डीएफओ ने अपने ही मंत्री पर साधा निशाना, पत्र लिख दिया जवाब

अवैध खनन समेत अन्य कई आरोप लगाए डीएफओ दीपक सिंह ने, सरकार में हड़कंप

मंत्री हरक ने कहा, अवैध खनन में लिप्त थे डीएफओ दीपक सिंह

अविकल उत्त्तराखण्ड

देहरादून। उत्त्तराखण्ड में अवैध खनन से जुड़ी कहानियां तेजी से पैर पसारती जा रही है। इस बार वन मंत्री हरक सिंह के विधानसभा कोटद्वार में खनन, राजनीतिक दबाव आदि मसलों को लेकर राजनीति गर्म है। शासन-सत्ता के गलियारों में डीएफओ दीपक सिंह के पत्र को लेकर गर्मागर्मी है।

वन मंत्री हरक सिंह

उधर, वन मंत्री हरक सिंह का कहना कि अवैध खनन में लिप्त होने के कारण डीएफओ दीपक सिंह को हटाया गया है।

कुछ दिन पूर्व लैंसडौन वन प्रभाग में खनन सम्बन्धी शिकायत मिलने पर वन मंत्री हरक सिंह के आदेश पर लैंसडौन वन प्रभाग से हटाये गए DFO दीपक सिंह के पत्र से कई सवाल उठ रहे हैं। दीपक सिंह ने स्वंय को हटाने सम्बन्धी कार्रवाई को गलत बताया। चुनावी बेला में पहले सीएम के पीआरओ नंदन सिंह बिष्ट के खनन में जुड़े वाहनों के चालान निरस्त करने पर राजनीतिक बवाल मचा था। और अब डीएफओ के पत्र से फिर अवैध खनन की गूंज तेज हो गई है।

कोटद्वार विधानसभा का प्रतिनिधित्व कर रहे वन मंत्री हरक सिंह का कहना है कि मामले की जांच चल रही है। लेकिन डीएफओ दीपक सिंह के 18 व 7 दिसंबर के दो पत्रों से साफ हो रहा है कि कोटद्वार के इलाके में खनन को लेकर उन पर राजनीतिक दबाव पड़ रहा था। (देखें दोनों मूल पत्र)।

डीएफओ दीपक सिंह ने अवैध खनन के खिलाफ की गई कार्रवाई का भी 7 दिसंबर के पत्र में पूरा लेखा जोखा दिया है। दीपक सिंह का कहना है कि लैंसडौन वन प्रभाग में पांच साल में पांच डीएफओ बदले गए।

दीपक सिंह ने कैम्पा की धनराशि, बैम्बू हट, लालढांग-चिल्लरखाल समेत अन्य योजनाओं पर गड़बड़ी की बात उठाते कहा कि वह इन मामलों में राजनीतिक दबाव में नहीं आये। लिहाजा, उनके हटाये जाने के पीछे अवैध खनन रोक नही पाने की खबरें प्रकाशित करवाई गई। इससे उनका मनोबल गिरा है। जबकि मुख्य वन संरक्षक पौड़ी की जांच रिपोर्ट में उनके द्वारा कोई भी शिथिलता नहीं बरते जाने के प्रमाण मिले हैं। इसके अलावा पत्र में कई अन्य आरोप लगाए हैं।

इस मुद्दे पर वन मंत्री हरक सिंह का कहना है कि मामले की जांच चल रही है। बहरहाल, कोटद्वार में जारी खनन को लेकर एक बार फिर सरकारी पत्रों के वॉयरल होने से भाजपा सरकार डिफेन्स में दिखाई दे रही है।

हाल ही में कोटद्वार मेडिकल कालेज के मुद्दे पर सुर्खियों में आये वन मंत्री हरक सिंह पर अपने ही महकमे के अधिकारी के पत्र में लगे आरोपों के बाद विपक्ष का हमला तेज होने के भी पूरे आसार हैं।

17 दिसंबर का डीएफओ को हटाने सम्बन्धी आदेश

डीएफओ दीपक सिंह का 18 दिसंबर को प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ) विनोद सिंघल को भेजे पत्र का मूल सार

सेवा में,

प्रमुख वन संरक्षक (HoFF).

