हाईकोर्ट में दायर याचिका पर दस अगस्त को होगी सुनवाई
करोड़ों के निर्माण कार्य की खराब गुणवत्ता की सीबीआई जांच के साथ उठाये कई सवाल
राज्य सरकार तीन इंजीनियरों व निर्माण कंपनी को कर चुकी है ब्लैक लिस्ट
अविकल थपलियाल
देहरादून। सोलह करोड़ के नंदा की चौकी पुल की क्षतिग्रस्त एप्रोच रोड और मालदेवता (द्वारा गांव) से सौंग बांध तक सड़क निर्माण में कथित खराब गुणवत्ता और सड़क के एक बड़े हिस्से के धंसने का मामला अब हाईकोर्ट तक पहुंच गया है।
इन दोनों चर्चित मामलों में नैनीताल हाईकोर्ट में दायर याचिका पर आज 10 अगस्त ,सोमवार को सुनवाई होगी।
डॉ बैजनाथ की ओर से दायर याचिका में सीबीआई जांच की मांग के साथ कई सवाल उठाए गए हैं।
गौरतलब है कि प्रदेश शासन ने इस प्रकरण में तीन इंजीनियरों को निलंबित करने के साथ निर्माण कंपनी हिमालयन कंस्ट्रक्शन को ब्लैक लिस्ट कर दिया है। इस निर्माण कंपनी में भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष रुचि भट्ट की भी हिस्सेदारी है।
नंदा की चौकी पुल की सीबीआई जांच की मांग
याचिका में नंदा की चौकी पुल से संबंधित योजना, डिजाइन, निर्माण, निगरानी, निरीक्षण, गुणवत्ता नियंत्रण, प्रमाणन और पुनर्निर्माण से जुड़े सभी रिकॉर्ड न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कराने की मांग की गई है।
साथ ही पुल की विफलता के कारणों की जांच के लिए स्वतंत्र उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित करने का अनुरोध किया गया है।
समिति में अनुभवी पुल इंजीनियर, भू-तकनीकी विशेषज्ञ और जलविज्ञानी शामिल करने की मांग की गई है। याचिका में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जैसी सरकारी एजेंसी से उच्चस्तरीय जांच कराने का विकल्प भी रखा गया है।
डिजाइन से लेकर भुगतान तक जांच की मांग
याचिका में प्रस्तावित जांच के दायरे में कई महत्वपूर्ण बिंदु रखे गए हैं। इनमें—
डिजाइन की पर्याप्तता
हाइड्रोलॉजिकल आकलन
भू-तकनीकी जांच
निर्माण सामग्री और निर्माण गुणवत्ता
सामग्री की टेस्टिंग
गुणवत्ता आश्वासन
अधिकारियों की निगरानी
प्रमाणन प्रक्रिया
रखरखाव
थर्ड पार्टी रिपोर्ट
कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र
माइलस्टोन भुगतान जारी करने की सिफारिश
शामिल हैं।
याचिकाकर्ता ने मांग की है कि जांच में लापरवाही, चूक या कदाचार के लिए जिम्मेदार अधिकारियों, ठेकेदारों, कंसल्टेंट और संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी तय की जाए। दोषी पाए जाने वालों से कानून के अनुसार वित्तीय नुकसान की वसूली की जाए और जरूरत पड़ने पर उनके खिलाफ सिविल, विभागीय अथवा आपराधिक कार्रवाई शुरू की जाए।
राज्य के अन्य पुलों का भी स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने की मांग
याचिका में राज्य के राष्ट्रीय राजमार्गों पर समान परिस्थितियों में स्थित अन्य पुलों का समय-समय पर स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट कराने की मांग भी की गई है। साथ ही ऑडिट रिपोर्ट को कानून द्वारा प्रतिबंधित जानकारी को छोड़कर सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है।
दस्तावेज में सड़क और पुल निर्माण से जुड़े मामलों में MoRTH के मानकों तथा भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के प्रासंगिक कोड का पालन सुनिश्चित करने की बात भी कही गई है। याचिका में न्यायालय से मामले में उचित आदेश पारित करने और परिस्थितियों के अनुसार अन्य आवश्यक राहत प्रदान करने का अनुरोध किया गया है।
दायर जनहित याचिका में सड़क निर्माण से जुड़े अभिलेख सार्वजनिक करने के साथ ही स्वतंत्र उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित कर जांच कराने की मांग की गई है। याचिका में निर्माण कार्य से जुड़े अधिकारियों, ठेकेदारों, सलाहकारों और अन्य एजेंसियों की भूमिका की जांच कर जिम्मेदारी तय करने तथा दोषी पाए जाने पर वित्तीय नुकसान की वसूली और आवश्यक सिविल, विभागीय अथवा आपराधिक कार्रवाई की मांग की गई है।
52 करोड़ के अनुबंध का उल्लेख
याचिका में कहा गया है कि संबंधित परियोजना के तहत मालदेवता (द्वारा) ब्रिज और एप्रोच रोड का निर्माण सौंग बांध पेयजल परियोजना के लिए किया गया। इसके लिए करीब 52 करोड़ रुपये का अनुबंध बताया गया है। इसमें 44.74 करोड़ रुपये की परियोजना लागत के अलावा जीएसटी आदि शामिल हैं। दस्तावेज के अनुसार यह अनुबंध उत्तराखंड पेयजल निर्माण निगम (UPNN) और उत्तराखंड प्रोजेक्ट डेवलपमेंट एंड कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (UPDCC) की ओर से 9 जुलाई 2024 को दिया गया था।
याचिका में एक सहयोगी संस्था दून एसोसिएट्स का भी उल्लेख किया गया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि राजनीतिक कार्यकर्ता और भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष रुचि भट्ट का परिवार दून एसोसिएट्स में गर्ग परिवार के साथ शेयरधारक है और गर्ग परिवार को हिमालयन कंस्ट्रक्शन में साझेदार के रूप में भी दर्शाया गया है। ये आरोप याचिका में लगाए गए हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि इस दस्तावेज से नहीं होती।
2025 में काम पूरा होने के बाद सड़क धंसी
याचिका में 29 जुलाई 2026 की एक प्रेस रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि वर्ष 2025 में निर्माण पूरा होने के बावजूद इस साल के पहले मानसून में ही सड़क का बड़ा हिस्सा धंस गया और कई स्थानों पर सिंकहोल बन गए।
मालदेवता से सौंग बांध तक का यह मार्ग देहरादून के शहरी क्षेत्र को करीब 10 से 12 ग्राम पंचायतों वाले ग्रामीण क्षेत्र से जोड़ता है।
याचिका के मुताबिक मार्ग बंद होने से स्कूली बच्चों, किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को रोजाना देहरादून शहर आने-जाने में परेशानी हो रही है।
वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बाधित होने से ग्रामीणों में तनाव की स्थिति बनी। दस्तावेज में कुछ स्थानों पर स्थानीय धरना-प्रदर्शन और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अधिकारियों के समक्ष तत्काल सड़क मरम्मत की मांग किए जाने का भी उल्लेख है।

याचिका में दून एसोसिएट्स, रुचि भट्ट, गर्ग परिवार और हिमालयन कंस्ट्रक्शन से संबंधित बातें दस्तावेज में याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप/दावे हैं। इस खबर में आरोप के रूप में प्रस्तुत किया गया है। जब तक स्वतंत्र दस्तावेज या संबंधित पक्ष का पक्ष उपलब्ध न हो।
इस मुद्दे पर विपक्षी दल व कई संगठन लगातार विरोध प्रदर्शन कर स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग भी कर रहे हैं।

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