निजी आयुष कालेजों में ‘अवैध प्रवेश’और ‘धांधली’ पर घमासान

आयुर्वेद विवि के कुलसचिव ने ‘खुलासा’ कर पद छोड़ने की जताई इच्छा, शासन को लिखा पत्र

नॉन-नीट (Non-NEET),नान-क्वालिफाइड अभ्यर्थियों के हुए प्रवेश ?

निजी आयुष कालेजों में हुए प्रवेश को अवैध बताया

‘सर्जन का काम फिजिशियन नहीं कर सकता’

अविकल थपलियाल

देहरादून। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय (UAU) एक बार फिर निजी आयुष कॉलेजों में बिना काउंसलिंग और तय मानकों के विपरीत हुए ‘अवैध प्रवेश’ (Non-Counselling Admissions) को लेकर विवादों के घेरे में आ गया है।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. शिव कुमार बरनवाल ने कार्मिक ब सतर्कता विभाग को भेजे एक विस्तृत पत्र भेजकर खुद को कुलसचिव पद के अतिरिक्त कार्यभार से मुक्त करने का अनुरोध किया है।

कुलसचिव ने निजी आयुष कॉलेजों द्वारा NCISM/CCIM और भारत सरकार के तय मानकों के विपरीत दिए गए वर्षवार कुल प्रवेश का लेखा जोखा भी शासन को भेजा है। कहा कि नियमों के विपरीत BAMS, BHMS और BUMS पाठ्यक्रमों में धड़ल्ले से प्रवेश दिए गए।

उन्होंने निजी कॉलेजों, विश्वविद्यालय के कर्मचारियों और शिक्षा माफिया की मिलीभगत से चल रहे गंभीर खेल का पर्दाफाश किया है।

उन्होंने लिखा कि इस विश्वविद्यालय में कुलसचिव पद हेतु सक्षम नहीं पा रहा हूँ। जहां सर्जरी की जरूरत है वहां सर्जन का काम फिजिशियन नहीं कर सकता। अतः कोई अनहोनी घटित हो उससे पूर्व ही अधोहस्ताक्षरी को कुलसचिव पद से मुक्त करने का कष्ट करें।

कुलसचिव ने लिखा कि
समर्पित अधिकारियों की कमी के चलते मैं इस कर्तव्य के निर्वहन में असहज महसूस कर रहा हूं। लोगों को गलत का संरक्षण देने का रुख है,जो मेरे द्वारा विश्वविद्यालय हित में किये जा रहे प्रयासों में बाधा उत्पन्न करता है। इस हेतु मानसिक रूप से चिंतित व शारीरिक समस्याओं से पीड़ित हूं। अतः उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलसचिव पद के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त करने का अनुरोध करता हूं व अपने कैरियर को प्रभावित नहीं करना चाहता।

कुलसचिव के लगभग एक महीने पहले लिखे गए विस्तृत पत्र के बाद शासन स्तर पर हलचल मची हुई है। अपने पत्र के समर्थन में कुलसचिव ने 100 से अधिक कागजात भी पत्र के साथ संलग्न किए हैं। अवैध प्रवेश की जारी विजिलेंस जांच पर भी नजरें टिकी हुई है।

सत्र 2018 से 2024 तक बिना काउंसलिंग सैकड़ों दाखिले

पत्र के अनुसार, सत्र 2018-19 से लेकर 2023-24 (और 2024 में भी) के दौरान निजी आयुष कॉलेजों द्वारा NCISM/CCIM और भारत सरकार के तय मानकों के विपरीत जाकर नॉन-नीट (Non-NEET),नान-क्वालिफाइड और बिना काउंसलिंग के छात्रों को BAMS, BHMS और BUMS पाठ्यक्रमों में धड़ल्ले से प्रवेश दिए गए।  कुलसचिव ने सतर्कता कार्मिक विभाग को भेजे पत्र में वर्षवार हुए दाखिले का भी ब्यौरा दिया है।

बैकडोर एंट्री से मेडिकल डिग्री बांटने का खेल

कुलसचिव ने पत्र में गंभीर आरोप लगाते हुए लिखा कि अयोग्य और नीट न निकाल पाने वाले छात्रों को ‘बैकडोर एंट्री’ से डिग्री देने का ठेका कुछ निजी संस्थाओं और उनके संरक्षकों ने ले रखा है। इससे जहां एक ओर योग्य और मेहनत से आए छात्रों के अधिकारों का हनन हो रहा है, वहीं समाज को भविष्य में बिना मानक वाले चिकित्सक मिलने का खतरा पैदा हो गया है।  

परीक्षा, मूल्यांकन और कॉपियों की जांच में भारी गड़बड़ी

पत्र में परीक्षा और मूल्यांकन प्रणाली पर भी बड़े सवाल उठाए गए हैं।ढाबे में परीक्षा उत्तर पुस्तिकाएं भरने की शिकायत: एक कॉलेज द्वारा परीक्षा के बाद ढाबे में कॉपियां भरवाए जाने की शिकायत मिलने पर सेंटर बदला गया।

