सड़क हादसों के पीड़ितों को ₹1.5 लाख तक कैशलेस उपचार
810 शिक्षकों के प्रशिक्षण का लक्ष्य
सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर
20 हजार विद्यार्थियों तक पहुंचेगा संदेश
अविकल उत्तराखण्ड
दिनेशपुर। सड़क दुर्घटनाओं में घायलों की जान बचाने के लिए समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है। दुर्घटना के बाद के शुरुआती महत्वपूर्ण समय यानी गोल्डन आवर में घायल की मदद करने वाले लोगों को नेक नागरिक (गुड सेमेरिटन) के रूप में सम्मानित करने की व्यवस्था है। वहीं, केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री सड़क दुर्घटना पीड़ित अस्पताल में भर्ती एवं सुनिश्चित उपचार योजना (पीएम-राहत) के तहत पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ितों को निर्धारित शर्तों के अनुसार अधिकतम सात दिनों तक ₹1.5 लाख तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली जनहानि को कम करने और आमजन को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से एससीईआरटी के सड़क सुरक्षा प्रकोष्ठ की ओर से दिनेशपुर स्थित अजीम प्रेमजी फाउंडेशन में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला का समापन हुआ। इसमें विभिन्न जनपदों के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) से आए मास्टर ट्रेनर्स ने प्रतिभाग किया। कार्यशाला में सड़क सुरक्षा नियमों, गोल्डन आवर, प्राथमिक सहायता और नेक नागरिक की भूमिका के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया।

810 शिक्षकों के प्रशिक्षण का लक्ष्य
एससीईआरटी के राज्य समन्वयक विनय थपलियाल ने बताया कि प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स अपने-अपने जनपदों में शिक्षकों को प्रशिक्षण देंगे। अभियान के तहत लगभग 810 शिक्षकों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। ये शिक्षक अपने विद्यालयों में करीब 20 हजार विद्यार्थियों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करेंगे।
विद्यार्थियों को यातायात संकेतकों, हेलमेट और सीट बेल्ट के महत्व, सुरक्षित सड़क व्यवहार तथा दुर्घटना के समय बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि बच्चों को कम उम्र से ही सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करना जरूरी है। विद्यालयों में गतिविधि आधारित शिक्षण के माध्यम से बच्चे स्वयं यातायात नियमों का पालन करने के साथ अपने परिवार और समाज को भी जागरूक कर सकेंगे।
गोल्डन आवर में उपचार मिलने से बच सकती है जान
कार्यशाला में बताया गया कि सड़क दुर्घटना के बाद का शुरुआती समय गोल्डन आवर कहलाता है। इस दौरान घायल को शीघ्र चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना उसकी जान बचाने में महत्वपूर्ण हो सकता है। दुर्घटना होने पर लोगों को घबराने के बजाय एंबुलेंस और आपातकालीन सेवाओं को सूचना देनी चाहिए तथा सुरक्षित तरीके से घायल की मदद करनी चाहिए।

पीएम-राहत योजना के तहत पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ितों को निर्धारित नियमों और अस्पताल संबंधी शर्तों के अनुसार दुर्घटना की तारीख से अधिकतम सात दिनों तक ₹1.5 लाख तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराया जा सकता है। इसलिए दुर्घटना पीड़ित को समय पर अस्पताल पहुंचाना और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है।
नेक नागरिकों को अनावश्यक पूछताछ से संरक्षण
सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद करने वाले को नेक नागरिक या गुड सेमेरिटन कहा जाता है। ऐसे लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र सरकार ने कानूनी संरक्षण संबंधी नियम बनाए हैं। इनके अनुसार, घायल को अस्पताल पहुंचाने या दुर्घटना की सूचना पुलिस को देने वाले व्यक्ति को अनावश्यक रूप से पुलिस पूछताछ अथवा अस्पताल की औपचारिकताओं में नहीं उलझाया जाना चाहिए। उसे सामान्यतः तत्काल जाने की अनुमति दी जानी चाहिए।
यदि कोई नेक नागरिक स्वेच्छा से गवाह बनना स्वीकार करता है, तो उससे निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत पूछताछ की जा सकती है। ऐसे में लोगों को दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद करने से डरने की आवश्यकता नहीं है।
परिवहन अधिकारियों ने दी सड़क सुरक्षा की जानकारी
कार्यशाला के समापन अवसर पर हल्द्वानी के आरटीओ अरविंद पांडेय और ऊधमसिंह नगर के एआरटीओ नवीन सिंह ने प्रतिभागियों को यातायात नियमों के पालन, सुरक्षित वाहन संचालन, दुर्घटनाओं से बचाव और हादसे के समय बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी दी। उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले मास्टर ट्रेनर्स को प्रमाणपत्र भी वितरित किए।
कार्यशाला के आयोजन और प्रशिक्षण गतिविधियों में एससीईआरटी के अखिलेश डोभाल तथा संजय भट्ट का विशेष योगदान रहा। कार्यशाला में सड़क सुरक्षा को केवल नियमों तक सीमित न रखकर सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाने पर जोर दिया गया। प्रशिक्षित शिक्षक विद्यालयों में विद्यार्थियों को जागरूक करेंगे, जिससे सड़क सुरक्षा का संदेश परिवारों और समाज तक पहुंचेगा।




