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वन उत्पादों की श्रेणी में नहीं रहेंगी पिरूल की पत्तियां,शासनादेश जारी होगा

पिरूल (चीड़ की पत्तियों ) को वन उत्पादों की श्रेणी सेबाहर रखने पर शीघ्र ही शासनादेश किया जाएगा

अविकल उत्तराखण्ड

देहरादून। उत्तराखण्ड सरकार जल्द ही पिरूल (चीड़ की पत्तियां) को वन उत्पाद के दायरे से बाहर करेगी। इससे स्थानीय ग्रामीण बिना रोक टोक के पिरूल एकत्रित कर सकेंगे।

इस सम्बंध में मुख्य सचिव डॉ एस एस संधु ने मंगलवार को हुई बैठक में खास निर्देश दिए। बीते कुछ समय से उत्तराखण्ड में बहुतायत में मौजूद चीड़ की पत्तियों से कोयला व विद्युत उत्पादन बनाने की दिशा में कोशिशें चल रही है।

मुख्य सचिव ने कहा कि जल्द ही पिरूल को वन उत्पाद forest products) की श्रेणी से बाहर किया जाएगा और इस बाबत शासनादेश जारी किया जाएगा। इससे पिरुल एकत्र करने वाले लोगों को पिरुल एकत्र करने में सुविधा होगी।

उन्होंने पिरूल से विद्युत उत्पादन हेतु लगाए गए प्लांट्स का स्वयं दौरा करने की भी बात कही। कहा कि पिरूल से विद्युत उत्पादन को व्यवहारिक बनाए जाने के लिए और क्या सुधार किया जा सकता है और पॉलिसी में और क्या बदलाव किया जा सकता है, इस पर भी विचार किया जाए।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जंगलों को आग से बचाने के लिए पिरूल का निस्तारण आवश्यक है। उन्होंने पिरूल के निस्तारण के लिए उसके विभिन्न उपयोगों पर शोध किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पिरूल से ब्रिकेट्स बनाकर ईंधन के रूप में उपयोग की सम्भावनाएं तलाशी जाएं।

उन्होंने कहा कि प्रयोग के रूप में स्कूलों में मिड डे मील के लिए प्रयोग हो रहे रसोई गैस आदि के उपलब्ध न होने के समय इन बिकेट्स को ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे पिरूल का उपयोग हो सकेगा। इस रोजगार से जुड़े लोगों को एक बाजार भी मिलेगा। साथ ही, जंगलों को आग से बचाया जा सकेगा। उन्होंने पिरूल के निस्तारण के लिए अन्य राज्य क्या कर रहे हैं, इसका भी अध्ययन कराए जाने के निर्देश दिए।

सरकारी भवनों में सोलर प्लांट लगाए जाएं -मुख्य सचिव

इसके अलावा, मुख्य सचिव ने प्रदेश के सभी सरकारी कार्यालयों में सोलर प्लांट्स को लगाए जाने हेतु सम्बन्धित अधिकारियों के साथ बैठक की। मुख्य सचिव ने कहा कि सभी सरकारी भवनों एवं स्कूलों की छत पर सोलर प्लांट्स लगाए जाने हेतु शीघ्र कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि एक ओर सोलर एनर्जी पर्यावरण के अनुकूल है, वहीं दूसरी ओर यह विद्युत व्यय को बहुत कम करने में सक्षम है। इसे पूरे प्रदेश में जहां भी संभव हो, सरकारी भवनों में शुरू कराया जाना चाहिए।

इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव आनन्द वर्द्धन, सचिव अरविन्द सिंह ह्यांकि, बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम, विजय कुमार यादव, निदेशक उरेडा रंजना राजगुरू, सचिव वन, अधीक्षण अभियन्ता यूपीसीएल एन.एस. बिष्ट एवं पिरूल प्लांट संचालक महादेव सिंह सहित अन्य सम्बन्धित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

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