   सीसीटीवी और मूल्यांकन में धांधली मूल्यांकन केंद्रों पर सीसीटीवी का न होना या खराब रखा गया।  और मूल परिसर से बाहर बिना उचित निगरानी के कॉपियां जंचवाई गयी।
सूचना का अधिकार (RTI): छात्रों द्वारा मांगी गई कॉपियों में गड़बड़ी सामने आई है, जिस पर राज्य सूचना आयुक्त ने भी कड़ी टिप्पणी की थी।  विवि के अधिकारियों पर भी निशाना साधा है।

कुलपति- प्रो.अरुण त्रिपाठी

नामांकन और एनरोलमेंट घोटाला

कई कॉलेजों में छात्रों का नियम विरुद्ध बैक डेट में नामांकन और बिना उचित मिलान के परीक्षा रोल नंबर जारी करने के आरोप भी लगाए।

काउंसलिंग सिस्टम में ढिलाई और ‘दलालों’ का बोलबाला

कुलसचिव ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय का अपना मजबूत काउंसलिंग सिस्टम (Software/System) विकसित नहीं किया गया, जिससे निजी संस्थाओं और बाहरी दलालों/शिक्षा माफिया को अवैध प्रवेश कराने और ब्लैकमेलिंग का मौका मिला। 

विरोध, तालाबंदी और आत्मदाह के प्रयास

प्रवेशित छात्र परीक्षाओं में बैठने, परिणाम घोषित करने और डिग्री जारी करने की मांग को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं। परिसर में पानी की टंकी पर चढ़ने, पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह का प्रयास करने और कुलपति व अधिकारियों को ब्लैकमेल व प्रताड़ित करने जैसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं।  

शासन से पदमुक्त करने की गुहार

कुलसचिव डॉ. शिव कुमार बरनवाल ने पत्र में स्पष्ट किया है कि ऐसी विरोधाभासी और दबाव वाली परिस्थितियों में निष्पक्ष रूप से काम करना कठिन हो रहा है। उन्होंने कहा कि वे खुद को किसी भी घोटाले या अवैध कृत्य में शामिल नहीं होने देना चाहते, इसलिए उन्हें तुरंत कुलसचिव के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया जाए।