उत्तराखण्ड, देहरादून। द्वारा:- उचित माध्यम

विषय : सन्दर्भ :

स्थानान्तरण / तैनाती आदेश के क्रम में मुख्यालय में सम्बद्ध किये जाने के सम्बन्ध में। उत्तराखण्ड शासन वन अनुभाग-1 के पत्र संख्या 2146/X-1-2021-14 (22) टी०सी०- 1 दिनांक 17-12-2021.

महोदय,

उपरोक्त विषयक के क्रम में अवगत कराना है कि उत्तराखण्ड शासन वन अनुभाग-1 के पत्र संख्या- 2146/X-1-2021-14 (22) टी०सी०-1 दिनांक 17-12-2021 द्वारा अधोहस्ताक्षरी लैन्सडौन वन प्रभाग, कोटद्वार के से अवमुक्त करते हुए अग्रिम आदेशों तक प्रमुख वन संरक्षक (HOFF) उत्तराखण्ड देहरादून के कार्यालय में सम्बद्ध किया गया है, उत्तराखण्ड शासन के उक्त आदेश में अघोहरताक्षरी को अपने कार्यभार से सम्बद्ध करने न तो कोई कारण उल्लेखित किया गया है और ना ही नियमानुसार कोई जॉच की प्रक्रिया पूर्ण की गयी है, परन्तु अधोहस्ताक्षरी से सम्बन्धित उक्त आदेश समाचार पत्रों में अवैध खनन का कारण बताया गया है एवं उसमें मुख्य वन संरक्षक (गढ़वाल), उत्तराखण्ड, देहरादून द्वारा जाँच कराये जाने की बात की गयी है। उक्त के कम में आपके संज्ञान में लाना है कि :

मुख्य वन संरक्षक (गढ़वाल) उत्तराखण्ड, पौड़ी द्वारा आपने पत्रांक-1186/21-5 दिनांक 07-12-2021 से यह उल्लेख किया गया था कि. वन प्रभाग के क्षेत्रीय नियंत्रण में शिथिलता बरती जा रही है व लापरवाही की जा रही है, जो वन सुरक्षा के दृष्टिकोण से कदाचित मान्य नहीं है, को उल्लेख करते हुए चार बिन्दुओं पर सूचना/आख्या 07 दिनों के अन्दर अधोहस्ताक्षरी से चाही गयी।

इस क्रम में अधोहस्ताक्षरी द्वारा अपने कार्यालय के पत्रांक-2215/21-5 दिनांक 11-12-2021 से स्पष्ट बिन्दुवार आख्या तैयार करते मुख्य वन संरक्षक (गढ़वाल) उत्तराखण्ड, पौड़ी को सम्बोधित एवं वन संरक्षक, शिवालिक वृत्त, उत्तराखण्ड, देहरादून को पृष्ठांकित करते हुये उनके कार्यालय के ई-मेल एवं डाक से प्रेषित की गयी है (संलग्नक-1 ) । तदोपरान्त इस सम्बन्ध में उच्च स्तर से अन्य कोई पत्राचार नहीं किया गया और ना ही कोई जॉच की गयी।

इस क्रम में यह भी उल्लेखनीय है कि अधोहस्ताक्षरी का नियंत्रक अधिकारी, वन संरक्षक, शिवालिक वृत्त, उत्तराखण्ड, देहरादून द्वारा अपने पत्रांक-1371/21-5 दिनांक 25-11-2021 से अवैध खनन सम्बन्धित विस्तृत जाँच रिपोर्ट मुख्य वन संरक्षक (गढ़वाल), उत्तराखण्ड, पौड़ी को प्रस्तुत की गयी। उक्त पत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर शिकायत के इस प्रकरण में ऐसा कोई तथ्य प्रकाशित नहीं हुआ है, जिससे प्रभागीय चनाधिकारी, लैन्सडौन वन प्रभाग, कोटद्वार की अवैध खनन में मिलीभगत या नियंत्रण में शिथिलता परिलक्षित होती हो।

