थर्मल पावर प्रोजेक्ट से जुड़े अहम अभिलेख कैसे कांग्रेस की चौखट तक पहुंचे
पवन खेड़ा ने बताया,किसने मुहैया कराई अडानी पावर प्रोजेक्ट की पत्रावली
…तो अंदरूनी जंग में उलझी है उत्तराखण्ड की नौकरशाही
अविकल थपलियाल
देहरादून। कौन-कौन नौकरशाह कर रहे दस्तावेजों की लीकेज..यक्ष प्रश्न..
कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने उत्तराखंड की 1,320 मेगावाट ताप विद्युत परियोजना को लेकर सरकार पर कई आरोप लगाने के साथ अहम पावर फाइल लीकेज की सनसनीखेज बात भी कही।
गुरुवार को दिल्ली में हुई प्रेस वार्ता में पवन खेड़ा ने थर्मल पावर परियोजना से जुड़े कई दस्तावेज भी सार्वजनिक किए। साथ ही नौकरशाही के लीकेज का खुलासा कर सनसनी मचा दी।
उन्होंने कहा कि
आपको क्या लगता है कि यह कागज किसने दिए? फिर कहते हैं अफसरों ने ही दिए। कुछ अफसरों का ज़मीर जाग जाता है चुनाव से पहले। कुछ का जागा हुआ होता है लेकिन वो हिम्मत नहीं कर पाते।
पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए पवन खेड़ा कहते हैं कि इस मुद्दे पर सड़क पर जंग लड़कर चुनाव जीतेंगे। और सरकार बनाने।पर उदाहरण भी पेश करेंगे।
कांग्रेस ने प्रदेश सरकार की नौकरशाही से लीक हो रहे महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रेस कांफ्रेन्स में प्रमुखता से दिखाए।
पवन खेड़ा ने अडानी को दिए जा रहे इस थर्मल पावर प्रोजेक्ट को मुद्दा बनाकर नौकरशाही के छेदों की बात कहकर बहस को नया मोड़ भी दे दिया। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या भाजपा सरकार में नौकरशाही किसी बड़े गुटीय जंग में उलझी हुई है। और इस महाभारत की आंच धामी सरकार के आंगन तक पहुंच गयी है।

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा के प्रमुख आरोप
यूजेवीएनएल-THDC की परियोजना रद्द करने का आरोप
खेड़ा के अनुसार 1,320 मेगावाट की ताप विद्युत परियोजना को यूजेवीएनएल और THDC के संयुक्त उपक्रम के माध्यम से विकसित करने की योजना थी। जुलाई 2024 में केंद्र से इसके लिए सैद्धांतिक मंजूरी मिलने का दावा किया गया था।
16 जनवरी 2025 को सरकारी परियोजना खत्म करने का आरो
कांग्रेस का कहना है कि समयसीमा संबंधी चिंताओं का हवाला देकर इस PSU परियोजना को समाप्त कर दिया गया और इसके बाद बिजली खरीद के लिए नया रास्ता अपनाया गया।
86 में से 84 टेंडर शर्तें बदलने का आरोप
पवन खेड़ा ने दावा किया कि केंद्रीय बिजली मंत्रालय के मानक निविदा दस्तावेज की 86 में से 84 शर्तों में बदलाव किए गए। कांग्रेस ने इसे अदाणी पावर को लाभ पहुंचाने वाला बदलाव बताया।
पावर प्लांट उत्तराखंड से बाहर लगाने की अनुमति
उनके अनुसार नई निविदा में यह प्रावधान किया गया कि 1,320 मेगावाट का बिजली संयंत्र उत्तराखंड के बजाय देश में कहीं भी लगाया जा सकता है।
छत्तीसगढ़ से बिजली खरीदने का रास्ता खुलने का आरोप
कांग्रेस का आरोप है कि इस बदलाव से छत्तीसगढ़ के कोरबा स्थित अदाणी पावर के संयंत्र से उत्तराखंड को बिजली आपूर्ति का रास्ता बना।
1,000 किलोमीटर से अधिक ट्रांसमिशन लगाने का बोझ
खेड़ा ने आरोप लगाया कि दूसरे राज्य से बिजली लाने की लंबी दूरी की ट्रांसमिशन लागत का बोझ बोलीदाता के बजाय उत्तराखंड के सरकारी खजाने/बिजली उपभोक्ताओं पर डाला गया।
फिक्स्ड चार्ज की सीमा बढ़ाने का आरोप
कांग्रेस के अनुसार फिक्स्ड चार्ज सीलिंग को 70 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत किया गया।
बिजली न लेने पर भी भुगतान का आरोप
खेड़ा ने दावा किया कि समझौते के तहत उत्तराखंड को 25 वर्षों तक भुगतान करना पड़ सकता है, भले ही किसी अवधि में राज्य पूरी बिजली न खरीदे।
25 साल में करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये का बोझ
कांग्रेस ने अनुमान जताया कि 25 वर्ष के बिजली खरीद समझौते से राज्य के बिजली उपभोक्ताओं पर करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ पड़ सकता है।
₹5.746 प्रति यूनिट की दर का उल्लेख
खेड़ा ने कहा कि 25 अगस्त 2026 को राज्य मंत्रिमंडल ने 25 वर्ष के बिजली खरीद समझौते को मंजूरी दी, जिसमें ₹5.746 प्रति यूनिट की दर का प्रावधान है।
पूरी परियोजना पर सवाल
खेड़ा ने सवाल उठाया कि जब सरकारी कंपनियों के संयुक्त उपक्रम से परियोजना बनाई जा सकती थी तो उसे समाप्त कर निजी कंपनी से बिजली खरीदने का निर्णय क्यों लिया गया।
टेंडर की शर्तों में इतने बदलाव क्यों?
कांग्रेस ने सरकार से पूछा कि निविदा की 86 में से 84 शर्तों में बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी और क्या ये बदलाव किसी विशेष कंपनी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किए गए थे।
उत्तराखंड सरकार की ओर से प्रधान सचिव ऊर्जा डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि प्रक्रिया प्रतिस्पर्धी और नियम आधारित थी तथा निविदा में बदलाव संभावित बोलीदाताओं के सुझावों और नियामकीय प्रक्रिया के तहत किए गए। उनके अनुसार RFQ चरण में पांच कंपनियां
योग्य हुई थीं।
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बिजली खरीद प्रक्रिया में नियम, प्रतिस्पर्धा और नियामकीय स्वीकृति का पूरा पालन—प्रमुख सचिव ऊर्जा
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