करण ने कहा, उच्च शिक्षा में भी गड़बड़, कुलपति बोले, छवि धूमिल न करें

देहरादून में विधानसभा गेट व ऋषिकेश में पूर्व विस अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल के आवास पर प्रदर्शन।

कांग्रेस ने कहा उच्च शिक्षा में भी हुआ भर्ती घोटाला।

स्पीकर ऋतु खंडूड़ी के फैसले ओर टिकी निगाहें

उत्तराखंड में कमोबेश हर विभाग में समय समय पर हुई नियुक्तियों में गड़बड़ की खबरें आये दिन सामने आ रही है । प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करण माहरा ने उच्च शिक्षा में हुई भर्तियों पर सवाल उठाए तो मुक्त विवि के कुलपति प्रो. ओपीएस नेगी ने जवाब देते हुए कहा कि अनर्गल खबरों से विश्वविद्यालय की छवि धूमिल नहीं की जाय।

उधर, कांग्रेस ने शुक्रवार को भर्तियों को लेकर विधानसभा के बाहर प्रदर्शन कर सरकार को घेरा। जबकि एक संगठन ने ऋषिकेश में पूर्व विधानसभाध्यक्ष व वित्त मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के आवास के बाहर प्रदर्शन किया। इधर, स्पीकर ऋतु खण्डूड़ी विदेश से लौटने के बाद अभी दिल्ली में हैं उनके देहरादून लौटने का इंतजार हो रहा है। सीएम धामी के पत्र के बाद अब सभी की निगाहें स्पीकर पर टिकी है।

उच्च शिक्षा में मनमानी भर्ती-करण माहरा

उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष करण माहरा ने कहा कि उच्च शिक्षा में भी भर्तियों में काफी मनमाने तरीके से नियुक्तियां की गई है। उन्होंने कहा कि चाहे वह श्री देव सुमन यूनिवर्सिटी हो या ओपन यूनिवर्सिटी हो इनमें भी अपने चहेतों को लाभ पहॅुचाने के लिए नियम विरुद्ध नियुक्तियां की गई है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करण माहरा


माहरा ने कहा कि ओपन यूनिवर्सिटी में 56 नियमित नियुक्तियां की गई हैं और कुछ भर्तियां आउटसोर्स के माध्यम से की गई है जिसमें वित्त सचिव ने आपत्ति जताते हुए इन्हें नियम विरुद्ध बताया था। उन्होंने कहा कि बित्त सचिव ने उच्च शिक्षा सचिव को पत्र लिखकर कार्रवाई करने के लिए कहा था क्योंकि ये पद स्वीकृत नही थे ना ही इनकी वित्तीय स्वीकृत ही थी।

माहरा ने कहा कि वित्तीय स्वीकृति एवं पद सृजन के यह नियुक्तियां की गई थी। मनमाने ढंग से की गई इन नियुक्तियों पर आज तक सरकार ने क्या कार्रवाई की किसी को कुछ पता नहीं है। उन्होंने कहा कि सीएम कार्यालय में तैनात गिरिजाशंकर जोशी की ओपन युनिवर्सिटी में नियुक्ति पहले से ही विवादों क घेरे में रही है। श्री माहरा ने कहा कि वहीं श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय के ऋषिकेश परिसर मैं 65 पदों पर समायोजन के माध्यम से नियम विरुद्ध नियुक्तियां की गई है जिसका प्रकरण भी हाईकोर्ट में लंबित है।

उन्होंने कहा कि श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय ऋषिकेश परिसर के लिए पूरे प्रदेश के राजकीय डिग्री कॉलेजों से आवेदन मांगे गए थे जिसमें चयन प्रक्रिया इंटरव्यू एवं वरिष्ठता के आधार पर होना था लेकिन अंतिम समय में वरिष्ठता सूची को दरकिनार कर दिया गया एवं चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए सी.आर. का मानक जोड़ा गया ताकि इनके चहेतों का समायोजन हो सके। उन्होंने कहा कि जो पात्र थे उन्हें दरकिनार किया गया। माहरा ने कहा कि तकनीकी विश्वविद्यालय और आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय मैं भी भारी मात्रा में नियम विरूद्ध चहेतों की नियुक्तियां की गई है।

उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में जो भी नियम विरुद्ध नियुक्तियां की गई हैं उनकी जॉच की जाय। श्री माहरा ने कहा कि उक्त चारों विश्वविद्यालयों में नियम विरुद्ध की गई सभी नियुक्तियां एवं समायोजन निश्चित तौर पर एक बड़े घोटाले की ओर इशारा कर रही है जिसकी निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह नियुक्तियां भी राज्य अधीनस्थ सेवा चयन आयोग में हुए भर्ती घोटाले की तरह ही प्रतीत होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन सब नियुक्तियों में भी कार्रवाई आवश्यक है ताकि दूध का दूध पानी का पानी हो सके


 
अनर्गल खबरों से विश्वविद्यालय की छवि धूमिल न की जाए : कुलपति, उत्‍तराखण्‍ड मुक्‍त विश्‍वविद्यालय


 
उत्‍तराखण्‍ड मुक्‍त विश्‍वविद्यालय के कुलपति प्रो0 ओ.पी.एस. नेगी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि कुछ लोग विश्‍वविद्यालय की 56 भर्ती वाले प्रकरण को बेवजह मीडिया में उठा कर विश्‍वविद्यालय की छवि को धुमिल करने की कोशिश कर रहे हैं, जो कि सर्वथा अनुचित है और विश्‍वविद्यालय के शिक्षार्थियों के साथ खिलवाड़ है।

प्रो0 नेगी ने कहा कि ये 56 नियुक्तियां उनके कार्यकाल से पूर्व की हैं, उन्‍होंने विश्‍वविद्यालय में कुलपति के पद पर फरवरी 2019 में कार्यभार ग्रहण किया था। ऑडिट आपत्ति वाली सभी नियुक्तियां 2017 से पूर्व की हैं। यह आडिट आपत्ति  2018-19 में लगी थीं और यह आंतरिक ऑडिट समिति की आपत्तियां थी। आपत्तियों के निस्‍तारण हेतु सुपष्‍ट आख्‍या तैयार कर नियुक्ति के प्राविधानों के अभिलेख लगागर निस्‍तारण हेतु शासन को प्रेषित किया गया था, लेकिन शासन स्‍तर पर समय रहते इनका निस्‍तरण नहीं हो पाया। वर्ष 2021 में इसी प्रकरण पर ‘अमरउजाला’ में प्रकाशित समाचार के संदर्भ में राजभवन से मांगे गए जवाब के क्रम में भी विश्‍वविद्यालय आपनी सुस्‍पष्‍ट आख्‍या आवश्‍यक संलग्‍नकों के साथ राजभवन को प्रेषित कर चुका था।


प्रो0 नेगी ने कहा कि मुक्‍त विश्‍वविद्यालय एक किराए के कमरे से शुरू होकर आज अपने भवन पर संचालित हो रहा है। विश्‍वविद्यालय सम्‍पूर्ण राज्‍य के शिक्षार्थियों के लिए स्‍थापित किया गया है। लोग जैसे-जैसे दूरस्‍थ शिक्षा के महत्‍व को समझते रहे वैसे वैसे विश्‍वविद्यालय में छात्र संख्‍या बढ़ती रही। आज विश्‍वविद्यालय में लगभग 1 लाख शिक्षार्थी अध्‍ययनरत हैं। विश्‍वविद्यालय आज देश में ही नहीं विश्‍व में अपनी पहिचान बना रहा है। साइबर सिक्‍वेरिटी व अन्‍य रोजगारपरक व विशिष्‍ट पाठ्यक्रमों के साथ विशेष शिक्षा जैसे अन्‍य पाठ्यक्रमों के संचालन से समावेशी शिक्षा को बढ़ावा दे रहा है। मुक्‍त विश्‍वविद्यालय शिक्षार्थी को अध्‍ययन सामग्री (किताबें) भी उपलब्‍ध कराता है।

