सुगम-दुर्गम स्थानांतरण पर अभी रोक बरकरार, कार्मिक विभाग की राय के बाद होगा फैसला
अविकल उत्तराखण्ड
देहरादून। उत्तराखंड शासन ने माध्यमिक शिक्षा विभाग में लंबित स्थानांतरण मामलों के निस्तारण को लेकर महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। सचिव रविनाथ रामन ने महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा, निदेशक माध्यमिक शिक्षा तथा अपर शिक्षा निदेशकों को निर्देशित किया है कि उत्तराखंड लोक सेवकों के लिए वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम-2017 के तहत गठित समिति की संस्तुतियों के अनुरूप पात्र मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
शासनादेश के अनुसार, मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति ने माध्यमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, प्रवक्ता तथा सहायक अध्यापकों के स्थानांतरण प्रस्तावों पर विचार किया।
इनमें गंभीर बीमारी, दिव्यांगता, मानसिक रूप से अस्वस्थ या गंभीर रूप से बीमार बच्चों की देखभाल, विधवा, विधुर, तलाकशुदा, परित्यक्ता, आपदा प्रभावित तथा माता-पिता की गंभीर बीमारी जैसे मानवीय आधारों पर प्राप्त आवेदन शामिल हैं। समिति ने ऐसे मामलों में स्थानांतरण अधिनियम की धारा 17(1)(ख) के तहत अनुरोध आधारित तबादलों पर कार्रवाई की संस्तुति दी है।

हालांकि, सुगम से दुर्गम और दुर्गम से दुर्गम क्षेत्रों में स्थानांतरण से जुड़े मामलों पर फिलहाल निर्णय टाल दिया गया है। शासन ने स्पष्ट किया है कि नैनीताल हाईकोर्ट की रिट याचिका संख्या 533/2025 में 16 दिसंबर 2025 को दिए गए आदेश के कारण इस श्रेणी के स्थानांतरणों पर रोक लागू है। इस संबंध में मामला कार्मिक एवं सतर्कता विभाग को भेजा गया है और वहां विचाराधीन है।
शासन ने निर्देश दिए हैं कि धारा-27 के अंतर्गत भेजे गए सभी लंबित आवेदनों का निस्तारण समिति की संस्तुतियों और न्यायालय के आदेशों के अनुरूप निर्धारित समयावधि में किया जाए। वहीं, सुगम-दुर्गम श्रेणी के आवेदनों पर कार्मिक एवं सतर्कता विभाग से आवश्यक परामर्श प्राप्त होने के बाद अलग से आदेश जारी किए जाएंगे।

रविनाथ रामन,
सचिव, उत्तराखण्ड शासन ।
सेवा में,
1. महानिदेशक, विद्यालयी शिक्षा, उत्तराखण्ड ।
2. निदेशक, माध्यमिक शिक्षा, उत्तराखण्ड।
3. अपर शिक्षा निदेशक, माध्यमिक शिक्षा, निदेशालय / कुमांऊ मण्डल / गढ़वाल मण्डल ।
माध्यमिक शिक्षा अनुभाग-01
देहरादूनः दिनांकः 24 जून, 2026
विषयः- उत्तराखण्ड लोक सेवकों के लिए वार्षिक स्थानान्तरण अधिनियम, 2017 के अन्तर्गत स्थानान्तरण हेतु प्राप्त आवेदनों के सम्बन्ध में।
महोदय,
कृपया उपर्युक्त विषयक कार्मिक एवं सतर्कता विभाग, उत्तराखण्ड शासन के पत्र दिनांक 01.06.2026 (छायाप्रति संलग्न), जिसके माध्यम से उत्तराखण्ड लोक सेवकों के लिए वार्षिक स्थानान्तरण अधिनियम, 2017 की धारा-27 के अन्तर्गत मुख्य सचिव, उत्तराखण्ड शासन की अध्यक्षता में गठित समिति की दिनांक 24.04.2026 को सम्पन्न बैठक में माध्यमिक शिक्षा विभाग के अन्तर्गत प्रधानाचार्य / प्रधानाध्यापक / प्रवक्ता / सहायक अध्यापक (एल०टी०) के स्थानान्तरण के संबंध में प्रेषित प्रस्ताव पर समिति द्वारा की गयी संस्तुति / निर्णय की प्रति उपलब्ध करायी गयी हैं, का संदर्भ ग्रहण करने का कष्ट करें।
2-उक्त के क्रम में अवगत कराना है कि समिति द्वारा स्थानान्तरण के संबंध में प्रेषित प्रस्तावों के संबंध में निम्नवत संस्तुति प्रदान की गयी है:-
(माध्यमिक शिक्षा विभाग)
