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हरिद्वार पंचायत चुनाव में विजयी मुस्लिम प्रत्याशी भाजपा की ओर खिंचे

कई जिला पंचायत,क्षेत्र पँचायत सदस्य भाजपा में हुए शामिल. पीएम मोदी व सीएम धामी की नीतियों पर जनता की मुहर-निशंक

अविकल उत्तराखंड

देहरादून/ हरिद्वार। दो अक्टूबर को जब पूरा प्रदेश अंकिता हत्याकांड व मुजफ्फरनगर कांड की बरसी पर बन्द व प्रदर्शन में जुटा था , ठीक उसी समय हरिद्वार में भाजपा सांसद निशंक व प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट कांग्रेस में सेंध लगा रहे थे। और पहली बार सीएम धामी के नेतृत्व में हरिद्वार पंचायत चुनाव में भाजपा का परचम लहरा दिया गया। विजयी मुस्लिम प्रत्याशियों का भाजपा मकई तरफ बढ़ता आकर्षण एक नयी राजनीतिक इबारत की ओर इशारा कर रहा है।

कांग्रेस विधायक ममता राकेश की नवनिर्वाचित क्षेत्र पंचायत सदस्य आयुषी राकेश व काँग्रेस के प्रदेश सचिव अभिषेक राकेश भाजपा में शामिल हो गए। यही नहीं, जिला पंचायत सदस्य अनीता देवी रेनू बाला, आप पार्टी से जीतीं अंजू देवी, फरहीन, खुर्शीदा ने भाजपा की सदस्यता ली।इन्हें मिलाकर 44 के जिला पंचायत बोर्ड में भाजपा की सदस्य संख्या 31 तक पहुंच गई। इनमें बाद में शामिल हुए मुस्लिम सदस्यों की संख्या काबिलेगौर है।

सीएम धामी-हरिद्वार पंचायत चुनाव में पहली बार खिला कमल

त्रिस्तरीय हरिद्वार जिला पंचायत  के चुनाव में भाजपा के 14 सदस्य जीते थे। लेकिन मतगणना के बाद तीन दिन के अंदर भाजपा को 17 अन्य जिला पंचायत सदस्यों का समर्थन मिल गया। इनमें कांग्रेस, आप, बसपा व निर्दलीय जीते जिला पंचायत सदस्य भाजपा में शामिल हो गए।भाजपा के रणनीतिकार मतगणना के रुझान आने के बाद से ही निर्दलीय,कांग्रेस व बसपा के विजयी उम्मीदवारों को भाजपा में शामिल कराने की मुहिम में जुट गए थे।

भविष्य के चुनावों को देखते हुए मुस्लिम नेताओं का भाजपा में शामिल होना कांग्रेस व बसपा के इस परम्परागत वोट बैंक में भारी सेंधमारी मानी जा रही है।

इस बीच, बेटा व बेटी के भाजपा में शामिल ह9ने पर कांग्रेस विधायक ममता राकेश ने अपने ही पार्टी के  बड़े नेता को कठघरे में खड़ा करते हुए आरोप लगाया कि भितरघात की वजह से उनके बेटे की हार हुई। यह घटनाक्रम कांग्रेस की सेहत के लिए बहुत शुभ नहीं माना जा रहा है।
क्षेत्र पंचायत सदस्य जीती आयुषी राकेश अब भगवानपुर ब्लाक प्रमुख पद पर भाजपा की तय प्रत्याशी मानी जा रही है।

पंचायत चुनाव के दौरान जहरीली शराब से हुई मौतों के बावजूद आरोपी महिला बबली की जीत और फिर गिरफ्तार होने की कहानी भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

कांग्रेस व बसपा के लिए हरिद्वार के पंचायत चुनाव एक बुरे सपने की तरह साबित हुए। भाजपा के लिए यह सुकून की बात रही कि कई मुस्लिम विजयी उम्मीदवार खुल कर सीएम धामी के समर्थन में उतर कर पार्टी में शामिल हो गए। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा हरिद्वार में तीन सीटों पर सिमटकर  विशेष प्रदर्शन नहीं कर पाई थी ।

भाजपा में शामिल विजयी प्रत्याशी

हालांकि, हरिद्वार लोकसभा सीट पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक के पास है लेकिन विधानसभा में  कांग्रेस व बसपा का प्रदर्शन भाजपा से बेहतर रहता आया है। इस हार के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करण मेहरा व पूर्व सीएम हरीश रावत ने सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। मेहरा ने चुनावी नतीजों की न्यायिक जांच की मांग की है। हरीश रावत तो शुरू में ही कह चुके थे कि टिकट बंटवारे में उन्हें नहीं पूछा गया। जबकि मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान का कहना है कि गुटबाजी में बिखरी कांग्रेस हार से बौखला गयी है।

स्थानीय बसपा नेता अपने प्रभारी व बड़े नेताओं को कोस रहे हैं। जबकि जवाब में सांसद निशंक का कहना है कि विपक्ष अपनी हार से बौखला गया है। हरिद्वार पंचायत चुनाव की जीत से यह साबित हो गया है कि जनता ने पीएम मोदी और सीएम पुष्कर धामी की लोकप्रिय नीतियों पर मुहर लगाई है।

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राजनीति- हरिद्वार जिला पंचायत में भाजपा का बोर्ड बनना तय

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