‘विज्ञान वाणी-88.8 एफएम’ बनी विज्ञान संचार की नई पहचान

यूकॉस्ट की महत्वाकांक्षी ‘विज्ञान सेतु’ पहल

रेडियो, पॉडकास्ट और डिजिटल मंचों के जरिए जन-जन तक पहुंचेगा विज्ञान और नवाचार का संदेश

अविकल उत्तराखंड

देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) की महत्वाकांक्षी ‘विज्ञान सेतु’ पहल विज्ञान को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बनकर उभर रही है। इसके तहत स्थापित सामुदायिक विज्ञान रेडियो स्टेशन ‘विज्ञान वाणी-88.8 एफएम’, ‘विज्ञान धारा’ स्टूडियो और ‘विज्ञान दृश्यम्’ पॉडकास्ट स्टूडियो विज्ञान संचार को नया आयाम दे रहे हैं। इन माध्यमों से विज्ञान, नवाचार और वैज्ञानिक सोच को सरल एवं रोचक भाषा में आम लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।

यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने कहा कि आज विज्ञान केवल प्रयोगशालाओं और शोध संस्थानों तक सीमित नहीं रह सकता। स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, पर्यावरण, आपदा प्रबंधन, जल संरक्षण और तकनीक जैसे जीवन के लगभग हर क्षेत्र में विज्ञान की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तार्किक सोच का विकास समय की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य को लेकर यूकॉस्ट ने ‘विज्ञान सेतु’ पहल की शुरुआत की है।

उन्होंने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी के इस दौर में जहां सूचनाएं तेजी से प्रसारित हो रही हैं, वहीं भ्रामक जानकारियां भी बड़ी चुनौती बनकर सामने आई हैं। विज्ञान संचार केवल जानकारी देने का माध्यम नहीं, बल्कि वैज्ञानिक तथ्यों और भ्रांतियों के बीच अंतर समझाने तथा प्रमाण आधारित सोच विकसित करने का महत्वपूर्ण उपकरण है। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि, जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन जैसे विषयों पर वैज्ञानिक जानकारी लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।
‘विज्ञान वाणी-88.8 एफएम’ उत्तराखण्ड का पहला सामुदायिक विज्ञान रेडियो स्टेशन है, जिसे भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से 88.8 मेगाहर्ट्ज की आवृत्ति प्राप्त हुई है। 13 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री प्रदीप बत्रा की उपस्थिति में इसके रेडियो स्टेशन और मोबाइल एप्लीकेशन का उद्घाटन किया था। मोबाइल एप के माध्यम से अब देश और विदेश में कहीं से भी इसके कार्यक्रमों को सुना जा सकता है।

रेडियो की व्यापक पहुंच को देखते हुए विज्ञान वाणी को पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से उपयोगी माना जा रहा है। यह साक्षर और निरक्षर, दोनों वर्गों तक समान रूप से पहुंच बनाता है तथा स्थानीय भाषा और संदर्भों में वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराता है। इसके माध्यम से वैज्ञानिकों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और विषय विशेषज्ञों के व्याख्यान, चर्चाएं और विज्ञान आधारित कार्यक्रम नियमित रूप से प्रसारित किए जा रहे हैं।

विज्ञान वाणी के प्रभारी अमित पोखरियाल ने बताया कि श्रोताओं के लिए ‘ऐसा क्यों होता है?’, ‘वैज्ञानिक से परिचय’, ‘भारतीय ज्ञान धारा’, ‘प्रकृति संवाद’, ‘विज्ञान काव्य’, ‘विशेषज्ञ से बातचीत’, ‘आइए, स्वयं करें प्रयोग’, ‘विज्ञान समाचार’, ‘विज्ञान पुस्तक चर्चा’ और ‘प्रेरणादायी महिला वैज्ञानिक’ जैसे कार्यक्रम तैयार किए गए हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य विज्ञान के प्रति जिज्ञासा पैदा करना और युवाओं में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना है।

विज्ञान सेतु पहल के अंतर्गत स्थापित ‘विज्ञान धारा’ स्टूडियो में विशेषज्ञ व्याख्यान, वेबिनार, प्रशिक्षण कार्यक्रम और कौशल विकास कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है। वहीं ‘विज्ञान दृश्यम्’ पॉडकास्ट स्टूडियो के माध्यम से वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और नवप्रवर्तकों के साथ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़े विषयों पर संवाद रिकॉर्ड कर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इनमें उत्तराखण्ड की वैज्ञानिक उपलब्धियों, पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता, स्टार्टअप, स्वास्थ्य और नवाचार जैसे विषयों को प्रमुखता दी जा रही है।

यूकॉस्ट की यह पहल विज्ञान को पुस्तकों और प्रयोगशालाओं से निकालकर जन-जन की भाषा और जीवन से जोड़ने का प्रयास है। ‘विज्ञान सेतु’ आने वाले समय में उत्तराखण्ड को विज्ञान आधारित ज्ञान समाज के रूप में विकसित करने और विज्ञान के लोकव्यापीकरण को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

‘विज्ञान वाणी-88.8 एफएम’ का मोबाइल एप गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए वाट्सएप नंबर 8679926955 तथा ई-मेल vigyaanradio@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।

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