दर्जनों ग्रामीण अस्पतालों में भर्ती, कई की हालत गंभीर
पेयजल लाइन में मिला सीवर का पानी, दूषित पानी से बीमारी का कहर
अविकल उत्तराखण्ड
नैनीताल। नैनीताल जिले के ज्योलिकोट क्षेत्र में कथित तौर पर दूषित पेयजल की वजह से ग्रामीणों के बीमार होने का मामला गंभीर होता जा रहा है।
पीलिया से 16 वर्षीय रितेश जीना व 25 साल की नीमा जोशी की मृत्यु हुई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले करीब दो माह से पेयजल लाइन में सीवर का पानी मिलकर आ रहा है। इसके बाद क्षेत्र में उल्टी-दस्त, पेट संबंधी संक्रमण और पीलिया जैसी शिकायतें सामने आईं। ग्रामीणों के मुताबिक अब तक दो लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग विभिन्न अस्पतालों में उपचार करा रहे हैं। इनमें कुछ मरीजों के आईसीयू में भर्ती होने की भी बात सामने आई है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई परिवार ऐसे हैं, जहां एक से अधिक लोग बीमार हैं। आर्थिक या अन्य कारणों से अस्पताल नहीं पहुंच पाने वाले कई मरीज घरों में ही उपचार कराने को मजबूर हैं। स्थानीय स्तर पर कराए जा रहे जांचों में भी कई लोगों में लीवर संक्रमण और अन्य गंभीर समस्याएं सामने आने का दावा किया जा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, करीब दो माह पहले जब क्षेत्र में उल्टी-दस्त और पेट संबंधी बीमारियों के मामले सामने आने लगे थे, तभी जल संस्थान के अधिकारियों को पेयजल में सीवर का पानी मिलने की शिकायत कर दी गई थी। इसके बावजूद समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं होने का आरोप है। अब मामला गंभीर रूप लेने के बाद स्वास्थ्य विभाग और अन्य अधिकारी ज्योलिकोट पहुंचकर स्थिति का जायजा ले रहे हैं।

दूषित पानी की लाइन बंद, तीन दिन से पेयजल संकट
ज्योलिकोट के ग्राम प्रधान नवल आर्या के मुताबिक गांव में पिछले पांच दिन से बिजली आपूर्ति बाधित है। वहीं दूषित पानी की आशंका के चलते संबंधित पेयजल लाइन बंद कर दी गई है, जिससे ग्रामीणों के सामने पेयजल का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने बताया कि बारिश के कारण वैकल्पिक पेयजल लाइनों को भी नुकसान पहुंचा है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव की व्यवस्था संभालने वाले लाइनमैन के भी बीमार होने से समस्या और बढ़ गई है।
सीवर टैंक से पेयजल लाइन तक पहुंच रहा गंदा पानी?

ग्रामीणों ने पेयजल व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि ऊंचाई पर बने सीवर टैंक से रिसाव के कारण दूषित पानी नीचे स्थित पेयजल लाइनों तक पहुंच रहा है। स्थानीय लोगों द्वारा साझा की गई जानकारी और मौके की स्थिति की जांच किए जाने की मांग की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पेयजल स्रोत और सीवर व्यवस्था के बीच रिसाव की समस्या है तो जब तक उसका स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
गांव के लोगों के स्वास्थ्य परीक्षण की मांग
ग्रामीणों की मांग है कि ज्योलिकोट में स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीम भेजकर प्रत्येक परिवार के सदस्यों की स्वास्थ्य जांच कराई जाए। विशेष रूप से लीवर संक्रमण, पीलिया, पेट के संक्रमण और दूषित पानी से होने वाली अन्य बीमारियों की जांच के लिए व्यापक स्वास्थ्य शिविर लगाया जाए।
ग्रामीणों के अनुसार, चंदन डायग्नोस्टिक सेंटर में काम करने वाली गांव की एक युवती ने बड़ी संख्या में ग्रामीणों के स्वास्थ्य परीक्षण में सहयोग किया। बाद में उसके भी गंभीर रूप से बीमार होने और आईसीयू में भर्ती होने की जानकारी सामने आई है। इस घटना ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है।
पिछले साल से बीमारी के लक्षण होने का दावा
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले वर्ष भी ज्योलिकोट में कई लोगों को उल्टी, भूख न लगने और पेट संबंधी परेशानियों की शिकायत थी। उस दौरान पानी के स्वाद में बदलाव महसूस होने की बात भी ग्रामीणों ने कही। कुछ लोगों ने तब से एहतियात के तौर पर पानी उबालकर पीना शुरू कर दिया था। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि पेयजल में वास्तव में लंबे समय से प्रदूषण था, तो इसकी समय रहते जांच और रोकथाम क्यों नहीं की गई।
स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए नैनीताल की मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने अब स्वास्थ्य विभाग को सक्रिय किया है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के माध्यम से ग्रामीणों को आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही गई है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि स्थिति को देखते हुए केवल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। उनका कहना है कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम, आवश्यक जांच, दवाइयां और जरूरत पड़ने पर मरीजों को उच्च चिकित्सा केंद्रों में भेजने की तत्काल व्यवस्था की जानी चाहिए।
निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च उठाना पड़ रहा
ग्रामीणों का कहना है कि गंभीर रूप से बीमार मरीजों को निजी अस्पतालों में उपचार कराना पड़ रहा है। इससे प्रभावित परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि दूषित पेयजल से बीमारी फैलने की स्थिति में प्रभावित लोगों के इलाज का खर्च सरकार वहन करे।
आयुष्मान कार्ड को लेकर भी सवाल
ग्रामीणों ने पेट और संक्रमण से जुड़ी बीमारियों के इलाज में आयुष्मान योजना के लाभ को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कई मरीजों को निजी अस्पतालों में उपचार कराना पड़ रहा है और उपचार का पूरा खर्च वहन करना उनके लिए मुश्किल हो रहा है। ऐसे में सरकार को विशेष परिस्थिति मानते हुए प्रभावित ग्रामीणों के उपचार की निशुल्क व्यवस्था करनी चाहिए।
जांच के बाद ही सामने आएगी बीमारी की वास्तविक वजह
ज्योलिकोट में बीमारी का वास्तविक कारण क्या है, यह स्पष्ट करने के लिए पेयजल और सीवर व्यवस्था के वैज्ञानिक परीक्षण के साथ ही मरीजों की चिकित्सकीय जांच जरूरी है। पेयजल के नमूने लेकर उनकी प्रयोगशाला जांच, सीवर लाइन और टैंकों की तकनीकी जांच तथा मरीजों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का विश्लेषण कराया जाना चाहिए। इसके बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बीमारी का कारण दूषित पेयजल है या कोई अन्य संक्रमण।
ग्रामीणों का सवाल—समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

मामले ने जल संस्थान और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि दो माह पहले ही पेयजल में सीवर का पानी मिलने की शिकायत कर दी गई थी, तो तत्काल पानी के नमूने लेकर जांच क्यों नहीं कराई गई? दूषित पानी की आशंका होने पर वैकल्पिक सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था क्यों नहीं की गई? ग्रामीणों की मांग है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए।



