ईमानदारी, अनुशासन और सुशासन की मिसाल थे भुवन चंद्र खण्डूड़ी-सीएम धामी
अविकल उत्तराखण्ड
भराड़ीसैंण (गैरसैंण)। उत्तराखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पहले दिन सदन ने प्रदेश के दो वरिष्ठ नेताओं को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खण्डूड़ी और पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट के निधन पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य समेत 44 विधायकों ने उनके योगदान को याद किया। चर्चा के दौरान खण्डूड़ी की ईमानदारी, दृढ़ इच्छाशक्ति और प्रशासनिक कार्यशैली से लेकर प्रदेश के विकास में उनकी भूमिका तक के विभिन्न पहलू सामने आए। सदस्यों ने दोनों नेताओं के सार्वजनिक जीवन और जनसेवा के प्रति समर्पण को उत्तराखंड की राजनीतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण में विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूड़ी भूषण की अध्यक्षता में दो दिवसीय सत्र की शुरुआत राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के साथ हुई। शोक प्रस्ताव पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खण्डूड़ी के सैन्य जीवन, राजनीतिक सफर और देश-प्रदेश के विकास में उनके योगदान का उल्लेख किया।
धामी ने कहा कि खण्डूड़ी का जीवन अनुशासन, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और जनसेवा के प्रति समर्पण का प्रेरणादायी उदाहरण रहा। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वर्णिम चतुर्भुज तथा उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम गलियारों जैसी परियोजनाओं के क्रियान्वयन में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में भी खण्डूड़ी ने सुशासन, पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही को प्राथमिकता दी। सड़क और आधारभूत ढांचे के विकास के साथ जनहित से जुड़े फैसलों के लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा।
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने खण्डूड़ी के मुख्यमंत्री कार्यकाल और प्रदेश के विकास में उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि उनका सार्वजनिक जीवन सादगी, ईमानदारी और जनसेवा के प्रति समर्पण का उदाहरण था।
दृढ़ फैसलों और ईमानदारी को किया याद
चकराता विधायक प्रीतम सिंह ने खण्डूड़ी की स्पष्टवादिता और दबाव में आए बिना निर्णय लेने की क्षमता का उल्लेख किया। विधायक मोहम्मद शहजाद ने वर्ष 2007 से 2012 तक के उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल को याद करते हुए उनकी सिद्धांतनिष्ठा और ईमानदारी की सराहना की।
विधायक अरविंद पांडे ने वर्ष 2007 के बाजपुर उपचुनाव से जुड़ी राजनीतिक परिस्थितियों और खण्डूड़ी के नेतृत्व को याद किया। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने लैंसडाउन में गढ़वाल राइफल्स के जवानों के बच्चों के लिए छात्रावास निर्माण हेतु भूमि उपलब्ध कराने के उनके प्रयासों का उल्लेख किया।
विधायक आदेश चौहान ने वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में चर्चित नारे ‘खण्डूड़ी है जरूरी’ का जिक्र करते हुए प्रदेश की राजनीति में उनके प्रभाव को रेखांकित किया।
विधायक बृज भूषण गैरोला ने राज्य आंदोलन से लेकर उत्तराखंड गठन के बाद विकास कार्यों तक खण्डूड़ी की भूमिका को याद किया। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क संपर्क, संचार, पेयजल और शैक्षणिक सुविधाओं के विस्तार को उन्होंने प्राथमिकता दी।

कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं विधायक बंशीधर भगत सहित अन्य सदस्यों ने भी दोनों दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि अर्पित की।
विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूड़ी भूषण ने सदन की भावनाओं को सम्मानपूर्वक स्थान दिया।
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