स्वर- कालीमठ क्षेत्र के पांच गांवों ने बीकेटीसी में मांगा अपना हक

कालीमाई पंचगाई समिति ने सीएम को पत्र भेज बीकेटीसी में जगह देने की मांग की

अविकल उत्तराखण्ड

कालीमठ। सिद्धपीठ कालीमाई पंचगाई समिति कालीमठ ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र भेज कर पांचों गांवों के हक हकूकधारियों के अधिकार सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।

कालीमठ क्षेत्र के पांच गांव क्रमशः कालीमठ, कविलठा, ब्यूंखी, बेड़ुला और जग्गी बगवान के लोग सदियों से भगवती काली माई की सेवा करते आ रहे हैं किंतु श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति द्वारा इनके योगदान को कोई महत्व नहीं दिया जाता। यहां तक की मंदिर परिसर में समिति को कार्यालय जैसी बुनियादी सुविधा भी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

अतीत में जब तक रावल परम्परा थी, तब सम्यक सम्मान पंचगाई के लोगों को मिलता था लेकिन ब्रिटिश काल में बीकेटीसी के अस्तित्व में आने के बाद इन लोगों को हाशिए पर धकेल दिया गया जबकि सारे पारम्परिक अनुष्ठान इन्हीं पांच गांवों के लोगों द्वारा सम्पादित किए जाते हैं।
हैरानी की बात यह है कि जब से बीकेटीसी अस्तित्व में आई है, तब से आज तक पंचगाईं के किसी भी व्यक्ति को मंदिर समिति का सदस्य नहीं बनाया गया है जबकि ऐसे ऐसे लोग मंदिर समिति के सदस्य बनाए गए हैं जिनका इन मंदिरों की व्यवस्थाओं, सेवा, संरक्षण, परंपराओं या अनुष्ठानों से कोई सीधा सम्बन्ध पहले कभी नहीं रहा।

यहां के लोगों को इस बात पर भी अचरज होता है कि बीकेटीसी में कई बार ऐसे लोग भी नामित किए जाते रहे हैं जिनका बदरीनाथ केदारनाथ से कोई सीधा नाता नहीं है, उन्हें बीकेटीसी में प्रतिनिधित्व मिल जाता है लेकिन वास्तविक हक हकूकधारियों को अब भी कोई महत्व नहीं दिया जाता, जबकि अब अलग उत्तराखंड राज्य बनने के बाद भी किसी सरकार ने इस दिशा में पहल नहीं की।
गौरतलब है कि इस वर्ष भगवती काली माई की दिवारा यात्रा चल रही है। विगत जनवरी में देवप्रयाग स्नान के बाद आजकल काली माई केदारनाथ धाम की यात्रा पर है। वहां शिव शक्ति के मिलन के बाद भगवती बदरीनाथ धाम की यात्रा पर जाएंगी, जहां भगवान नारायण और मां लक्ष्मी को अयुत चंडी महायज्ञ के लिए निमंत्रण देंगी। लोकविश्वास है कि देव शक्तियों को जागृत करने के लिए एक निश्चित अंतराल पर यह विशिष्ट दिवारा यात्राएँ की जाती हैं और यात्रा से लेकर महायज्ञ तक सभी अनुष्ठान काली माई पंचगाईं समिति कालीमठ द्वारा ही संपादित किए जाते हैं। इसमें मंदिर समिति की नाममात्र की ही भागीदारी होती है जबकि आय मंदिर समिति की होती है। पहली बार कालीमाई पंचगाई समिति कालीमठ ने अपने अधिकार की मांग मुख्यमंत्री से की है। यह अलग बात है कि एक पखवाड़ा बीत जाने के बाद भी कालीमाई पंचगाई समिति कालीमठ को कोई सूचना नहीं मिली है। इससे पांचों गांवों के हक हकूकधारियों में निराशा भी है और रोष भी।

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