सीमित संसाधनों के बावजूद प्रभागीय वनाधिकारी, लैन्सडौन वन प्रभाग, कोटद्वार द्वारा अवैध खनन को नियंत्रित करने का प्रभावी प्रयास किया गया है। आख्या के आधार पर शिकायत का निस्तारण करने की कृपा करें। अतः समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचार में उल्लेखीत कारण तथ्य से परे एवं राजनीतिक दबाव से ग्रसित है।

महादेय, लैन्सडौन वन प्रभाग अतिसंवेदनशील वन प्रभाग है एवं वर्तमान में मा० वन एवं पर्यावरण मंत्री का विधानसभा क्षेत्र अन्तर्गत आता है। इस तरीके के राजनीतिक मौहाल में प्रभागीय वनाधिकारी, लैन्सडौन वन प्रभाग, कोटद्वार के पद पर अत्यन्त ही राजनीतिक दबाव, धमकियां एवं निराधार आरोपों का सामना करना पड़ता है।

एकतरफा इस वन प्रभाग में क्षेत्रीय स्टॉफ की अत्यंत कमी एवं राजनीतिक रूप से जुड़े होने के कारण प्रभावी नियंत्रण किया जाना चुनौती पूर्ण रहा है। वर्तमान में वन आरक्षियों के 88 पदों के सापेक्ष 13 वन आरक्षी ही कार्यरत है, जो 15 प्रतिशत से भी न्यून है। इसके बावजूद अधोहस्ताक्षरी द्वारा हर सम्भव प्रयास किया गया कि किसी तरीके का अनौतिक, गैर कानूनी एवं अवैध कार्य न हो। जहां तक अवैध खनन की प्रश्न है, अधोहस्ताक्षरी द्वारा एस०ओ०जी० की मदद से (जो कि प्रभागीय वनाधिकारी प्रत्यक्ष नियंत्रण में है) प्रभावी कार्यवाही की गयी। विगत 3 माह में 55 ट्रैक्टर-ट्रॉली, 03 डम्पर, 02 जे०सी०बी० एवं 01 पॉकलैण्ड अवैध खनन में संलिप्त वाहनों को जब्त किया गया है।

प्रभाग अन्तर्गत सीमित संसाधन एवं न्यून फील्ड स्टॉफ होने के बावजूद भी इस प्रकार की कार्यवाही/प्रयास किया गया है। अतः स्थानान्तरण/ तैनाती आदेश के क्रम में मुख्यालय में सम्बद्ध किये जाने की यह कार्यवाही तथ्य से परे एवं राजनीतिक प्रतीत होता है। इस आदेश से एवं समाचार पत्रों में प्रकाशित सम्बन्धित

समाचार से अधोहस्ताक्षरी के मनोबल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है, इससे छवि भी धूमिल हुई है एवं अधोहस्ताक्षरी हतोत्साहित हुआ है।

1

महोदय, इस आदेश की पृष्ठ भूमि में जो कारण अधोहस्ताक्षरी को प्रतीत होता है, वह निम्नवत है: अधोहस्ताक्षरी द्वारा विगत 14 माह (अधोहस्ताक्षरी का इस वन प्रभाग में कार्यकाल में राजनीतिक दबाव के बावजूद नियमानुसार कार्य किया गया, जो कि सम्भवतः राजनीतिक प्रतिनिधियों को पसंद ना आया हो।

2 अधोहस्ताक्षरी द्वारा लालढांग-चिल्लरखाल वन मोटर में हो रहे अनियमितता को संज्ञान में लेते हुए कार्य को देना एवं सम्बन्धित का आरक्षी एवं वन दरोगा को मुख्यालय में अटैच कर देना एवं रेंज अधिकार अनियमितता पर स्पष्टीकरण मांगना एवं स्पष्टीकरण प्राप्त न होने पर सम्बंधित के कार्यभार से पृथक कर देना आदि कदम उठाये गये, इसके उपरान्त अधोहस्ताक्षरी को धमकी दिया गया एवं तत्काल प्रभाव से सम्बद्ध किये जाने की कार्यवाही की गयी।

