पशुपालन नवाचार एवं साझेदारी शिखर सम्मेलन का आयोजन

अविकल उत्तराखंड

देहरादून। पशुपालन विभाग, उत्तराखण्ड एवं सोशल अल्फा के सहयोग सें शनिवार को ‘पशुपालन नवाचार एवं साझेदारी शिखर सम्मेलन-2026″ का आयोजन किया गया।

सम्मेलन में देश के विभिन्न क्षेत्रों में पशुपालन एवं संबद्ध क्षेत्रों में कार्यरत 15 स्टार्टअप्स एवं संस्थाओं ने प्रतिभाग किया तथा अपने नवाचारों एवं तकनीकी समाधानों को प्रस्तुत किया।

सम्मेलन की अध्यक्षता पशुपालन विभाग के अपर सचिव, संतोष बडोनी ने की। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य पशुपालन क्षेत्र की चुनौतियों के समाधान के लिए आधुनिक तकनीकों, नवाचारों तथा विभिन्न संस्थानों के बीच सहयोग एवं साझेदारी को प्रोत्साहित करना रहा।

सम्मेलन में पशु स्वास्थ्य, पशु पोषण, पशुधन उत्पादकता, डिजिटल परामर्श तथा संसाधनों के उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर आधारित नवीन तकनीकों एवं समाधानों का प्रदर्शन किया गया। प्रतिभागी स्टार्टअप्स एवं संस्थानों ने अपने उत्पादों, सेवाओं तथा तकनीकी नवाचारों के माध्यम से पशुपालन क्षेत्र में सुधार की संभावनाओं को प्रस्तुत किया।

सम्मेलन में प्रतिभाग करने वाले पशुपालकों एवं किसानों ने डेयरी तथा मुर्गीपालन क्षेत्र में आ रही विभिन्न समस्याओं, उत्पादन लागत में निरंतर वृद्धि तथा आय बढ़ाने के लिए नई तकनीकों को अपनाने के संबंध में अपने विचार एवं सुझाव प्रस्तुत किए।

इस दौरान संबंधित स्टार्टअप्स द्वारा विकसित नवीन तकनीकों एवं समाधानों की जानकारी दी गई, जिनमें कम लागत एवं कम स्थान में हरे चारे के उत्पादन हेतु हाइड्रोपोनिक तकनीक (Hydroponic Technique), पशुओं के Waste Product से बायोगैस एवं विभिन्न उपयोगी उत्पादों का निर्माण, अगरबत्ती आदि के उत्पादन तथा पशुओं की प्रजनन क्षमता में सुधार हेतु आधुनिक उपकरणों के माध्यम से कृत्रिम गर्भाधान प्रक्रिया को प्रोत्साहित करने करने संबंधी तकनीकें प्रमुख रहीं। इसके अतिरिक्त, पशुओं में होने वाली विभिन्न बीमारियों की त्वरित पहचान, निदान एवं उपचार के लिए नवीन तकनीकों तथा औषधीय समाधानों का प्रदर्शन किया गया। मुर्गी पालन के क्षेत्र में A। आधरित उपकरण से मात्र मुर्गीयों की आवाज सुनकर रोग का पता लगाने संबंधी उपकरण का भी प्रदर्शन किया गया।

कार्यक्रम के दौरान निदेशक, पशुपालन विभाग, डॉ. उदय शंकर द्वारा सम्मेलन में प्रतिभाग करने वाले सभी स्टार्टअप्स का आभार व्यक्त किया गया। उन्होंने इस प्रकार के नवाचार-आधारित सम्मेलनों को उत्तराखण्ड के अन्य जनपदों में भी आयोजित किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि अधिकाधिक पशुपालक नवीन तकनीकों एवं समाधानों से लाभान्वित हो सकें।

इस अवसर पर डॉ. भूपेन्द्र सिंह जंगपांगी, अपर निदेशक, पशुपालन विभाग द्वारा स्टार्टअप्स के नवाचारों को विभागीय योजनाओं के साथ समन्वित करने का सुझाव दिया गया, जिससे इन तकनीकों का लाभअधिकाधिक पशुपालकों तक पहुंचाया जा सके। डॉ. राकेश नेगी, मुख्य अधिशासी अधिकारी, यू.एल.डी.बी. द्वारा

सुझाव दिया गया कि स्टार्टअप्स द्वारा विकसित उत्पादों एवं तकनीकों को पशुपालकों के व्यावहारिक अनुभवों एवं आवश्यकताओं की कसौटी पर परखने के उपरांत ही व्यापक स्तर पर उपयोग में लाया जाना चाहिए।

कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. प्रलयंकर नाथ द्वारा अवगत कराया गया कि पशुपालकों एवं स्टार्टअप्स के मध्य समन्वय स्थापित करने तथा नवीन तकनीकों के विकास एवं उनके व्यवहारिक उपयोग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से उत्तराखण्ड राज्य पशुचिकित्सा परिषद परिसर में इन्क्यूबेशन सेंटर (Incubation Center) की स्थापना की गई है।

मुख्य कार्यक्रम में सोशल अल्फा की ओर से ओमकार पांडे निदेशक, आकाश पीपलानी, चौधरी अभिजीत एवं राहुल दीप सहित पशुपालन विभाग के अन्य अधिकारी डॉ. गोकरण सिंह खड़ायत अधिशासी अधिकारी, शीप बोर्ड, डा० नारायण सिंह नेगी, डा० अशोक बिष्ट, डा० अशोक कुमार डा० कैलाश उनियाल अध्यक्ष उ०रा०प०चि० परिषद, डा० अमित अरोडा, डा० दुर्गा मोल्फा डा० उदय शंकर गुप्ता- उप रजिस्ट्रार तथा लगभग 56 पशुपालक / किसान भी उपस्थित रहें।

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