कुख्यात वाल्मीकि गैंग का करीबी सिपाही शेर सिंह हो चुका है गिरफ्तार
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आपराधिक इतिहास वाला सिपाही शेर सिंह चल रहा था निलंबित
अविकल थपलियाल
नई दिल्ली/ देहरादून। बीते साल कुख्यात प्रवीण वाल्मीकि गैंग व मनीष बॉलर से सम्बंध रखने के आरोप में गिरफ्तार हुए सिपाही शेर सिंह का जंतर मंतर पर ‘इस्तीफे’ के नाटक का तुरंत ही पर्दाफाश हो गया।
सिपाही शेर सिंह का जंतर मंतर पर CJP के मंच पर इस्तीफा देने सम्बन्धी वीडियो वॉयरल होते ही उत्तराखण्ड पुलिस ने उसकी पूरी कुंडली निकाल ली।
आईजी कुमाऊं निवेदिता कुकरेती ने प्रेस को जारी वीडियो बयान में बताया कि सियाही शेर सिंह का आपराधिक इतिहास रहा है। और उसे 20 जुलाई 2026 को निलंबित किया गया था।
बीते साल 16 सितंबर को शेर सिंह व एक अन्य सिपाही हसन जैदी को प्रवीण वाल्मीकि गैंग से एसटीएफ ने गिरफ्तार किया था।
पुलिस ने सिपाही शेर सिंह को जेल भेज दिया था। आईजी निवेदिता कुकरेती ने सिपाही शेर सिंह से जुड़े पुराने आपराधिक मामले भी गिनाए।
उल्लेखनीय है कि शेर सिंह सितंबर 2025 से एक गंभीर आपराधिक प्रकरण में नामजद होने के बाद उत्तराखंड पुलिस से निलंबित चल रहा है। उसके विरुद्ध थाना गंगनहर, जनपद हरिद्वार में मु०अ०सं० 415/2025 के अंतर्गत भारतीय दंड संहिता की धाराओं 420, 467, 468, 471, 120-बी तथा भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 111(2)(बी), 351(2) एवं 352 के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया था।
आपराधिक सांठगांठ के आरोप में हुआ था गिरफ्तार
करोड़ों की संपत्ति हड़पने की साजिश में शामिल होने का आरोप
एसटीएफ ने किया था खुलासा
सितंबर 2025 में उत्तराखण्ड एसटीएफ ने कुख्यात प्रवीण वाल्मीकि गैंग और उसके सदस्यों के साथ मिलकर करोड़ों रुपये की संपत्ति को फर्जी दस्तावेजों के जरिए हड़पने के मामले में दो पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया था।
गिरफ्तार पुलिसकर्मी हसन जैदी और शेर सिंह पर आरोप था कि उन्होंने गैंग के सदस्यों के साथ मिलकर संपत्ति के अवैध सौदे कराए और आपराधिक षड्यंत्र में सक्रिय भूमिका निभाई। दोनों पुलिसकर्मियों का हाल ही में आईजी देहरादून रेंज कार्यालय से कुमाऊं मंडल में तबादला किया गया था।

एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत भुल्लर ने प्रेस कांफ्रेन्स कर बताया था कि जांच में दोनों पुलिसकर्मियों के तार प्रवीण वाल्मीकि के भतीजे मनीष बॉलर से जुड़े पाए गए हैं। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने रुड़की में स्थित एक बेशकीमती जमीन का सौदा कराने में भूमिका निभाई और उसका एग्रीमेंट अपनी एक परिचित महिला के नाम कराया।
मामले की पृष्ठभूमि वर्ष 2014 से जुड़ी है। रुड़की के ग्राम सुनेहरा निवासी श्याम बिहारी की मृत्यु के बाद उनकी करोड़ों रुपये की संपत्ति की देखरेख उनके छोटे भाई कृष्ण गोपाल कर रहे थे। वर्ष 2018 में इस संपत्ति पर कब्जा करने की नीयत से कृष्ण गोपाल की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इसके बाद संपत्ति की देखभाल श्याम बिहारी की पत्नी रेखा करने लगीं।
एसटीएफ के अनुसार, प्रवीण वाल्मीकि ने रेखा पर संपत्ति अपने नाम कराने का दबाव बनाया। विरोध करने पर वर्ष 2019 में रेखा के भाई सुभाष पर मनीष बॉलर और उसके साथियों से गोली चलवाई गई, जिसके संबंध में हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज किया गया था। इन घटनाओं के बाद पीड़ित परिवार भय के कारण रुड़की छोड़कर अज्ञात स्थान पर रहने लगा।

परिवार के पलायन के बाद आरोपियों ने रेखा और स्नेहलता के नाम से फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार कर करोड़ों रुपये की संपत्ति को बेच दिया। इस पूरे खेल में मनीष बॉलर के सहयोगी पंकज इष्टवाल की भी भूमिका सामने आई है, जिसने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर संपत्ति का सौदा किया।
एसटीएफ का कहना है कि प्रवीण वाल्मीकि गैंग के भय और दबदबे के कारण पीड़ित परिवार लंबे समय तक शिकायत दर्ज कराने की हिम्मत नहीं जुटा पाया।
इसके बाद सिपाही शेर सिंह व हसन जैदी को को 15 सितंबर 2025 को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया था। बाद में उसे 7 नवंबर 2025 को उच्च न्यायालय, नैनीताल से जमानत प्राप्त हुई। अपने तैनाती स्थल पिथौरागढ़ से भी वह बिना सूचना दिए ड्यूटी से गायब था। विभागीय नोटिस का जवाब नहीं देने पर शेरसिंह को 20 जुलाई 2026 को निलंबित कर दिया था।



