सैलजा को ना, कई एमएलए व नेता बने हरीश रावत के सारथी

जनसंवाद यात्रा में हरीश रावत ने किया पलटवार

अब हरदा की वेणुगोपाल व सैलजा से दिल्ली में होगी वार्ता

हरदा बोले, जमीन से आवाज आ रही, बदलाव..बदलाव

अविकल थपलियाल

देहरादून। कांग्रेस हाईकमान के इशारे के बाद प्रभारी कुमारी सैलजा ने पूर्व सीएम हरदा को कहा कि ‘धन्यवाद जनसंवाद’ यात्रा न करें। लेकिन पूर्व सीएम हरीश रावत ने ही नहीं बल्कि कई  विधायक और पूर्व विधायकों ने सैलजा के आक्रामक भाषा से लबरेज पत्र को नकारते हुए जसपुर से हल्द्वानी तक पूरे गाजे बाजे और चौड़ा होकर जनसंवाद यात्रा में हिस्सा लिया।
बीमारी से उठकर ‘धन्यवाद जनसंवाद’ यात्रा का आगाज करने वाले हरीश रावत ने हल्द्वानी में कहा कि जमीन से बदलाव-बदलाव की आवाज आ रही है। प्रदेश में परिवर्तन का जिक्र करते हुए हरदा ने कहा कि 2029 में राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनेंगे।
यही नहीं,सीबीआई, ईडी व कई अन्य ज्वलन्त मुद्दों पर भाजपा को कोसते हुए पार्टी को भी दो टूक सुना दिया।कहा कि, तराई के इलाके में बीते एक सप्ताह में कोई कार्यक्रम नहीं हुआ।

पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा कि उन्होंने बदलाव की शुरुआत कर दी है। अब जहां भी पार्टी को जरूरत होगी ,वे मौजूद रहेंगे।

सोमवार 5 अक्टूबर की सुबह 11.30 बजे जसपुर से चला काफिला रात में हल्द्वानी पहुंचा।हल्द्वानी में सभी नेताओं ने भाजपा को सत्ता से हटाने का संकल्प लेते हुए 80 साल के हरीश रावत के जनसंवाद को पूरा समर्थन दिया।
शुरुआत में लग रहा था कि 1 अक्टूबर के सैलजा के पत्र के बाद पार्टी के अन्य नेता जनसंवाद यात्रा से मुंह मोड़ लेंगे। और फिर हाईकमान पूर्व सीएम हरदा को ‘,करवट’ में लेने की कोशिश करेगा। लेकिन कांग्रेस  के चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह की सक्रिय व सतत मौजूदगी ने सारे समीकरण ही उलट पुलट कर रख दिये।
खुले वाहन में हरदा के साथ प्रीतम की मौजूदगी और नारेबाजी ने पूरा माहौल ही बदल दिया।

यही नही, कांग्रेस के विधायक मदन बिष्ट, तिलकराज बेहड़, आदेश चौहान, हरीश धामी, मनोज तिवारी,सुमित ह्रदयेश के अलावा पूर्व स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल, पूर्व विधायक हेमेश खरक्वाल, ललित फर्स्वाण, नारायण पाल, प्रेमानन्द महाजन ,मेयर प्रत्याशी ललित जोशी समेत सैकड़ों कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने हाईकमान समेत पार्टी के दूसरे गुटों को भी साफ संकेत दे दिया।

गौरतलब है कि सैलजा के नाराजगी भरे पत्र में हाईकमान व प्रदेश संगठन को बताए बिना समानांतर कार्यकम करने पर हरदा को नसीहत दी गयी थी। साथ ही चुनावी बेला में हरीश रावत के हालिया बयानों से उत्पन्न असहज स्थिति को भी प्रमुखता से रेखांकित किया गया था।
चार दिन पहले जारी हुए पत्र के बाद धन्यवाद जनसंवाद यात्रा को कांग्रेस के अंदर ही समर्थन मिलने की उम्मीद कम लग रही थी। लेकिन  कई विधायक व पूर्व विधायकों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते हुए कांग्रेस को जिताने का आह्वान किया।


हालांकि, कांग्रेस के एक गुट ने जनसंवाद यात्रा से दूरी बनाए रखी। लेकिन जसपुर से हल्द्वानी तक चले काफिले और तराई में मिले समर्थन के बाद हरीश रावत एक बार फिर निर्णायक भूमिका में नजर आने लगे हैं। सभी नेताओं ने हरदा की मुहिम का समर्थन किया। हरदा के विरोधी गुट के माने जाते रहे द्वाराहाट से विधायक मदन बिष्ट ने तो हल्द्वानी में हरदा की बढ़ती उम्र का हवाला देते हुए भाजपा के खिलाफ छेड़े गए अभियान की जमकर तारीफ की।


अब हरदा 7 व 8 अक्टूबर को दिल्ली में प्रभारी सैलजा व  महासचिव केसी वेणुगोपाल से अलग अलग मुलाकात करेंगे। प्रदेश संगठन से इतर कार्यक्रम करने पर हाईकमान हरीश रावत की दलील और पार्टी के अंदर मिले समर्थन को देखते हुए क्या कदम उठाता है,यह देखना अभी बाकी है…

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