कैम्पा योजना के अन्तर्गत रीवर रेजुवेशन से सम्बन्धित धनराशि रू० 251.31 लाख की धनराशि जा वर्तमान में वन जमा/ निक्षेप व्यय (डी०सी०एल०) में जमा है, को भुगतान हेतु राजनीतिक दबाव बनाये जाने उपरान्त भी अधोहस्ताक्षरी द्वारा वित्तीय नियमों को ध्यान में रखते हुए व्यय नहीं किया जाना। राजनीतिक लोगों द्वारा अवैध खनन के प्रयासों को विफल करना एवं ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त करने उपरान्त तुरन्त ही छोड़ने हेतु दबाव में न आना।

5 मुख्य वन संरक्षक (गढ़वाल), उत्तराखण्ड, पौड़ी के आदेशों के कम में कालागढ़ टाइगर रिजर्व प्रभाग, लैन्सडौन द्वारा सनेह पार्क एवं कॉर्बेट रिसेप्शन सेन्टर के समीप बैम्बू हट एवं पार्क में नियम विरुद्ध हो रहे कार्यों को राजनीतिक दबाव के बावजूद रुकवा देना व सम्बन्धित के खिलाफ एच0-2 केस दर्ज करना।

कुछ खास व्यक्तियों के उपनल के माध्यम से प्रभाग में सम्मिलित करने हेतु राजनीतिक दबाव बनाया जाना। अधोहस्ताक्षरी द्वारा नियमों को ध्यान में रखते हुए उपनल में समाहित न किया जाना। उपरोक्त कारणों का उल्लेख प्रमुख अखबारों एवं न्यूज पोर्टल पर भी प्रकाशित किया गया है.

(संलग्नक- 2 ) ।

उपरोक्त के क्रम में अवगत कराना है कि इस वन प्रभाग में पिछले पाँच वर्ष में अत्यधिक राजनीतिक हस्तक्षेप रहा है एवं पिछले पाँच वर्ष में 05 प्रभागीय वनाधिकारियों की स्थानान्तरण तैनाती की गयी एवं प्रत्येक प्रभागीय वनाधिकारियों को अत्यन्त ही राजनीतिक दबाव झेलना पड़ा है।

अधोहस्ताक्षरी को भी इसी क्रम में निराधार एवं तथ्य विहीन भूमिका बनाते हुए मुख्यालय सम्बद्ध करने का आदेश पारित किया जाना प्रतीत होता है।। यहां तक कि शासनादेश के अल्प अवधि बाद ही चार्ज हस्तान्तरण करने की धमकी एवं जार्च हस्तान्तरण न करने पर एकतरफा चार्ज हस्तान्तरण करने का प्रयास किया गया है। इन समस्त प्रकरणों से अधोहस्ताक्षरी को आत्मविश्वास पर गहरा प्रभाव पड़ा है एवं इस तरीके की कार्यवाही न्यायोचित नहीं है, इससे न केवल अधोहस्ताक्षरो का मनोबल टूटा है, बल्कि एक नव नियुक्त भारतीय वन सेवा के अधिकारी की छवि धूमिल हुई हैं।

अतः उपरोक्त वर्णित तथ्यों के कम में अनुरोध है कि अधोहस्ताक्षरी के इस सम्बद्ध के प्रकरण को सक्षम स्तर पर रखेंगे एवं इस आदेश को निरस्त करने हेतु आवश्यक कार्यवाही करेंगें, ताकि भविष्य में नव नियुक्त अधिकारियों को हथोसाहित न हो। साथ ही यह भी अनुरोध है कि इस प्रकार के प्रकरण की भविष्य में पुर्नरावृत्ति न हो इस हेतु प्रभावी कार्यवाही की जाये। संलग्न- उपरोक्तानुसार

भवद्रीय

(दीपकसिंह

प्रभागीय वनाधिकारी, लैन्सडौन वन प्रभाग, कोटद्वार।

7 दिसंबर 2021 को DFO दीपक सिंह ने खनन सम्बन्धी शिकायतों पर विभाग प्रमुख को लिखे पत्र का सार

सेवा में,

प्रमुख वन संरक्षक (HoFF).