सेवा में,
सचिव,
कार्मिक एवं सतर्कता विभाग, उत्तराखण्ड शासन, देहरादून।
विषय :- Non-Counselling/ अवैध रूप से प्रवेशित छात्रों (सत्र 2018-19, 2019-20, 2020-21, 2021-22 एवं 2022-23 बैच तक) के नियमितीकरण करते हुए उनकी परीक्षा कराने, परीक्षा परिणाम घोषित करने, इनको BAMS, BHMS, BUMS उपाधि प्रदान करने में उपलब्ध मानकों के विपरीत/विसंगति के दृष्टिगत अधोहस्ताक्षरी को कुलसचिव पद के अतिरिक्त कार्यभार से हटाने के अनुरोध के संबंध में।
महोदय,
उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय BAMS, BHMS, BUMS, MD/MS (Ay.), Ph.D. BNYS पाठ्यक्रम संचालित करता है। जिसमें 03 विश्वविद्यालय परिसरों एवं 19 निजी संस्थान / कालेज सहित कुल 22 परिसर / संस्थान संचालित हैं। उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय से सम्बद्ध कतिपय निजी कालेजों द्वारा उपरोक्तानुसार वर्ष 2018 से लेकर वर्ष 2023 तक CCIM/NCISM. भारत सरकार द्वारा निर्धारित मानकों के विपरीत Non-NEET, Not NEET qualified व NEET qualified आदि छात्रों के बिना विधिवत काउन्सिलिंग के प्रवेश दिये गये हैं। जिसे उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कार्मिकों से मिलीभगत कर व मा० उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेशो के तहत नामांकन जारी कर नियमितीकरण न कर तात्कालिक तौर पर परीक्षाओं में बैठाया गया। प्रयोगात्मक परीक्षायें कराई गई, परीक्षा परिणाम जारी किये गये व कुछ प्रकरणों में डिग्री भी दी जा चुकी है।
इस संबंध में अवगत कराना है कि मा० उच्च न्यायालय, मा० सर्वोच्च न्यायालय, मा० दिल्ली उच्च न्यायालय, NCISM से इस संबंध में पृथक-पृथक अंतरिम आदेश प्राप्त हैं। जिनका बिना प्रतिवाद किये उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय द्वारा अनुपालन किया गया है। इस संबंध में अवगत कराना है कि सभी Batches में स्थिति पृथक पृथक है। सामान्य प्रवेश प्रक्रिया द्वारा जो कालेजों को BAMS, BHMS, BUMS की सीटें नियमतः Allot होती हैं (Counselling के माध्यम से) उनकी नियमित परीक्षाये विश्वविद्यालय करा रहा है व उनके परिणाम भी नियमतः जारी किये जा रहे हैं। यह समस्या जिनके कारण छात्र वर्ष 2026 में 04 बार विश्वविद्यालय में तालाबंदी, मुख्य गेट बंद कराना, कर्मचारियों को काम न करने देना च स्वयं पर पेट्रोल छिड़क कर आग लगाने का प्रयास करना…
Backlog के असिस्टेंट प्रोफेसर के 20 पदों पर भर्ती हेतु अधियाचन उत्तराखण्ड लोक सेवा आयोग को प्रेषित किया जा चुका है।
परीक्षा समिति की 02 बैठकें, वित्त समिति की बैठक, अकादमिक परिषद, कार्य परिषद की बैठक, 03 परीक्षायें कराया जाना, परीक्षा परिणाम घोषित किये गये। बीएनवाईएस के एमएसआर व पाठ्यक्रम तैयार कर शासन को प्रेषित किया गया।
अनेकों मुकदमों में प्रभावी पैरवी करना, सूचना अपीलें सुनना, Verification/ Provisional Certificate जारी करना।
प्रतिनियुक्ति पर भर्ती हेतु विज्ञापन जारी करना, UKSSC के माध्यम से समूह ‘ग’ के समस्त रिक्त पदों को भरे जाने के प्रयास करना आदि।
विश्वविद्यालय हेतु अनेकों ई-निविदायें प्रकाशित किये जाने हेतु निरन्तर प्रयास करना।
उपरोक्त परिस्थितियों के दृष्टिगत वर्ष 2018 से 2023 बैच के नॉन काउन्सिलिंग अवैध प्रवेशित छात्रों द्वारा किये जा रहे धरना प्रदर्शन, आत्महत्या के प्रयासों से अधोहस्ताक्षरी का मन अत्यंत विचलित है। निश्चित रूप से कुछ कालेजों के लोभ व उनके संरक्षण में विश्वविद्यालय के कुछ कार्मिकों के कृत्य विश्वविद्यालय व सरकार की बदनामी किये जाने हेतु उत्तरदायी हैं. जिनके विरूद्ध आज तक विश्वविद्यालय स्तर से कुछ प्रभावी निर्णय / कार्य नहीं किया जा सका है। सतर्कता जांच लम्बित है। वर्ष 2018 के मामले में मा० उच्च न्यायालय द्वारा कडी टिप्पणी करते हुए प्रकरण को PIL में बदला जा चुका है। परन्तु भय यह है कि निर्णय लेने तक या निर्णय आने तक उत्तेजना में इन छात्रों द्वारा कभी भी कुछ अनहोनी घटना की जा सकती है। आज की तिथि में इन छात्रों को NCISM मानकों के विपरित जाकर किस प्रकार नियमित किया जा सकता है, जो कानूनन अवैध कृत्य होगा। एक तरफ कुंए व दूसरे तरफ खाई जैसी स्थिति है। यदि इनके परीक्षा परिणाम जारी किये जायें, परीक्षायें कराई जायें, अंतिम परिणाम जारी किये जायें तो वह भी उपरोक्त मानकों / आदेशों के विपरीत होगा। नियमित किया जाना विश्वविद्यालय स्तर पर एक घोटाले में शामिल होने जैसा कृत्य होगा। ऐसी विरोधाभासी स्थिति में अधोहस्ताक्षरी स्वयं को इस विश्वविद्यालय में कुलसचिव पद हेतु सक्षम नहीं पा रहा है। जहां सर्जरी की जरूरत है वहां सर्जन का काम फिजिशीयन नहीं कर सकता। अतः कोई अनहोनी घटित हो उससे पूर्व ही अधोहस्ताक्षरी को कुलसचिव पद से मुक्त करने का कष्ट करें। छात्र व विश्वविद्यालय हित में किसी सक्षम व्यक्ति को कुलसचिव पद पर तैनाती प्रदान करने का कष्ट करें। क्योंकि मैं कुलसचिव पद पर रहते हुए अपने कार्य से उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कार्यों में तत्परता से विभिन्न आवश्यकताओं के सबंध में / समस्याओं के निराकरण हेतु तीव्रता से निर्णय लिये जाने हेतु कार्मिकों की कमी, आहरण-वितरण की समस्या, उच्च स्तर से अनुमोदन की समस्या व स्वार्थपरता के बजाय सहयोगी व विश्वविद्यालय व छात्रहित में कार्य करने वाले समर्पित अधिकारियों की कमी के चलते मैं इस कर्तव्य के निर्वहन में असहज महसूस कर रहा हूं। लोगों को गलत का संरक्षण देने का रूख है जो मेरे द्वारा विश्वविद्यालय हित में किये जा रहे प्रयासों में बाधा उत्पन्न करता है। इस हेतु मानसिक रूप से चिंतित व शारीरिक समस्याओं से पीड़ित हूं। अतः उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलसचिव पद के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त करने का अनुरोध करता हूं व अपने कैरियर को प्रभावित नहीं करना चाहता।

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