हजम नहीं हुई विधायक उमेश के इस्तीफे की कहानी ,उपजे सवाल

चैंपियन ने कहा, इस्तीफा एक नौटंकी

भाजपा से सवाल करें उमेश कुमार -कांग्रेस

स्पीकर नहीं ले पाई उमेश पर कोई फैसला

अविकल थपलियाल

भराड़ीसैंण। बीते चार साल से दल बदल कानून के उल्लंघन से विधायकी पर मंडरा रहे खतरे को ‘टालने’ में कामयाब रहे निर्दलीय विधायक उमेश कुमार के ताजातरीन इस्तीफे की कहानी कुछ हजम नहीं हो रही।
बलात्कार समेत कई गम्भीर मुकदमो के आरोपी रहे उमेश कुमार ने विधानसभा चुनाव से मात्र चार महीने पहले किसानों का मुद्दा उठाते हुए इस्तीफे की घोषणा की। और इस मुद्दे पर साथ न देने का आरोप लगाते हुए मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को भी लपेटने की असफल कोशिश की।
उमेश कुमार के इस्तीफे को कांग्रेस व पूर्व विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन ने नौटंकी के अलावा चुनावी शिगूफा करार दिया।

हालांकि, उमेश कुमार ने किसानों की समस्याओं को आगे रखकर इस्तीफा दिया। लेकिन इस फैसले के पीछे कुछ अन्य कहानियां भी पर्दे के पीछे सुनाई दे रही है।

अमरोहा फार्म हाउस गैंग रेप

कुछ महीने पहले उमेश के अमरोहा स्थित फार्म हाउस में गैंगरेप की घटना ने सभी को चौंका दिया था। चौंकाया,इसलिए भी कि इस गैंग रेप में पुलिसकर्मी और एक सुरक्षा बल के लोग लिप्त पाए गए थे। यूपी की योगी सरकार की पुलिस ने तत्काल दोषी बलात्कारियों को जेल में डालकर तत्काल कार्रवाई कर फार्म हाउस की भी जांच शुरू करवाई।इस मुद्दे पर पूर्व सीएम हरीश रावत,चैंपियन समेत अन्य नेताओं ने उमेश कुमार के करोड़ों के फार्म हाउस की खरीद व अय्याशी पर गहरे सवाल उठाए थे।

वनन्तरा रिसॉर्ट ढहाना और उमेश की फेसबुक।पोस्ट

खानपुर से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने अंकिता भंडारी केस में वनन्तरा रिसॉर्ट पर बुलडोजर चलवाने में अहम भूमिका निभाई थी। बीते साल पूर्व सीएम हरीश रावत ने 2022 में फेसबुक में उमेश कुमार की ओर से डाली गई पोस्ट को भी सार्वजनिक कर जांच की मांग की थी। इस फेसबुक पोस्ट में उमेश कुमार ने प्रदेश की भाजपा सरकार का आभार जताया था। उमेश कुमार ने लिखा था कि वनन्तरा रिसॉर्ट पर कार्रवाई के बाबत मेरी मांग का संज्ञान लेने पर आभार।

गौरतलब है कि अंकिता मर्डर के बाद रातों रात वनन्तरा रिसॉर्ट में बुलडोजर चलवाने में यमकेश्वर की विधायक रेणु बिष्ट, आरती गौड़ और उमेश कुमार के नाम सुर्खियों में रहे थे। उमेश कुमार ने फेसबुक लाइव के जरिये भी वनन्तरा रिसॉर्ट पर बुलडोजर चलवाने की मुहिम चलवाई थी।
मौजूदा समय में सुरेश राठौर और उर्मिला सनावर की वीआईपी सम्बन्धी वार्ता से उपजे हालात के बाद सीबीआई जांच की प्रक्रिया में तेजी आई है। और कुछ नए तथ्य सीबीआई के हाथ लगे हैं। यह भी चर्चा है कि जेल जाने से पूर्व उर्मिला सनावर भी सीबीआई को कुछ खास तथ्य दे चुकी है। लिहाजा, जांच के दायरे में कुछ छूटे नामों से भी सीबीआई जानकारी एकत्रित कर सकती है।

दल बदल कानून का उल्लंघन

उमेश कुमार के इस्तीफे की घोषणा से चार साल पुराना दल बदल कानून के उल्लंघन का मामला एक बार फिर से सुर्खियों में आ गया है। मई 2022 में हरिद्वार जिले के रविन्द्र पनियाला व अन्य ने उमेश कुमार के खिलाफ विधानसभा में दल बदल कानून के उल्लंघन की याचिका दाखिल कर विधायकी को चुनौती दी थी।

चुनाव जीतने के बाद निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने एक नई पार्टी का गठन किया था। यह समाचार मीडिया की सुर्खियां भी बना था।
चार साल बीतने के बाद भी स्पीकर ऋतु खंडूड़ी ने उमेश कुमार की सदस्यता पर कोई फैसला नहीं लिया। जबकि दल बदल कानून के उल्लंघन पर 2016 में तत्कालीन स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल ने कांग्रेस के नौ बागी विधायकों की सदस्यता को अयोग्य करार दिया था।
इसके अलावा दल बदलने पर विधायक प्रीतम सिंह पंवार, राजेन्द्र भंडारी , राजकुमार की विधायकी भी चली गयी थी। लेकिन स्पीकर की चुप्पी नहीं टूटी।

स्पीकर ने नहीं लिया सदस्यता पर कोई फैसला

यहां यह भी साफ कर दें कि स्पीकर बनने के बाद ऋतु खंडूड़ी ने विधानसभा भर्ती घोटाले की जांच करते हुए 200 से अधिक तदर्थ कर्मियों को नौकरी से हटा दिया गया था। लेकिन चार साल तक उमेश कुमार से जुड़ी फ़ाइल पर कोई फैसला नहीं लिया।
बहरहाल, चुनाव से ठीक पूर्व उमेश कुमार ने कांग्रेस पर आरोप लगाकर इस्तीफे की घोषणा कर कई सवालों को जन्म दे दिया है। उमेश कुमार ने यह भी कहा कि कांग्रेस उनके मुद्दों के साथ खड़ी नहीं होती। जबकि,कांग्रेस का कहना है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में उमेश कुमार कभी भी कांग्रेस के साथ खड़े नहीं दिखाई दिए।

उमेश कुमार के इस्तीफे की घोषणा से खानपुर विधानसभा में राजनीतिक हलचल तेज हो गयी है। कुंवर प्रणव चैंपियन ने इसे नौटंकी करार दिया है। और कहा कि इस इस्तीफे की सच्चाई जनता खूब समझती है।

भाजपा से सवाल करें उमेश-कांग्रेस

प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष राजीव महर्षि व प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने निर्दलीय विधायक उमेश द्वारा कांग्रेस पर गन्ना किसानों के मामले में साथ न देने के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यदि किसी सरकार ने किसानों की सुध लेने की कोशिश की तो वह केवल कांग्रेस की ही सरकार थी।

राजीव महर्षि ने कहा कि निर्दलीय विधायक उमेश को यह सवाल सत्ताधारी दल से करना चाहिए कि उसने अपने 10 वर्ष के कार्यकाल में किसानों के लिए क्या किया। उनका वक्तव्य उनकी मानसिकता को भी दर्शाता है तथा उनके द्वारा कांग्रेस से सवाल करने से साफ जाहिर होता है कि वे सत्ताधारी दल के इशारों पर नाच रहे हैं।

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