04 प्रधानाचार्य / प्रधानाध्यापक, 91 प्रवक्ता, 97 सहायक अध्यापक एल०टी० (गढ़वाल मण्डल) व 73 सहायक अध्यापक एल०टी० (कुमाऊं मण्डल) का स्वयं अथवा पति/पत्नी (यथालागू) की गम्भीर रोगग्रस्तता / विकलांगता, मानसिक रूप से विक्षिप्त एवं लाचार/दिव्यांग/बीमार बच्चों, विधवा/विधुर/तलाकशुदा/परित्यक्ता/आपदा प्रभावित एवं माता / पिता की गम्भीर बीमारी के आधार पर स्थानान्तरण का प्रस्ताव।
समिति की संस्तुति/निर्णयः- वर्तमान में स्थानान्तरण सत्र 2026-27 के अन्तर्गत स्थानान्तरण की कार्यवाही विभागों के स्तर पर गतिमान है। गम्भीर रोग, जिनका उल्लेख अधिनियम की धारा 3 (घ) में किया गया है, से ग्रसित कार्मिकों के स्थानान्तरण के प्रावधान अधिनियम में किये गये हैं। इस संबंध में उत्तराखण्ड लोक सेवाकों के लिए वार्षिक स्थानान्तरण अधिनियम, 2017 की धारा 3 (घ) में निहित प्रावधानों के आलोक में वर्तमान स्थानान्तरण सत्र, 2026-27 में प्रशासकीय विभाग / विभागों द्वारा प्रश्नगत प्रस्तावों पर अधिनियम की धारा 17 (1) (ख) के अनुसार अनुरोध के आधार पर स्थानान्तरण के संबंध में
कार्यवाही की जाय।
3-यह भी अवगत कराना है कि अधिनियम की धारा 17 (1) (ख) के अन्तर्गत (छः) एवं (सात) में दुर्गम से दुर्गम एवं सुगम से दुर्गम क्षेत्र में स्थानान्तरण हेतु अनुरोध का उल्लेख है। वर्तमान में विद्यालयी शिक्षा विभाग में मा० उच्च न्यायालय में योजित रिट याचिका संख्या-533/2025 में पारित निर्णय दिनांक 16.12.2025 के कारण सुगम / दुर्गम के आधार पर स्थानान्तरण किए जाने पर रोक लगायी गयी है। ऐसी स्थिति में समिति द्वारा की गयी संस्तुति के अनुसार उपरोक्त धारा 17 (1) (ख) (छः) एवं (सात) के अन्तर्गत प्राप्त आवेदन पत्रों (दुर्गम / सुगम आधारित स्थानान्तरणों) के आधार पर स्थानान्तरण किये जाने के संबंध में पुनर्विचार किये जाने हेतु प्रकरण कार्मिक एवं सतर्कता विभाग को संदर्भित किया गया है, जोकि वर्तमान में कार्मिक एवं सतर्कता विभाग के स्तर पर विचाराधीन है।
4-
अतः उपरोक्त के क्रम में कार्यालय महानिदेशक, विद्यालयी शिक्षा / निदेशक, माध्यमिक शिक्षा, उत्तराखण्ड के विभिन्न पत्रों द्वारा स्थानान्तरण अधिनियम, 2017 की धारा-27 के अन्तर्गत शासन के विचारार्थ स्थानान्तरण हेतु प्रेषित समस्त आवेदन पत्रों को मूल रूप में वापस करते हुए मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि उपरोक्तानुसार वर्णित स्थानान्तरण अधिनियम की धारा 27 के अन्तर्गत गठित समिति द्वारा प्रदत्त संस्तुति एवं मा० उच्च न्यायालय, नैनीताल के उपरोक्त सन्दर्भित निर्णय के आलोक में अभी स्थानान्तरण अधिनियम की धारा 17 (1) (ख) के अन्तर्गत (एक) से (पांच) में वर्णित आधारों के क्रम में प्राप्त समस्त आवेदनों तथा स्थानान्तरण अधिनियम की धारा-27 के अन्तर्गत गठित समिति द्वारा की गयी संस्तुति (प्रस्तर-2 में वर्णित) के अनुसार समिति के समक्ष प्रस्तुत स्थानान्तरण प्रस्तावों (सूची संलग्न) पर निर्धारित समयावधि के भीतर नियुक्ति प्राधिकारी के स्तर पर गठित स्थानान्तरण समितियों के माध्यम से नियमानुसार कार्यवाही करने का कष्ट करें। स्थानान्तरण अधिनियम की धारा 17 (1) (ख) के अन्तर्गत (छः) एवं (सात) में वर्णित आधारों के क्रम में प्राप्त आवेदनों के संबंध में कार्मिक एवं सतर्कता विभाग से अपेक्षित परामर्श प्राप्त होने के उपरान्त उक्त आवेदनों पर कार्यवाही किये जाने के संबंध में पृथक से आदेश निर्गत किये जायेंगे।
संलग्नक-यथोक्त ।
Digitally signed by
RAVINATH RAMAN
Date: 24-06-2026
11:29:13
भवदीय,
(रविनाथ रामन)
सचिव ।




