जब मीना कुमारी ने कहा- ‘तुम पहले शख्स हो, जिसमें मुझे खुदा दिखता है’
एक रात मीना कुमारी सावन कुमार टाक को अपने बेडरूम में ले गई। अगली सुबह जब सावन कुमार टाक मीना कुमारी के कमरे से बाहर आए तो खुर्शीद आपा ने शरारती लहज़े में उनसे पूछा,”सही से नींद आई तुम्हें?” ये कहानी बहुत अनोखी है मित्रों। चलिए, शुरू से जानते हैं।
सावन कुमार टाक 22-23 साल के थे जब उन्होंने ‘गोमती के किनारे’ की स्टोरी लिखी थी। सावन कुमार के एक दोस्त थे जिनका नाम था बी.एन. शर्मा। वो फ़िल्ममेकर थे। उन्होंने सावन कुमार टाक से कहा कि इस रोल के साथ अगर कोई न्याय कर सकता है तो वो सिर्फ़ और सिर्फ़ मीना कुमारी हैं। लेकिन मीना कुमारी बहुत बड़ी स्टार हैं। पता नहीं वो फ़िल्म में काम करेंगी कि नहीं?
सावन कुमार ने हिम्मत करके एक दिन मीना कुमारी के घर फोन कर दिया। फोन उठाया मीना कुमारी की बहन खुर्शीद ने। सावन कुमार ने खुर्शीद से ही बताया कि वो मीनार कुमारी के साथ एक फ़िल्म बनाना चाहते हैं। उन्होंने ही नौनिहाल(1967) फ़िल्म भी प्रोड्यूस की थी। और उस फ़िल्म के लिए महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें अवॉर्ड भी दिया था।
खुर्शीद जी ने ये बातें मीना कुमारी को बताई। मीना कुमारी ने कहा कि इन्हें घर बुला लो। जब सावन कुमार टाक मीना कुमारी के घर पहुंचे तो उन्हें देखकर मीना जी बहुत हैरान हुई। सावन कुमार बहुत युवा थे। और इतना युवा लड़का उन्हें फिल्म ऑफ़र करने आया था। उन्हें कहानी सुना रहा था।
मीना कुमारी ने सावन कुमार टाक से कहा कि इस फ़िल्म में वो तभी काम करेंगी जब सावन कुमार खुद इस फ़िल्म का डायरेक्शन करें। मीना कुमारी ने ही फ़िल्म के हीरो के रोल के लिए समीर खान(फ़िरोज़ खान के छोटे भाई) का नाम सजेस्ट किया। और मीना जी ने ही मुमताज़ से भी इस फ़िल्म में काम करने की बात की। सावन कुमार ने टोकन मनी के तौर पर 101 रुपया मीना कुमारी को दिया।
आर.डी. बर्मन को संगीत का ज़िम्मा दिया गया। गीत मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे। फ़िल्म में एक गीत है जिसके बोल हैं ‘आज तो मेरी हंसी उड़ाई।’ ये गीत लता जी ने गाया था। ये इस फ़िल्म का सबसे पहला गीत था जो रिकॉर्ड किया गया था। सावन कुमार टाक ने बताया था कि छह महीने के भीतर ही उन्होंने आधी फ़िल्म कम्पीट कर ली थी। और रश फुटेज देखकर मीना कुमारी बहुत खुश भी थी। लेकिन तभी उनकी तबियत खराब हो गई।
फ़िल्म रुक गई। साल 1968 में सावन कुमार टाक ने ‘गोमती के किनारे’ फ़िल्म स्टार्ट की थी। लेकिन पूरी बनकर रिलीज़ हुई वो फ़िल्म साल 1972 में। यानि बहुत लेट रिलीज़ हुई थी वो फ़िल्म। लेकिन इतने वक्त में मीना कुमारी के प्रति सावन कुमार टाक के मन में फीलिंग्स आ चुकी थी।
सावन कुमार ने बताया था कि एक रात मीना कुमारी उन्हें अपने बैडरूम में ले गई। मीना कुमारी की इमेज वैसे तो ट्रैजेडी क्वीन की थी। लेकिन रियल लाइफ़ में वो बहुत मज़ाकिया थी। मीना जी ने उस रात सावन कुमार को ऐसी-ऐसी कहानियां सुनाई कि सावन हंसते-हंसते लोट-पोट हो गए। उसके बाद मीना कुमारी ने अपने बिस्तर पर गुलाब की पंखुड़ियां बिखेरी और सो गई। सावन कुमार नीचे कार्पेट पर बैठे रहे। फिर एक वक्त पर उन्हें भी नींद आ गई। वो मीना कुमारी के बेड के कोने से सिर टिकाकर ही सो गए।
