पीएम मोदी ने दिल्ली-दून एक्सप्रेसवे के जरिये साधे कई मोर्चे
मंच पर झलकी पीएम व सीएम की जुगलबंदी
अविकल थपलियाल
देहरादून। पीएम मोदी ने अंबेडकर जयंती पर दिल्ली-दून एक्सप्रेसवे का लोकार्पण कर उत्तराखण्ड-उत्तर प्रदेश व दिल्ली के अलावा समूचे देश को राजनीतिक सन्देश देकर कई मोर्चे साधे।
यूपी और उत्तराखंड से गुजरने वाले इस आर्थिक गलियारे के कई फायदे भी गिना कर कई चुनावी समीकरण भी जोड़े।
उत्तराखण्ड से रूबरू हुए पीएम मोदी ने इस 12 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट को पर्यटन व आर्थिकी से जोड़ते हुए जनता को नया सन्देश दिया।
पीएम मोदी के अंदाज कुछ बदले बदले से लगे। 12 किमी रोड शो के जरिये उत्तराखण्ड में चुनावी शंखनाद तो किया ही।
साथ ही तीसरा दशक उत्तराखण्ड की बात को दोहराते हुए सवा दो लाख करोड़ की जारी विकास योजनाओं की भी जनता को याद दिला दी। मतलब साफ था कि एक बार फिर भाजपा सरकार।

चूंकि, उत्तराखण्ड में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। लिहाज़ा, उम्मीद यह जताई जा रही थी कि पीएम मोदी विपक्ष को भी आड़े हाथ लेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पीएम मोदी ने 30 मिनट के भाषण को सिर्फ और सिर्फ विकास आधारित मुद्दों पर ही केंद्रित रखा।
उन्होंने कहा कि, 2014 से पहले की सरकार कुल 2 लाख करोड़ के विकास कार्य कर रही थी। लेकिन अब 12 लाख करोड़ की विकास योजनाएं चल रही है।
इकोनॉमिक कॉरिडोर को उम्मीदों को डोर बताते हुए उत्तराखण्ड की सभी देवी देवताओं को प्रणाम करना नहीं भूले।
डॉट काली देवी में पूजा अर्चना से शुरू किए गए चुनावी अभियान की झलक 12 किमी के रोड शो में नजर आयी। इस सफल रोड शो का अपने भाषण में जिक्र कर देर से आने के लिए माफी भी मांगी। और हमेशा की तरह पहाड़ी बोली से अपने संबोधन की शुरुआत की।
गढ़ी कैंट के महिंद्रा मैदान में उमड़ी भीड़ सीएम धामी के नंबर बढ़ा गयी। बीते महीने हरिद्वार में अमित शाह की रैली में कई कुर्सियां खाली रह गयी थी। लेकिन दून में पर्याप्त संख्या में जनता मौजूद रही।

मोदी ने उत्तराखण्ड के धार्मिक महत्व व शीतकालीन यात्रा में बढ़ रहे श्रद्धालुओं की संख्या गिनाते हुए रोजगार की संभावनाओं को भी रेखांकित किया। वीर जसवंत सिंह का स्मरण व वन रैंक वन पेंशन का जिक्र कर फौजी मतदाताओं को लुभाने की कोशिश की।
हालांकि, उत्तराखण्ड को उम्मीद थी कि चार साल के बाद सेना के अग्निवीरों के अधिकाधिक समायोजन पर भी पीएम विशेष घोषणा करेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
पीएम मोदी ने चुनाव में आधी आबादी के महत्व को बूझते हुए संसद में प्रस्तावित नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन की भी अपील की। केंद्र सरकार के महिलाओं को दिए जाने वाले 50 प्रतिशत आरक्षण से संबंधित बिल के लिए विपक्षी दलों से भी सहयोग मांगा।
मोदी ने दून रैली के जरिये महिला आरक्षण पर भी सहमति बनाने की अपील कर वोटरों को रिझाने की कोशिश की। लेकिन पीएम मोदी सरकारी कार्यक्रम में विपक्ष पर सीधा हमला करने से बचे। उन्होंने कांग्रेस पर कोई हमला नहीं किया। राजनीतिक हलकों में इसके भी कई मायने निकाले जा रहे हैं। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस भी राजनीतिक हमला नहीं होने से राहत में नजर आ रही है। हालांकि,भविष्य में होने वाली चुनावी रैलियों में पीएम मोदी के आक्रामक रुख की भी उम्मीद जताई जा रही है।
उत्तराखण्ड से नयी ऊर्जा व प्रेरणा लेकर लौटे पीएम मोदी व सीएम पुष्कर सिंह धामी को लोकप्रिय व कर्मठ करार देकर चुनाव में जुटने का संकेत दे गए। दिल्ली-दून एक्सप्रेसवे के लोकार्पण समारोह में यूपी व दिल्ली के सीएम वर्चुअल जुड़े रहे।

दिल्ली-यूपी व उत्तराखण्ड की जनता को आर्थिक कॉरिडोर की सौगात देकर भाजपा ने इन तीन राज्यों के अलावा देश को भी देवभूमि आगमन का न्योता दे डाला।
पीएम मोदी के चुनावी बिगुल के बाद सीएम धामी की टीम पर जीत की हैट्रिक बनाने का नैतिक दबाव भी बढ़ गया है। 14 अप्रैल को चुनावी शोर का ग्राफ बढ़ते ही कांग्रेसी समेत अन्य राजनीतिक ताकतें भी भाजपा का तोड़ निकालने में तेजी से जुट गई है।
मंच पर पीएम व सीएम धामी की गम्भीर जुगलबंदी भी पार्टी के अंदर हलचल मचा गयी।
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