खरगे बोले, वे गिड़गिड़ाते नहीं है,लड़ने की ताकत रखते हैं
जेपी नड्डा बोले- जांच कराएंगे,राजनीति गरमाई
आठ अगस्त की रैली के बाद मंच को किया गया था ‘शुद्ध’
उत्तराखंड में कांग्रेस ने चढ़ाई बाहें
अविकल उत्तराखण्ड
नई दिल्ली/हल्द्वानी। उत्तराखंड में दलित अपमान की घटना पर सड़क से लेकर संसद तक हंगामा खड़ा हो गया। कांग्रेस आक्रामक मुद्रा में है और सत्तारूढ़ भाजपा डिफेंसिव मोड़ में।
बीते आठ अगस्त को हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद रामलीला मैदान में हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ का मामला संसद तक पहुंच गया।
उधर, उत्तराखण्ड कांग्रेस ने पुतला दहन कर भाजपा के खिलाफ प्रदर्शन किया। चुनावी साल में इस संवेदनशील मुद्दे पर प्रदेश और देश का राजनीतिक तापमान गर्म हो गया है।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता खरगे ने इस घटना पर आपत्ति जताते हुए इसे दलित समाज और लोकतांत्रिक मूल्यों का अपमान बताया। केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा ने घटना को दुखद बताते हुए कहा कि भाजपा ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती। उन्होंने मामले की जांच कराने का भरोसा दिया।
खरगे ने राज्यसभा में कहा कि उन्होंने आठ अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में जनसभा को संबोधित किया था। उनके मुताबिक, भाषण के दौरान उन्होंने किसी धर्म या समुदाय का नाम नहीं लिया, बल्कि सरकार से जुड़े मुद्दे उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके कार्यक्रम के बाद वहां मंच का ‘शुद्धिकरण’ करने के लिए हवन कराया गया।
खरगे ने कहा कि वह इस घटना को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाना चाहते, लेकिन सवाल यह है कि क्या लोकतंत्र में किसी नेता के साथ इस तरह का व्यवहार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वह अनुसूचित जाति से आते हैं । उन्होंने कहा कि वे किसी से नहीं कहते कि मैं दलित हूँ,मेरी मदद करो। मैं किसी के आगे गिड़गिड़ाता नहीं। मुझमें लड़ने की शक्ति है। और में लड़ता हूँ। इस मुद्दे पर सदन में काफी आक्रोश भी जताया गया।

नड्डा ने खरगे की बात का जवाब देते हुए कहा कि जो कुछ हुआ वह बेहद दुखद है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती। नड्डा ने कहा कि मामले की निश्चित रूप से जांच कराई जाएगी और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने खरगे की भावनाएं आहत होने पर खेद भी जताया।
क्या है मामला
खरगे ने आठ अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस की ‘विजय शंखनाद रैली’ को संबोधित किया था। इसके बाद 10 अगस्त को कुछ हिंदू संगठनों की ओर से मैदान में हवन और गंगाजल का छिड़काव कर ‘शुद्धिकरण’ किए जाने की खबर सामने आई। आयोजकों की ओर से दावा किया गया कि रैली के दौरान धार्मिक नारे लगाए गए थे और इसी के विरोध में यह आयोजन किया गया। कांग्रेस ने इस संबंध में सामने आए कुछ वीडियो को कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार बताते हुए सवाल उठाए हैं।
घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेताओं ने इसे सामाजिक समानता और संविधान की भावना के खिलाफ बताया है, जबकि भाजपा की ओर से मामले की जांच का भरोसा दिया गया है।
खरगे की सभा के बाद मंच के ‘शुद्धिकरण’ पर भड़के यशपाल आर्य
हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के संबोधन के बाद उसी मंच के कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने इसे शर्मनाक और निंदनीय बताते हुए कहा कि यह केवल खरगे का नहीं, बल्कि गरीबों, दलितों, वंचितों और पीड़ित वर्गों का अपमान है।
आर्य ने कहा कि उत्तराखंड सामाजिक समरसता और भाईचारे की भूमि रहा है। सार्वजनिक स्थान की पवित्रता किसी व्यक्ति की जाति या वर्ग से तय नहीं होती। उन्होंने कहा कि ऐसे कृत्य छुआछूत और ऊंच-नीच की मानसिकता को बढ़ावा देते हैं तथा सामाजिक सद्भाव को कमजोर करते हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने भाजपा नेतृत्व से इस मामले पर स्पष्ट रुख रखने की मांग की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक विचारों का मुकाबला विचारों से होना चाहिए, किसी की सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर अपमान से नहीं।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, सूर्यकांत धस्माना व गरिमा दसौनी ने विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी। देहरादून में घटना के विरोध में पुतला दहन किया गया।
चुनावी साल में हल्द्वानी में मंच के शुद्धिकरण को लेकर किये गए कार्य को लेकर राजनीतिक व सामाजिक संगठनों ने खुल कर विरोध करने से भाजपा के सामने नया संकट खड़ा हो गया है।