अध्‍ययन सामग्री अथवा किताबें तैयार करने व अकादमिक कार्यों के लिए शिक्षकों/शैक्षिक परामर्शदाताओं की आवश्‍यकता होती है, इन्‍हें शिक्षार्थियों तक पहुंचाने व अन्‍य तकनीकी और गैर शैक्षणिक कार्यो के लिए कार्मिकों की आवश्‍यकता होती रहती है। शासन से स्‍थाई पदों पर स्‍वीकृत न होने के कारण ‘‘समय-समय पर विश्‍वविद्यालय प्रथम अध्‍यादेश 2009, जो शासन द्वारा निर्मित है, के अध्‍याय – आठ में विश्‍वविद्यालय के दक्षतापूर्ण कार्य करने के लिए पाठ्यक्रम लेखकों, काउन्‍सलरों, परामर्शदाताओं तथा अन्‍य व्‍यक्तियों, के अल्‍पकालिक नियोजन अधिकतम 6 माह के लिए नियोजन का अधिकार विश्‍वविद्यालय को है। फलस्‍वरूप कार्य के महत्‍व को देखते हुए समय-समय पर विश्‍वविद्यालय के नियमों/परनियमों के आधार पर विस्‍तरित किया जाता रहता है।


उन्‍होंने यह भी कहा कि माननीय मंत्री उच्‍च शिक्षा डॉ0 धन सिंह रावत व अन्‍य किसी को इन भर्तियों से जोडना उचित नहीं है। यदि अब कोई भी मीडिया कर्मी या अन्‍य व्‍यक्ति मीडिया में बिना तथ्‍यों को समझे बगैर इसे लेकर अनर्गल खबरें प्रकाशित करता है, वाइरल करता है तो विश्‍वविद्यालय की छवि को बचाने के लिए शिक्षार्थियों के हित में विश्‍वविद्यालय को अमूक व्‍यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करने के लिए मजबूर होना होगा।

बद्रीनाथ से विधायक एवं पूर्व काबीना मंत्री राजेंद्र भंडारी के आह्वान पर आज उत्तराखंड कांग्रेस के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने विधानसभा के मुख्य द्वार पर धरना दिया। धरने में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष करण मेहरा, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत एवं पूर्व अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने हिस्सा लिया।

ऋषिकेश में मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के घर के बाहर प्रदर्शन, आठ लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया


ऋषिकेश। विधानसभा में बैकडोर नियुक्तियों के विरोध में वित्त मंत्री (पूर्व विधानसभा अध्यक्ष) प्रेमचंद अग्रवाल के घर पर धरना देने जा रहे उत्तराखंड जन एकता पार्टी के संयोजक कनक धनई सहित आठ लोगों को पुलिस ने अपनी हिरासत में ले लिया है।
शुक्रवार सुबह से ही अग्रवाल के निवास के चारों ओर जबरदस्त बैरिकेडिंग कर पूरे पूरे क्षेत्र को पुलिस छावनी में बदल दिया था ।
उसके बावजूद कनक धनई पुलिस को चकमा देकर उनके निवास तक पहुंच गए। जहां उन्होंने नारेबाजी शुरू कर दी। इस बीच मौके पर पहुंचकर कोतवाली प्रभारी रवि कुमार सैनी सहित अन्य पुलिसकर्मियों ने उन्हें हिरासत में ले लिया।


मौके पर ऋषिकेश तहसीलदार अमृता शर्मा, ग्रामीण पुलिस अधीक्षक कमलेश उपाध्याय, पुलिस क्षेत्राधिकारी डीसी ढोंडियाल, सहित आसपास के थानों से बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात था ।

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