चुनावी बिसात – ‘एक परिवार-एक टिकट’ पर कांग्रेस में बढ़ी हलचल

विरोध प्रदर्शनों और दावेदारों ने बढ़ाई सियासी गर्मी

अविकल थपलियाल

देहरादून। उत्तराखंड का माहौल गर्म है। विधानसभा चुनाव अब बहुत दूर नहीं रह गए। विधायक व मंत्री वार्डों में घुस रहे हैं। कांग्रेस की प्रभारी शैलजा के भी पहले की अपेक्षा उत्तराखण्ड के फेरे बढ़ गए हैं। सोशल मीडिया में वीडियो डालकर क्षेत्र विशेष से दावेदारी का भी दावा किया जा रहा है। नई राजनीतिक पार्टी बनने की भी खबरें आ रही है। चुनाव एक ‘अवसर’ के खिलाड़ी शरीर का रंग रोगन कर जनता की अदालत में नये सिरे से कटोरा लेकर खड़े हो गए हैं।

एक परिवार से एक टिकट के फार्मूले पर भी कशमकश जारी है। हाल ही में नैनीताल सीट से पूर्व कांग्रेसी विधायक व नेता विपक्ष यशपाल आर्य के सुपुत्र संजीव आर्य ने टिकट की दावेदारी छोड़कर एक परिवार एक टिकट की मुहिम कोआगे बढ़ाते हुए पूर्व सीएम हरीश रावत,प्रीतम सिंह समेत अन्य नेताओं की दुविधा बढ़ाते हुए कांग्रेस हाईकमान की मुश्किलें काफी आसान कर दी है।


उत्तराखण्ड कांग्रेस की ताजी फिल्म में इस बार लीड रोल नहीं मिलने से गहरे चिंतन में डूबे हरीश रावत के लिए अपने करीबी यशपाल आर्य के पुत्र की यह पहल किसी बड़ी पहेली से कम नहीं मानी जा रही है।
उम्र के इस पड़ाव पर खड़े हरीश रावत अपनी विधायक बेटी अनुपमा रावत, पुत्र आनन्द रावत और बीरेंद्र रावत के टिकट के लिए पुरजोर कोशिश में लगे हैं। हालांकि, प्रदेश प्रभारी शैलजा कुमारी एक परिवार एक टिकट के संकेत पहले ही दे चुकी है।

देखें वीडियो


उधर, प्रीतम सिंह के पुत्र दून जिला पंचायत में अहम पद सम्भाल रहे हैं लेकिन वे चकराता के अलावा विकासनगर से भी टिकट की दावेदारी में है।
कांग्रेस के इन दोनों दिग्गजों के अलावा गणेश गोदियाल, हरक सिंह रावत,रणजीत रावत समेत अन्य नेता फिलहाल स्वंय को ही चुनावी मैदान में स्थापित करने की रणनीति पर चल रहे हैं।


हालांकि, 2022 की तरह हरक सिंह रावत अपनी पुत्रवधु अनुकृति गुसाईं के लिए भी टिकट ट्राय करते। लेकिन ईडी व सीबीआई की जारी जांच से खौफ खाकर अनुकृति  फिलहाल भाजपा में शामिल हैं। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष व हरक की करीबी लक्ष्मी राणा भी कांग्रेस से साफ दूरी बना चुकी हैं।


फिलहाल, 2022 में चुनावी अखाड़े से दूर रहे हरक सिंह 2027 में अपने लिए किसी जिताऊ सीट की गोटी बिछाने में जुटे हुए हैं। बीते विधानसभा चुनाव हार चुके रणजीत रावत भी इस बार बेटे व बहु के बजाय अपने डगमगाए राजनीतिक भविष्य को ही तवज्जो देने की कोशिश में दिख रहे हैं।

इधऱ, चुनाव की सरगर्मी बढ़ते ही धरना-प्रदर्शन व विरोध की घटनाएं भी तेजी से पैर पसार रही है। दस साल से सत्ता में काबिज भाजपा के मंत्रियों व विधायकों के सार्वजनिक विरोध की खबरें भी खूब वॉयरल हो रही है।
बीते दिनों राज्यसभा सदस्य महेंद्र भट्ट, विधायक सरिता आर्य, स्पीकर ऋतु खंडूड़ी,रेणु बिष्ट  समेत कई अन्य भाजपा विधायकों व मंत्रियों के खुले विरोध से भाजपा के सामने नया संकट खड़ा हो गया है।


वैसे,  इन दिनों जारी भाजपा के विभिन्न स्तरीय चुनावी सर्वे में भी कई सीटों पर स्थिति काफी गम्भीर मानी जा रही है। और खुलेआम बढ़ रहे विरोध प्रदर्शन से यह भी साफ हो रहा है कि इस बार कई नान परफॉर्मर भाजपा विधायक व विवादास्पद मंत्रियों को टिकट की अंदरूनी जंग में मात खानी पड़ेगी।
कुल मिलाकर 2027 की चुनावी जंग से पहले सभी प्रमुख दलों में काफी उलटफेर की कहानी बनती नजर आ रही है…

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