खोदा पहाड़ निकली चुहिया,
नया कुछ भी नहीं, वही सब पुराना

राहुल गांधी के साथ उत्त्तराखण्ड कांग्रेस की अहम बैठक में नया कोई फैसला नहीं

..फिर वही शाम वही गम वही तन्हाई है…

बाद में तय होगा सीएम का चेहरा

राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत होंगे उत्त्तराखण्ड के आब्जर्वर

अविकल उत्त्तराखण्ड

नई दिल्ली/देहरादून। खोदा पहाड़ और निकली चुहिया। कुछ भी तो नया नहीं हुआ। सब कुछ वही पुराना। 48 घण्टे पहले किये गए हरीश रावत के ट्वीट के बाद भी यथास्थिति बरकरार।

राहुल गांधी व अन्य केंद्रीय नेताओं के साथ हुई बैठक के बाद न तो सीएम फेस पर ही बात फाइनल हुई। न ही प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव को हटाए जाने पर सहमति बनी। हाईकमान ने अपने पुराने रुख पर कायम रहते हुए पुरानी स्थिति बरकरार रखी।

हरीश के ट्वीट से पहले उत्त्तराखण्ड में जिस नेता को जो जिम्मेदारी सौंपी गई थी उसमें कोई फेरबदल नहीं किया गया। तारीफ की बात यह रही कि दिल्ली में चली बैठक के बाद मीडिया से बातचीत की जिम्मेदारी प्रचार अभियान कमेटी के चैयरमैन हरीश रावत को ही सौंपी गई।

वे मीडिया के सामने आए। अगल- बगल प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव मास्क लगाए खड़े थे। नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह भी मंद मंद मुस्कराते दिखे। भाजपा छोड़ घर वापसी करने वाले यशपाल आर्य  भी पूर्व सीएम हरीश रावत के बगलगीर बने महीन मुस्कान के साथ नजर आये।

मीडिया से हरीश रावत ने जो कुछ कहा उसमें कुछ भी नया नहीं था। मसलन, उन्होंने कहा कि चुनाव प्रचार को वे लीड करेंगे। जबकि सच्चाई यही है कि  प्रचार अभियान समिति के चेयरमैन के तौर पर हरीश रावत ही समूचे चुनाव प्रचार को लीड कर रहे थे। यह बात विपक्षी दलों के अलावा जनता भी समझ रही थी। यही कारण रहा कि गृह मंत्री अमित शाह ने देहरादून में अपने भाषण को हरीश रावत पर ही केंद्रित रखा। परिवर्तन यात्राओं से लेकर राहुल गांधी की जनसभा तक हरीश रावत ही केंद्र में रहे।लिहाजा, अब हरीश रावत का यह कहना कि चुनाव प्रचार को वे लीड करेंगे, किसी के गले नहीं उतरा।

सुनी सबकी करी मन की

दूसरी बात, बैठक में चुनाव से पहले सीएम चेहरा घोषित करने पर भी कोई ठोस फैसला नहीं हुआ। इस मुद्दे पर भी हरीश रावत गाहे बगाहे ट्वीट करते रहे हैं। विभिन्न सर्वे व रैलियों में आ रही भीड़ के केंद्र में भी हरीश रावत को अन्य नेताओं से ज्यादा नंबर मिल रहे थे। लेकिन मीडिया के सवाल के जवाब में स्वंय हरीश रावत ने कहा कि चुनाव के बाद विधानमंडल दल की बैठक में नेता का चयन किये जाने की परंपरा रही है। और कांग्रेस अध्यक्ष को यह विशेष अधिकार होता है

उन्होंने यह भी कहा कि अभी वे चुनाव प्रचार को लीड करेंगे। सभी मिलकर सहयोग करेंगे। दिल्ली की मीडिया के सामने हरीश रावत ने फिर दोहराया कि कदम कदम बढ़ाए जा…कांग्रेस के गीत गाये जा..यह जिंदगी उत्त्तराखण्ड की है.. तू उत्त्तराखण्ड पर लुटाये जा.. कांग्रेस के गीत गाएंगे।

मीडिया के यह पूछने पर कि उनके हालिया कदम से  कांग्रेस को नुकसान हुआ तो हरीश रावत ने कहा कि भाजपा को पता है कि हरीश रावत के हर कदम से उनका नुकसान होता है।

बहरहाल, दिल्ली में हुई महापंचायत के बाद उत्त्तराखण्ड कांग्रेस की गणित में कुछ भी बदलाव नहीं किया गया। कोई नया फार्मूला भी पेश नहीं किया गया। चुनाव प्रचार के चेहरे हरीश रावत पहले भी थे और अभी भी रहेंगे।

हाईकमान ने सभी की सुनने के बाद तत्काल किसी भी नयी व्यवस्था थोपने का मन नहीं बनाया। कांग्रेस की नाव के खिवैया अपने अंदाज में चुनावी चप्पू चलाएंगे। लेकिन बीते दो दिन से उत्त्तराखण्ड व दिल्ली में चल रहे हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद कांग्रेस के प्रचार अभियान को धक्का जरूर लगा। दिल्ली में हुए वीवीआईपी मंथन के बाद किसके हिस्से अमृत आया और किसके हिस्से हलाहल, पब्लिक है ये सब जानती है..

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