अगली सुबह जब सावन कुमार टाक मीना कुमारी के कमरे से बाहर आए तो खुर्शीद आपा(सावन कुमार टाक मीना जी की बहन खुर्शीद को खुर्शीद आपा ही कहते थे।) ने शरारती लहज़े में उनसे पूछा,”सही से नींद आई तुम्हें?” सावन कुमार ने कहा था कि कोई भी उस सिचुएशन में गलत अंदाज़े ही लगाता। लेकिन कोई गलत बात नहीं हुई थी।
उसके बाद सावन कुमार ने रोज़ मीना कुमारी को फूल भिजवाना शुरू कर दिया। और उस ज़माने में वो तीन सौर रुपए रोज़ खर्च कर रहे थे मीना कुमारी को फूल भेजने पर। मीना कुमारी को जापानी इकेबाना स्टाइल में फूलों को सज़ाना बहुत पसंद था। फूलों की पंखुड़ियों को बिस्तर पर बिछाकर सोना उन्हें अच्छा लगता था।
मगर इस दौरान मीना कुमारी की तबियत लगातार बिगड़ती जा रही थी। उन्हें लिवर सिरोसिस बीमारी थी। कई बार उन्हें खून की उल्टियां होती थी। सावन कुमार अपने हाथों में उनकी उल्टी ले लेते थे, जब आस-पास डस्टबिन नहीं होता था। उनका चेहरा साफ़ करते थे। और उन्हें सुलाते भी थे। उनके परिवार के अन्य लोग तो जल्दी ही सो जाते थे।
सावन कुमार ने कहा था कि मीना कुमारी संग उनका रिश्ता आत्मीय हो गया था। वो रिश्ता रोमांस या से-क-स से भी ऊपर था। वो रुहानी इश्क था। सावन कुमार उस वक्त उम्र के 20वें पड़ाव पर थे। जबकी मीना कुमारी 30s में थी। लेकिन सावन कुमार को उस एज डिफ़रेंस से कोई परेशानी नहीं थी। उन्हें वो महसूस ही नहीं होता था। मीना कुमारी तब सावन कुमार की दुनिया थी।
बकौल सावन कुमार,”एक बार मीना कुमारी ने मुझसे कहा था कि तुम पहले बंदे हो जिसमें मुझे खुदा दिखता है। मैंने जो खून की उल्टियां की, वो तुमने अपने हाथों में ली। एक बार भी तुम्हारे चेहरे पर मुझे शिकन नहीं दिखी। और किसी ने मेरे लिए ये सब नहीं किया। ना तो मेरी बहनों ने, ना ही मेरे दोस्तों ने। और ना ही उन्होंने जो कहते थे कि वो मुझसे प्यार करते हैं। मेरी बैडशीट पर खून के निशान लग जाते थे तो उसे मैं खुद ही बदलती थी।”
सावन कुमार ने मीना कुमारी से उनके अफ़ेयर्स के बारे में भी बात की थी। मीना कुमारी ने उन्हें बताया था कि वो रिश्ते किताबों जैसे थे। जो किताब उन्हें अच्छी लगती थी, वो बार-बार पढ़ती थी। और जो अच्छी नहीं लगती थी, वो उठाकर रख देती थी। मीना जी ने तब सावन कुमार से ये भी कहा था कि तुम आखिरी किताब हो जिसे मैं पढ़ रही हूं।
सावन कुमार ने कहा था कि शायद मीना कुमारी जी ने खुद को बहुत अलग-थलग महसूस किया था। घर की स्टार उनकी बहन खुर्शीद हुआ करती थी। वो एक्ट्रेस भी थी। और कुछ समय के लिए उनका खूब नाम भी हुआ था। लेकिन जब बैजू बावरा हिट हो गई तो सिचुएशन बदल गई। और फिर उन्हें कभी पीछे मुड़कर देखने की ज़रूरत नहीं पड़ी।
मीना कुमारी ने कमाल अमरोही से शादी की। लेकिन दोनों के बीच कुछ विवाद हुआ और मीना जी ने उन्हें छोड़ दिया। लेकिन वो कभी कमाल अमरोही के खिलाफ़ नहीं बोली। वो हमेशा प्यार से कमाल अमरोही को चंदन कहकर ही पुकारा करती थी। जब वो बीमार पड़ी थी तो कमाल अमरोही, अशोक कुमार, धर्मेंद्र और राजेंद्र कुमार उन्हें देखने आया करते थे।