उत्तराखण्ड, देहरादून। द्वारा:- उचित माध्यम

विषय: खनन सम्बन्धी शिकायतों पर विस्तृत रिपोर्ट

महोदय,

उपरोक्त विषयक सन्दर्भित पत्र द्वारा आपके अवगत कराया गया है कि वन सुरक्षा दल हरिद्वार द्वारा इस प्रभाग के कार्य क्षेत्रान्तर्गत औचक निरीक्षण किया गया एवं मालन नदी एवं दो नदी में अवैख खनन के सम्बन्ध में रिपोर्ट की गयी। चूंकि यह रिपोर्ट प्रभाग स्तर पर उपलब्ध नहीं है, जिससे इस प्रकरण में प्रतिउत्तर दिया जाना सम्भव नहीं है। जहां तक खो नदी में अवैध खनन का आरोप है वह पूर्ण रूप से झूठ एवं निराधार है। जहां तक प्रश्न खो नदी में अवैध खनन का है वह क्षेत्र सिविल क्षेत्र है, जिस पर कार्यवाही राजस्व विभाग द्वारा की जाती रही है। खनन सम्बन्धित शिकायतों के सम्बन्ध में अग्रोहस्ताक्षरी द्वारा अपने नियंत्रक अधिकारी को इस कार्यालय के पत्रांक-1935/9-2 दिनांक 22-11-2021 (संलग्नक-1) से संज्ञानित किया गया है। इस सम्बन्ध में आपके स्तर कोई पत्राचार न होने के कारण आपके वस्तुस्थिति से अवगत नहीं करवाया गया है।

इसके अतिरिक्त आपके द्वारा बिन्दुवार आख्या चाही गयी है, जो निम्नवत् है: अवैध खनन पर प्रभावी यंत्रण हेतु प्रभाग स्तर से खनन पर प्रभावी नियंत्रण हेतु पत्रांक-1367/9-2 दिनांक 30-09-2021 (संलग्नक-2) द्वारा दो टीमें गठित की गयी है, गठित टीमों को खनन पर प्रभावी नियंत्रण हेतु कड़े निर्देश जारी किये गये है तथा गठित टीमों को स्पष्ट निर्देश दिये गये है कि प्रभाग अन्तर्गत नदी/नालों में अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण हेतु नियमित रूप से गश्त करना सुनिश्चित करें। इसके अतिरिक्त प्रभाग स्तर से समय-समय पर वन क्षेत्राधिकारी, कोटद्वार को अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण हेतु इस कार्यालय के पत्रांक- 1412/12-1 दिनांक 04-10-2021, पत्रांक-1936/9-2 दिनांक 22-11-2021 एवं पत्रांक-2049/9-2 दिनांक 27-11-2021 द्वारा निर्देश दिये जाते रहे हैं, सुलभ सन्दर्भ हेतु पत्रों

की छायाप्रति संलग्न है (संलग्नक-3)। इस क्रम में सम्बन्धित टीम व वन क्षेत्राधिकारियों द्वारा विगत तीन माह के अन्तर्गत अवैध खनन में संलिप्त वाहनों को जब्त किये जाने की कार्यवाही की गयी, जिसका विवरण निम्नवत है-

प्रभाग में विगत 3 माह में 51 ट्रैक्टर-ट्रॉली, 01 पॉकलैण्ड एवं 02 जे०सी०बी० अवैध खनन खनन में संलिप्त वाहनों को जब्त किया गया है। प्रभाग अन्तर्गत सिमित संसाधन एवं न्यून फील्ड स्टॉफ होने के बावजूद भी इस प्रकार की कार्यवाही/प्रयास किये जा रहे है।


