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डॉ० अनूप गक्खड़ उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलसचिव बने

डॉ० राजेश कुमार अदाना व  डॉ० सतीश कुमार सिंह को कारण बताओ नोटिस

अविकल उत्तराखण्ड

देहरादून। डॉ० अनूप गक्खड़ ऋषिकुल परिसर हरिद्वार को उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय हर्रावाला का प्रभारी कुलसचिव नियुक्त किया गया है। जबकि डॉ० राजेश कुमार अदाना, चिकित्साधिकारी व डॉ० सतीश कुमार सिंह, चिकित्साधिकारी, आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवायें को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

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कार्यालय ज्ञाप
आयुष एवं आयुष शिक्षा विभाग, उत्तराखण्ड शासन के कार्यालय ज्ञाप संख्या – 22/XL- 1/2022-19/2010T.C.-III दिनांक 24.01.2022 के द्वारा डा० अरूण कुमार त्रिपाठी, परिसर निदेशक, गुरूकुल परिसर, हरिद्वार उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय को प्रभारी कुलसचिव, उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय, हर्रावाला, देहरादून के पद पर नियुक्त किया गया था ।
2- शासन के कार्यालय ज्ञाप दिनांक 24.01.2022 को अवक्रमित करते हुए डॉ० अरूण कुमार त्रिपाठी के स्थान पर डॉ० अनूप गक्खड़ ऋषिकुल परिसर हरिद्वार, उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय, हर्रावाला को उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय अधिनियम – 2009 ( समय-समय पर यथा संशोधित) एवं उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय परिनियमावली – 2015 के परिनियम – 8 ( 1 ) में निहित प्राविधानों के अन्तर्गत कुलसचिव, उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय, हर्रावाला, देहरादून के पद पर कार्यवाहक / प्रभारी के रूप में अग्रिम आदेशों तक तैनात किया जाता है।
3- प्रो0 अनूप गक्खड़, ऋषिकुल परिसर, हरिद्वार को उक्त प्रभार के लिए पृथक से कोई वेतन भत्ते आदि देय नहीं होंगे।
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे।
(डॉ० विजय कुमार जोगदण्डे)
कारण बताओ नोटिस
डॉ० राजेश कुमार अदाना, चिकित्साधिकारी आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवायें,
उत्तराखण्ड देहरादून ।
मा० उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय, नैनीताल के आदेश दिनांक 15.12.2022 के समादर में शासन के कार्यालय ज्ञाप / नोटिस दिनांक 23.12.2022 एवं शासन के कारण बताओ नोटिस संख्या-2700, दिनांक 03.01.2023 के द्वारा आपको 24 घंटे के भीतर अपने मूल तैनाती स्थान पर कार्यभार ग्रहण करते हुए 01 सप्ताह के अन्दर यह अवगत कराने की अपेक्षा की गयी थी कि शासकीय आदेशों की अवहेलना हेतु क्यों न आपके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ कर दी जाय, किन्तु आप द्वारा न तो अपनी मूल तैनाती स्थान कार्यभार ग्रहण नहीं किया गया है न ही शासन के आदेशों के अनुपालन में अपनी स्थिति स्पष्ट की गयी है ।
2- आपको पूर्व में भी अवगत कराया गया है कि आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारियों का नियुक्ति प्राधिकारी शासन है तथा एक सरकारी कार्मिक होने के दृष्टिगत आपके द्वारा अपने नियुक्ति प्राधिकारी के आदेशों का अनुपालन किया जाना बाध्यकारी हैं। अपने नियुक्ति प्राधिकारी के आदेशों की अवहेलना करना कर्मचारी आचरण नियमावली के प्राविधानों का भी उल्लंघन है।
3- आप भिज्ञ हैं कि शासन के पत्र दिनांक 25.01.2022 के द्वारा आपकी सम्बद्धता समाप्त कर दी गयी थी, किन्तु आपके द्वारा शासन के आदेशों के क्रम में अपने मूल तैनाती स्थान पर आतिथि तक कार्यभार ग्रहण नहीं किया गया। उक्त आदेश के उपरान्त शासन के पत्र संख्या- 271 दिनांक 27.01.2022, पत्र संख्या – 587, दिनांक 31.03.2022 पत्र संख्या – 668, दिनांक 12.04.2022 पत्र संख्या- 2165, दिनांक 26.09.2022, पत्र संख्या – 2659, दिनांक 23.12.2022 एवं पत्र संख्या-2700, दिनांक 03.01.2023 के द्वारा बार-बार निर्देशित किये जाने के उपरान्त भी आपके द्वारा शासन के आदेशों का अनुपालन नहीं किया गया तथा निरन्तर कर्मचारी आचरण नियमावली के प्राविधानों से इतर कार्यशैली प्रदर्शित करते हुये नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है।
4- अतः इस सम्बन्ध में अंतिम बार निर्देशित किया जाता है कि इस पत्र की प्राप्ति के 24 घंटे के भीतर अपने मूल तैनाती स्थान पर कार्यभार ग्रहण करते हुए 01 सप्ताह के अन्दर यह अवगत कराये कि शासकीय आदेशों की अवहेलना हेतु क्यों न आपके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ कर दी जाय। यदि निर्धारित अवधि के अन्दर आपके द्वारा शासन के आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए अपना प्रतिउत्तर उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो मान लिया जायेगा कि आपको इस सम्बन्ध में कुछ नहीं कहना है तथा शासन द्वारा कर्मचारी आचरण नियमावली तथा उत्तराखण्ड सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) (संशोधन) नियमावली-2010 के संगत नियमों के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ कर दी जायेगी। संलग्नक – यथोपरि
संख्यांकन-