उसी इंटरव्यू में गोमती के किनारे फिल्म के बारे में फिर से बात करते हुए सावन कुमार टाक ने कहा था कि मीना जी की खराब सेहत की वजह से शूटिंग रोकनी पड़ गई थी। एक दिन सावन कुमार ने मीना कुमारी से बताया कि शूटिंग डिले होने की वजह से उनके पास पैसे लगभग खत्म हो गए हैं। मगर मीना कुमारी ने उनसे कहा कि फ़िक्र मत करो। कुछ इंतज़ाम हो जाएगा।
सावन कुमार को डेढ़ लाख रुपयों की ज़रूरत थी। पांच-छह दिन बाद मीना कुमारी ने उन्हें डेढ़ लाख रुपए देते हुए कहा,”मैं ये तुम्हें दान में नहीं दे रही हूं। जब तुम्हारे पास पैसे हों, मुझे लौटा देना।” बाद में सावन कुमार टाक को पता चला कि मीना कुमारी ने मुमताज़ को अपना बंगला बेचकर सावन कुमार टाक को पैसे दिए थे।
खराब सेहत के बावजूद मीना कुमारी सावन कुमार से इनसिस्ट करती थी कि शूटिंग करो। नहीं तो किसी दिन मैं चली ही जाऊंगी। मीना जी के काफ़ी कहने पर गोमती के किनारे फिल्म की शूटंग शुरू की गई। किसी तरह शूटिंग पूरी की गई। जिस दिन आखिरी शॉट लिया गया था, उस दिन सभी ने मीना जी के लिए तालियां बजाई थी।
शूटिंग के दौरान ही मीना कुमारी का जन्मदिन जब पड़ा था तो सावन कुमार टाक ने धूमधाम से उनका जन्मदिन मनाया था। जिस कार से मीना कुमारी आती थी उसे गेट पर रुकवा लिया गया। और सेट तक के रास्ते पर फूल बिखेरे गए। मीना कुमारी को पैदल उस रास्ते से ले जाया गया। मीना जी के लिए बढ़िया से केक का इंतज़ाम भी किया गया। उस दिन मीना जी ऐसे ब्लश कर रही थी जैसे कोई नौजवान लड़की करती है।
पाकीज़ा जब रिलीज़ हुई तो मीना कुमारी, सावन कुमार टाक व अन्य कुछ लोग रीगल सिनेमा गए थे फ़िल्म देखने। मगर मीना कुमारी की तबियत इतनी खराब थी कि वो बमुश्किल ही चल पा रही थी। सावन कुमार टाक ने जब उन्हें सहारा देने की कोशिश की तो उन्होंने मना कर दिया। ये कहकर कि वो चल सकती हैं। फिर कुछ ही दिन बाद वो फिर से हॉस्पिटलाइज़्ड हो गई। इस बार आखिरी दफ़ा।
अपने आखिरी दिनों में मीना कुमारी ने सावन कुमार टाक को अपने पास बुलवाया था। उन्होंने सावन कुमार टाक से बताया कि पहली बार उन्हें अपने घर की छत पर किसी से इश्क हुआ था। ज़िंदगी तब शुरू ही हुई थी। अब जब मैं इस दुनिया से जा रही हूं, तो मुझे फिर से इश्क मिला है। सावन, मुझसे दूर मत रहो।
सावन कुमार हमेशा मीना कुमारी के पास बैठा रहना चाहते थे उस दौरान। लेकिन डॉक्टर्स ने उन्हें अलाओ नहीं किया। सावन कुमार ने बताया था कि एक बार उन्होंने अपनी कार बेचकर मीना कुमारी के हॉस्पिटल का बिल चुकाया था। कुछ ही दिनों बाद उनकी डेथ हो गई थी। सावन कुमार ने मीना कुमारी के जनाज़े को कंधा भी दिया था।
साथियों सावन कुमार टाक जी ने ये बातें कुछ साल पहले फ़िल्मफ़ेयर मैगज़ीन को दिए एक इंटरव्यू में बताई थी। पत्रकार फ़रहाना फ़ारूक ने वो इंटरव्यू लिया था। आज सावन कुमार टाक की डेथ एनिवर्सरी है। चार साल पहले 25 अगस्त 2022 को सावन कुमार टाक का देहांत हुआ था। क़िस्सा टीवी उन्हें सादर श्रद्धांजलि अर्पित करता है। और मीना कुमारी जी को भी श्रद्धांजलि अर्पित करता है।
(Quissa Tv)



