रही।
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आरटीओ कर्मी एक घण्टे से अधिक समय तक अंदर बन्द रहा। मीडिया कर्मियों के आने के बाद ही सिंह एंटर प्राइजेज का शटर ऊपर उठाया गया। अंदर का नजारा बेहद दिलचस्प था। आरटीओ कर्मी हेलमेट समेत बैठा हुआ था। और गजराज सिंह चौहान खुलेआम आरोप लगा रहे थे कि ये कर्मी हर महीने दुकान पर आता है। और 8 हजार रुपए महीना ले जाता है।
आज भी यह पैसे लेने आया था। और हमने इसे अंदर ही बन्द कर दिया। उधर, आईटीओ कर्मी ने कहा कि गजराम ने उन्हें रस मलाई खिलाने के लिए बुलाया था। वो यहां आते रहते हैं। कभी लस्सी तो कभी और कुछ..कर्मी ने यह भी कहा कि वो सु सु करने आये थे इधऱ।
जबकि गजराम ने मेज पर रखे नोटों का लिफाफा भी दिखाया।

गजराम ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व में ली गयी रिश्वर के वीडियो फुटेज उनके पास है। जबकि विश्वास से लबरेज नजर आ रहे आरटीओ कर्मी ने चुनौती देते हुते रिश्वत लेने से जुड़े फुटेज दिखाने को कहा। इस बीच समूचे झगड़े की वीडियो बनती रही।
आरटीओ कर्मी अपने उच्चाधिकारियों से भी मोबाइल पर पूरी स्टोरी बताता रहा। और ऊपर से निर्देश भी लेता रहा।
दो तीन घण्टे तक चले ड्रामे के बाद आरटीओ कर्मी मोटरसाइकिल पर किक मार कर चलता बना। इस दौरान वह मौजूद पत्रकारों को भी हेलो हाय कर गया।
लेकिन आरटीओ कर्मी का गजराम की दुकान पर पहुंचना कई सवाल भी खड़े कर गया।

आरटीओ प्रवर्तन दल में मौजूद कर्मी का कहना था कि वो अक्सर इनकी दुकान में आते रहते हैं। रिश्वत लेने जैसी कोई बात ही नहीं है। जबकि संत कबीर स्कूल के पास निर्माण सामग्री कारोबारी गजराम सिंह ने आरोप लगाया कि एक आरटीओ कर्मी उनके कार्यालय में रिश्वत लेने ही पहुंचा था। और इसीलिए उन्होंने शटर बन्द कर दुकान में कैद कर दिया।
व्यापारी गजराम सिंह ने कहा कि वह अपने कारोबार में पारदर्शिता रखते हैं और अपने प्लॉट में बिकने वाली हर सामग्री के दाम सार्वजनिक रूप से लिखते हैं। उनका आरोप है कि इसी ईमानदारी के बावजूद उनसे अवैध रूप से पैसे मांगे जा रहे थे।
उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आम आदमी अब खुलकर सामने आ रहा है और गलत मांगों का विरोध कर रहा है। उधर, आरटीओ कर्मी ने कहा कि वे भी शिकायत करेंगे और गजराम को सरकार को जवाब देना होगा।

इस मसले की गूंज परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा तक भी पहुंची। बत्रा ने जांच का भरोसा दिया है। इसके अलावा आरटीओ के अन्य अधिकारी वॉयरल वीडियो के ‘प्रभाव’ को कम करने की कोशिश में कुछ पत्रकारों से गुहार करते नजर आए। मामले की लीपापोती भी शुरू हो गयी है।
इस मामले का गौरतलब पहलू यह रहा कि गजराम सिंह चौहान ने आरटीओ कर्मी को ‘कैद’ करने की पूरी सुनियोजित रणनीति बनाई हुई थी। यही नहीं एक बैनर भी टांग दिया था । बैनर में आरटीओ विभाग की कार्यप्रणाली पर व्यंग्यात्मक पंक्तियां चस्पा की गई थी। यह बैनर भी आने जाने वालों के लिए जबरदस्त आकर्षण का केंद्र बना रहा। मौजूद भीड़ बैनर के भाव को समझते हुए अपनी भड़ास भी निकाल रही थी ।

जांच पर टिकी निगाहें
फिलहाल, गजराम सिंह चौहान ने हर्रावाला पुलिस चौकी में आरटीओ कर्मी पर रिश्वत मांगने का आरोप चस्पा करते हुए एक तहरीर दी है। लेकिन नाम किसी का नहीं लिखा। चूंकि, गजराम ने यह दावा किया है कि उनके पास पूर्व में ली गयी रिश्वत के वीडियो फुटेज हैं। लिहाजा, बुजुर्ग गजराम के कथन की सच्चाई भी सामने आना जरूरी है।
इस बीच, यह बात भी उभर कर सामने आ रही गया कि गजराम को सीधे विजिलेंस में शिकायत करनी चाहिए थी। ऐसा होने और विजिलेंस मौके पर दबोच सकती थी। लेकिन 11 मई के प्रकरण से यह साबित नहीं हो रहा कि मौजूद आरटीओ कर्मी ने सीधे तौर पर रिश्वत ली है। अलबत्ता, गजराम ने आरोपी की ओर से पर्चियां देने की बात कही है। शायद इन पर्चियों में रकम लिखी गई हो।
बहरहाल, तहरीर में गजराम का लिखा मोबाइल नंबर सिर्फ नौ नंबर का ही हैं। इसलिए गजराम का पक्ष पता नहीं लग सका। तहरीर के आधार पर पुलिस कब मुकदमा दर्ज करती है ,यह देखना भी दिलचस्प होगा।
11 मई को हुए इस सनसनीखेज बंधक प्रकरण की जांच में कई रहस्यों का पर्दाफाश हो सकता है। अब पूरी जांच पुराने वीडियो फुटेज पर टिकी हुई है।

