कथित वीआईपी और सीबीआई जांच पर सवाल
अविकल उत्तराखंड
देहरादून/ऋषिकेश/हल्द्वानी। अंकिता भंडारी हत्याकांड की चौथी बरसी पर शुक्रवार को उत्तराखंड में विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और जनवादी संगठनों ने श्रद्धांजलि सभाएं, धरना-प्रदर्शन और मार्च आयोजित कर न्याय की मांग दोहराई। देहरादून में गांधी पार्क से घंटाघर तक मानव श्रृंखला बनाई गई, कांग्रेस ने वनंत्रा रिसॉर्ट तक शांतिपूर्ण मार्च निकाला, जबकि पहाड़ स्वाभिमान सेना के आह्वान पर प्रदर्शनकारियों ने सीबीआई कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। हल्द्वानी के बुधपार्क में भी विभिन्न संगठनों ने धरना देकर मामले से जुड़े कथित VIP एंगल और जांच की प्रगति पर सवाल उठाए।
गांधी पार्क में श्रद्धांजलि सभा, उठे कई सवाल
देहरादून के गांधी पार्क में सुबह 11 बजे अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच की ओर से श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। सभा में बड़ी संख्या में लोग और मातृशक्ति शामिल हुई। कार्यक्रम की शुरुआत कमला पंत ने अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े घटनाक्रम और अब तक चले न्याय संघर्ष की जानकारी देकर की।
सभा में वक्ताओं ने कथित VIP एंगल की जांच, वनंत्रा रिसॉर्ट में बुलडोजर चलाए जाने और सीबीआई जांच की प्रगति समेत कई सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों ने पूछा कि मामले में जिन व्यक्तियों के नाम कथित VIP एंगल के संदर्भ में सामने आने की बात कही जाती रही है, उनकी भूमिका की जांच किस स्तर तक हुई। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, स्थानीय विधायक रेणु बिष्ट और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच को लेकर भी सवाल उठाए।

हालांकि, इन सवालों और आरोपों को प्रदर्शनकारियों के दावों के रूप में उठाया गया और किसी व्यक्ति की आपराधिक संलिप्तता को अदालत से सिद्ध तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया।
वक्ताओं ने सीबीआई जांच की प्रगति और अंकिता के माता-पिता की ओर से मुख्यमंत्री को दिए गए पत्र को जांच के आधार के रूप में लिए जाने से जुड़े सवाल भी उठाए। उनका कहना था कि मामले के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर तथ्यात्मक स्थिति सार्वजनिक की जानी चाहिए।
न्याय संकल्प के बाद मानव श्रृंखला
सभा में सुजाता पॉल ने न्याय संकल्प पढ़वाया। उपस्थित लोगों ने लोकतांत्रिक, संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीके से न्याय की मांग जारी रखने का संकल्प लिया। इसके बाद विमला कोहली ने दो मिनट का मौन रखवाकर अंकिता भंडारी को श्रद्धांजलि दिलाई।
कार्यक्रम का संचालन निर्मला बिष्ट ने किया। बाद में गांधी पार्क से घंटाघर तक और फिर गांधी पार्क तक मानव श्रृंखला बनाई गई। इसमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया।
सीबीआई कार्यालय के बाहर भी प्रदर्शन
देहरादून में पहाड़ स्वाभिमान सेना के आह्वान पर प्रदर्शनकारियों ने सीबीआई कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान अंकिता को श्रद्धांजलि देते हुए कहा गया कि तीन मुख्य आरोपियों को अदालत से सजा मिलना न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन मामले से जुड़े अन्य सवालों का तथ्यात्मक जवाब भी सामने आना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने कथित VIP एंगल की जांच की प्रगति, संबंधित व्यक्ति की पहचान और संभावित भूमिका को लेकर सीबीआई से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। पहाड़ स्वाभिमान सेना के अध्यक्ष पंकज उनियाल ने कहा कि चार वर्ष बाद भी जनता के कई सवालों का जवाब सामने आना बाकी है।
अधिवक्ता संदीप चमोली ने कहा कि यदि जांच में किसी व्यक्ति की आपराधिक भूमिका के प्रमाण मिलते हैं तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए और यदि प्रमाण नहीं मिलते तो जांच एजेंसी को तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यूकेडी नेता लूशुन टोडरिया ने भी निष्पक्ष, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच की मांग की।
हल्द्वानी में महिला हिंसा और न्याय का मुद्दा उठा
हल्द्वानी के बुधपार्क में विभिन्न जनवादी संगठनों की ओर से धरना-प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत अंकिता भंडारी को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि देने से हुई। वक्ताओं ने अंकिता हत्याकांड की जांच के साथ प्रदेश में महिला हिंसा और जातीय हिंसा पर रोक लगाने की मांग भी उठाई।
प्रदर्शनकारियों ने कथित VIP एंगल, वनंत्रा रिसॉर्ट में बुलडोजर चलाए जाने और सीबीआई जांच की प्रगति को लेकर सवाल किए। उन्होंने कहा कि मामले से जुड़े आरोपों और दावों की तथ्यात्मक जांच होनी चाहिए तथा जांच एजेंसी को उपलब्ध तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
धरने में अंकिता मामले की पैरवी कर रहे अधिवक्ता नवनीश नेगी को कथित धमकी दिए जाने का मुद्दा भी उठाया गया। प्रदर्शनकारियों ने धमकी देने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए प्रस्ताव पारित किया।
चार साल बाद भी सवालों के जवाब की मांग
अंकिता भंडारी हत्याकांड की चौथी बरसी पर आयोजित कार्यक्रमों में एक बात साझा रूप से सामने आई—तीन मुख्य आरोपियों को अदालत से सजा मिलने के बावजूद प्रदर्शनकारी मामले से जुड़े अन्य सवालों के तथ्यात्मक जवाब चाहते हैं। विभिन्न संगठनों ने कहा कि किसी व्यक्ति को बिना प्रमाण दोषी ठहराना उनका उद्देश्य नहीं है, बल्कि जांच की प्रगति और मामले के प्रत्येक महत्वपूर्ण पहलू पर पारदर्शी जानकारी सामने आनी चाहिए।
सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने घोषणा की कि वे अंकिता के परिवार की न्याय की मांग तथा मामले से जुड़े सवालों को लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से आगे उठाते रहेंगे।