मालन नदी में अवैध खनन का मुख्य कारण नदी तट के निकट वैद्य/अवैध भण्डारण स्थापित है, इस सम्बन्ध में इस कार्यालय के पत्रांक 1835/9-2 दिनांक 21-11-2020 एवं पत्रक-1623/9-2 दिनांक 27-10-2021 द्वारा पूर्व में ही जिलाधिकारी, गढ़वाल एवं उप जिलाधिकारी, कोटद्वार गढ़वाल को पत्र प्रेषित किया गया है (4)।

इस क्रम में अयोहस्ताक्षरी द्वारा क्षेत्रान्तर्गत गोपनीय तरीके से वाहन चालक के साथ या स्वयं

4 औचक ये मारे जाते रहे है। इस क्षेत्रात किये गये निरीक्षण नोटों की छायाप्रति संलग्न है (सलग्नक 5 )। अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण हेतु समय-समय पर अपने अधीन अधिकारी/कर्मचारियों को निर्देश जारी किये गये जाते रहे है, यदि किसी अधिकारी/कर्मचारी की खतनकारियों के साथ संलिता पायी जाती है तो उसके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही अमल में लायी जायेगी।

महोदय, इस सम्बन्ध में यह भी अवगत कराना है कि यह वन प्रभाग की सीमा एक और से राजाजी टाईगर रिजर्व के बफर जोन से एवं दूसरी ओर कॉर्बेट की सीमा से लगा हुआ है। इसके अतिरिक्त यह वन प्रभाग उत्तर प्रदेश की सीमा से लगा हुआ है, प्रभाग वन्य जीव बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण अतिसंवेदनशील है। साथ ही प्रभाग में वन आरक्षियों के 88 स्वीकृत पदों के सापेक्ष 13 वन आरक्षी ही कार्यरत है तथा वर्तमान में नव नियुक्त 23 वन आरक्षी प्रभाग को आवंदित हुये है, जो कि कुल स्वीकृत पदों के सापेक्ष 50 प्रतिशत से भी कम है।

इसके अतिरिक्त यह भी अवगत कराना है कि प्रभाग में 5 रेंजे क्रियान्वित है, जिनमें वन क्षेत्राधिकारियों के 5 स्वीकृत पद है, जिसके सापेक्ष वर्तमान में 03 वन क्षेत्राधिकारी कार्यरत है, ऐसी स्थिति में 01 प्रभारी वन क्षेत्राधिकारी पर 02 रेंजों का कार्यभार है। इस कार्यालय द्वारा वन क्षेत्राधिकारी अन्यत्र वन प्रभाग से उपलब्ध करवाने हेतु बार-बार पत्राचार किया जा रहा है (सुलभ सन्दर्भ हेतु पत्रों एवं अर्द्ध शासकीय पत्रों की छायाप्रति संलग्न है-संलग्नक-6), परन्तु उच्च स्तर द्वारा आतिथि तक कोई भी वन क्षेत्राधिकारी (DDR/FR) उपलब्ध नहीं किया गया है। इसके साथ ही 02 उप प्रभागीय वनाधिकारियों के पद स्वीकृत है, जिसमें से 01 उप प्रभागीय वनाधिकारी, माह-अगस्त, 2021 में सेवानिवृत्त हो चुके है तथा 01 उप प्रभागीय वनाधिकारी, का माह-फरवरी/2022 में सेवानिवृत्त होगें। इन विकट परिस्थितियों के बावजूद भी प्रभाग द्वारा नियमानुसार एवं यथा सम्भव प्रयास किया जा रहे है। कृपया अवगत होना चाहें। अतः सूचना महोदय की सेवा में सादर प्रेषित। संलग्न- उपरोक्तानुसार।

भवदीय,

(दीपक सिंह) प्रभागीय वनाधिकारी

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