अविकल उत्तराखंड
अल्मोड़ा। रामपुर तिराहा, मुजफ्फरनगर कांड के शहीदों को न्याय दिलाने और घटना के दोषियों को दंडित करने की मांग को लेकर गांधी जयंती के अवसर पर गांधी पार्क में उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी, उत्तराखंड लोक वाहिनी, उत्तराखंड छात्र संगठन एवं अन्य संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में श्रद्धांजलि सभा एवं धरना दिया गया। सभा में 2 अक्टूबर 1994 को मुजफ्फरनगर में शहीद हुए आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि देते हुए घटना के 32 वर्ष बाद भी न्याय पूरा न होने पर चिंता व्यक्त की गई।
सभा में शहीद अशोक कुमार, गिरीश भद्री, राजेश लखेरा, राजेश नेगी, रविंद्र रावत उर्फ गोलू, सतेंद्र चौहान और सूर्यप्रकाश थपलियाल को श्रद्धांजलि दी गई। वक्ताओं ने कहा कि रामपुर तिराहा कांड उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन का ऐसा काला अध्याय है, जिसमें आंदोलनकारियों पर गोलीकांड, दमन, झूठे मुकदमों तथा महिलाओं के साथ गंभीर यौन हिंसा जैसी घटनाएं हुईं। तीन दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी सभी दोषियों को सजा न मिलना न्याय व्यवस्था और तत्कालीन सत्ता-तंत्र की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के संयोजक पीसी तिवारी ने कहा कि जिन सपनों और अवधारणाओं के लिए उत्तराखण्ड राज्य का आंदोलन लड़ा गया, राज्य बनने के बाद भी वे पूरे नहीं हुए। शहीदों की कुर्बानी के बाद बने राज्य में आज बेरोजगारी, पलायन और ठेका व्यवस्था जैसी समस्याएं गंभीर रूप ले चुकी हैं। उन्होंने कहा कि शहीदों के सपनों का उत्तराखण्ड बनाने के लिए जनसंघर्ष को फिर मजबूत करना होगा।
उत्तराखंड लोक वाहिनी के वरिष्ठ नेता एडवोकेट जगत रौतेला ने कहा कि मुजफ्फरनगर कांड के दोषियों की जवाबदेही तय किए बिना उत्तराखण्ड आंदोलन के इतिहास के साथ न्याय नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि जनआंदोलनों और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए जनता को संगठित होना होगा।
पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष प्रकाश जोशी ने कहा कि 32 वर्ष बाद भी कांड के सभी दोषियों को सजा न मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है। डी.एस. फर्त्याल ने कहा कि राज्य के मूल सवालों को लेकर नए जनसंघर्ष की आवश्यकता है। चंद्रमणि भट्ट ने जनभागीदारी को आंदोलनों की ताकत बताया।
शोभन सिंह जीना विश्वविद्यालय की नवनिर्वाचित उपसचिव सीता चम्याल ने शिक्षा के बढ़ते बाजारीकरण और बेरोजगारी को युवाओं के सामने बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि शहीदों के सपनों का उत्तराखण्ड बनाने की लड़ाई को शिक्षा और रोजगार के सवालों से जोड़ना होगा।
युवा नेता अजयमित्र सिंह बिष्ट ने कहा कि उत्तराखण्ड का युवा सरकारों की मनमानी और वर्तमान व्यवस्था को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने शहीदों के सपनों के लिए संघर्ष तेज करने का आह्वान किया। सभा को मोहम्मद शाकिब, गोविंद लाल वर्मा, नारायण राम सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया।
लगभग ढाई घंटे चली सभा के अंत में उपस्थित लोगों ने रामपुर तिराहा कांड के शहीदों को न्याय दिलाने तथा दोषियों को कानून के अनुसार कठोर दंड दिलाने के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।
धरने में आनंदी वर्मा, गोपाल राम, मनोज पंत, अजय मेहता, मोहम्मद हारिस, किरण आर्य, पूजा थापा, दीप चंद्र भट्ट, स्वाति तिवारी, रिया भट्ट, वंदना कोहली, पान वोहरा, कविता आर्या सहित विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।




