मजदूरों के हक में की आवाज बुलंद
अविकल उत्तराखंड
देहरादून। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली और पेशावर विद्रोह के सिद्धांतों की स्मृति में हरिद्वार, श्रीनगर, देहरादून, रामनगर, पिथौरागढ़, ऊधम सिंह नगर, चमियाला सहित राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में नफरत की राजनीति, बुलडोज़र कार्रवाई और देशभर में मजदूरों के कथित शोषण के खिलाफ आवाज उठाई गई।
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि मजदूर आंदोलनों पर दमन किया जा रहा है और लोगों के कानूनी अधिकारों की अनदेखी कर बुलडोज़र कार्रवाई को बढ़ावा दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि धर्म के आधार पर निर्दोष लोगों को निशाना बनाना, सामाजिक समस्याओं को धार्मिक रंग देना और मोहल्लों को धर्म के आधार पर विभाजित करना असंवैधानिक है। इन मुद्दों के विरोध में विपक्षी दलों और जन संगठनों ने एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की।

देहरादून के दीन दयाल पार्क में आयोजित जनसभा में वीर चंद्र सिंह गढ़वाली को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। वक्ताओं ने उनके सिद्धांतों और पेशावर विद्रोह की भावना को याद करते हुए कहा कि वर्तमान में इन आदर्शों के विपरीत नफरत फैलाने और दमनकारी कार्रवाइयों का माहौल बनाया जा रहा है।
उन्होंने महंगाई, बेरोजगारी, गैस की किल्लत और नई श्रम संहिताओं को लेकर भी सरकार की आलोचना की। वक्ताओं का कहना था कि इन समस्याओं को लेकर नोएडा सहित देशभर में मजदूर आंदोलनरत हैं, लेकिन सरकार इनके समाधान के बजाय बड़े कॉर्पोरेट घरानों को संरक्षण देने में लगी है।
जनसभा में कांग्रेस के संजय शर्मा, देवेंद्र नौटियाल, मुशर्रफ अली, उत्तराखंड महिला मंच की कमला पंत और चंद्रकला, स्थायी राजधानी गैरसैंण संघर्ष समिति के विनोद राठौड़ी, चेतना आंदोलन के शंकर गोपाल, राजेंद्र शाह, सुनीता देवी, घनश्याम और प्रभु पंडित, अखिल भारतीय किसान सभा के प्रदेश सचिव गंगाधर नौटियाल, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के नरेश नौडियाल, सीपी शर्मा और कुलदीप मधवाल, उत्तराखंड इंसानियत मंच के हरी ओम पाली, उत्तराखंड लोकतांत्रिक मोर्चा के पीसी थपलियाल, पूर्व बार काउंसिल अध्यक्ष रज़िया बैग, तंजीम-ए-रहनुमा-ए-मिल्लत के लताफत हुसैन, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. जीतेन भारती, अस्मिता की दीपा कौशलम सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