(XI-1/2023-175/2010T C
तटदिनांकित
(डॉ० विजय कुमार जोगदण्डे)
कारण बताओ नोटिस
डॉ० सतीश कुमार सिंह, चिकित्साधिकारी, आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवायें, उत्तराखण्ड देहरादून।
HD उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय, नैनीताल के आदेश दिनांक 15.12.2022 के समादर में शासन के कार्यालय ज्ञाप / नोटिस दिनांक 23.12.2022 एवं शासन के कारण बताओं नोटिस संख्या-2701 दिनांक 03.01.2023 के द्वारा आपको 24 घंटे के भीतर अपने मूल तैनाती स्थान पर कार्यभार ग्रहण करते हुए 01 सप्ताह के अन्दर यह अवगत कराने की अपेक्षा की गयी थी कि शासकीय आदेशों की अवहेलना हेतु क्यों न आपके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ कर दी जाय, किन्तु आप द्वारा न तो अपनी मूल तैनाती स्थान कार्यभार ग्रहण नहीं किया गया है न ही शासन के आदेशों के अनुपालन में अपनी स्थिति स्पष्ट की गयी है।
2- आपको पूर्व में भी अवगत कराया गया है कि आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारियों का नियुक्ति प्राधिकारी शासन है तथा एक सरकारी कार्मिक होने के दृष्टिगत आपके द्वारा अपने नियुक्ति प्राधिकारी के आदेशों का अनुपालन किया जाना बाध्यकारी हैं। अपने नियुक्ति प्राधिकारी के आदेशों की अवहेलना करना कर्मचारी आचरण नियमावली के प्राविधानों का भी उल्लंघन है।
3- शासन के पत्र दिनांक 30.05.2022 के द्वारा आपकी सम्बद्धता समाप्त कर दी गयी थी, किन्तु आपके द्वारा शासन के आदेशों के क्रम में अपने मूल तैनाती स्थान पर आतिथि तक कार्यभार ग्रहण नहीं किया गया। उक्त आदेश के उपरान्त शासन के पत्र संख्या 1270 दिनांक 27.06.2022 एवं पत्र संख्या-2604 दिनांक 17.12.2022 पत्र संख्या-2659 दिनांक 23.12.2022 एवं पत्र संख्या-2701 दिनांक 03.01.2023 के द्वारा बार-बार निर्देशित किये जाने के उपरान्त भी आपके द्वारा शासन के आदेशों का अनुपालन नहीं किया गया तथा निरन्तर कर्मचारी आचरण नियमावली के प्राविधानों से इतर कार्यशैली प्रदर्शित करते हुये नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है।
4- अतः इस सम्बन्ध में अंतिम बार निर्देशित किया जाता है कि इस पत्र की प्राप्ति के 24 घंटे के भीतर अपने मूल तैनाती स्थान पर कार्यभार ग्रहण करते हुए 01 सप्ताह के अन्दर यह अवगत कराये कि शासकीय आदेशों की अवहेलना हेतु क्यों न आपके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ कर दी जाय। यदि निर्धारित अवधि के अन्दर आपके द्वारा शासन के आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए अपना प्रतिउत्तर उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो मान लिया जायेगा कि आपको इस सम्बन्ध में कुछ नहीं कहना है तथा शासन द्वारा कर्मचारी आचरण नियमावली तथा उत्तराखण्ड सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) (संशोधन) नियमावली-2010 के संगत नियमों के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ कर दी जायेगी।
संलग्नक – यथोपरि
(डॉ० विजय कुमार जोगदण्डे) 20/01/023 अपर सचिव।

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