सुखरौ नदी की बाढ़ से निंम्बूचौड़ व खूनीबड़ की आबादी खतरे में

नदी की धारा तत्काल चैनलाइज करने की मांग

अविकल उत्तराखंड

कोटद्वार। कोटद्वार स्थित सुखरौ नदी की लगातार बदलती धारा और प्रलयकारी बाढ़ से ग्राम निंम्बूचौड़ एवं खूनीबड़ की कृषि भूमि, ग्रामीण आबादी तथा सिंचाई विभाग की बाढ़ सुरक्षा संरचनाओं पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।
इस संबंध में स्थानीय निवासी उमेश चन्द्र नौटियाल ने जिलाधिकारी, पौड़ी गढ़वाल को विस्तृत ज्ञापन भेजकर तत्काल प्रभाव से नदी की धारा का वैज्ञानिक ढंग से चैनलाइजेशन कराने की मांग की है।

ज्ञापन में कहा गया है कि प्रतिवर्ष सुखरौ एवं ग्वालगढ़ नदी की बाढ़ से निंम्बूचौड़ तथा खूनीबड़ क्षेत्र की उपजाऊ भूमि नदी में समा रही है। नदी की धारा लगातार गांव की ओर खिसकने से सिंचाई विभाग की सुरक्षा दीवार की नींव भी प्रभावित होने लगी है, जिससे भविष्य में बड़े नुकसान की आशंका बढ़ गई है।

नौटियाल ने मांग की है कि सुखरौ नदी पुल के अपस्ट्रीम एवं डाउनस्ट्रीम में पोकलेन मशीनों के माध्यम से नदी की धारा का तत्काल चैनलाइजेशन किया जाए। चैनलाइजेशन से निकलने वाले रिवर बेड मैटेरियल (RBM) का उपयोग नदी किनारे 15–20 फुट तक गहरे हो चुके कटावग्रस्त हिस्सों को भरने में किया जाए, ताकि भविष्य में होने वाले भूमि कटाव को रोका जा सके।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 1960–70 के दशक में सुखरौ नदी का प्रवाह वर्तमान स्थान से भिन्न था तथा नदी के दोनों ओर वन क्षेत्र मौजूद था। समय के साथ अनियंत्रित कटाव के कारण नदी का फैलाव लगभग 400 मीटर तक हो गया है। इस तथ्य का सत्यापन पुराने बंदोबस्ती अभिलेखों से किया जा सकता है।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया है कि चैनलाइजेशन का कार्य निंम्बूचौड़ के खसरा संख्या 134, 134/145 एवं 134/146 की पूर्वी सीमा से कम-से-कम 50 मीटर की दूरी पर किया जाए, ताकि भविष्य में खेतों को पुनः क्षति न पहुंचे। साथ ही नदी के दाहिने किनारे पर आरसीसी बाढ़ सुरक्षा दीवार तथा सीमेंटेड तटबंध का निर्माण कराया जाए, जिससे ग्रामीण आबादी, कृषि भूमि एवं सरकारी परिसंपत्तियों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

नौटियाल ने कहा कि इस विषय पर पूर्व में भी प्रशासन को कई बार अवगत कराया गया था, लेकिन प्रभावी कार्रवाई न होने के कारण इस वर्ष भी अनेक बीघा कृषि भूमि नदी में समा गई। उन्होंने जिला प्रशासन से आगामी मानसून को देखते हुए इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए तत्काल स्थलीय निरीक्षण एवं आपात कार्रवाई करने की मांग की है।

ज्ञापन की प्रतिलिपि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, सचिव (वन), सचिव (आपदा प्रबंधन), प्रमुख अभियंता सिंचाई, प्रभागीय वनाधिकारी लैंसडाउन तथा उपजिलाधिकारी कोटद्वार सहित संबंधित अधिकारियों को भी प्रेषित की गई है।

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