नेशनल बुक ट्रस्ट ने प्रकाश सुमन ध्यानी की पुस्तक का प्रकाशन किया

लेखक प्रकाश सुमन ध्यानी की पुस्तक ‘सनातन प्रज्ञा-प्रवाह : वेदों से विवेकानंद तक’ बाजार में उपलब्ध

अविकल उत्तराखण्ड

भारतीय सभ्यता, संस्कृति एवं इतिहास को विश्व में प्राचीनतम माना और जाना जाता है। कहना न होगा कि विश्व का प्रथम ग्रंथ ‘वेद’ भारतीय अध्यात्म एवं संस्कृति की ही देन है। प्रस्तुत पुस्तक में विद्वान लेखक ने मौखिक परंपरा से निःसृत, वेदों के काल से लेकर भारत की सनातन सभ्यता और धर्म तथा अध्यात्म को विश्वभर में प्रसारित करने वाले आधुनिक सनातन संत, स्वामी विवेकानंद तक की यात्रा के क्रम में, महाकाव्य काल, जैन-बौद्ध काल, दार्शनिक काल, प्राचीन और मध्यकाल, भक्तिकाल तथा अंततः मुगल साम्राज्य के पतन के उपरांत 18वीं – 19वीं सदी में राजा राममोहन राय, दयानंद सरस्वती एवं स्वामी विवेकानंद के कार्य एवं अवदान तक को समेटा है।

प्रायः सात हजार वर्षों के लंबे कालखंड के भारतीय इतिहास, संस्कृति, सभ्यता, इतिहास तथा अध्यात्म के इस विशद विमर्श के क्रम में लेखक ने विश्व के सर्वाधिक दिव्य, भव्य, दीप्त और परंपरा से सिक्त, सबसे सुंदर एवं व्यवस्थित एवं प्रथम धर्म, सनातन धर्म के विश्व सभ्यता पर पड़े प्रभाव और अवदान को भी बड़ी गहराई से रेखांकित किया है । अवश्य पठनीय पुस्तक ।

उत्तराखंड के वरिष्ठ राजनीतिज्ञ, चिंतक तथा बुद्धिजीवी प्रकाश सुमन ध्यानी जीवविज्ञान से स्नातकोत्तर (डी.ए.वी. कॉलेज, देहरादून) होने के बावजूद, भारतीय सभ्यता, संस्कृति, समाज, अध्यात्म तथा इतिहास के प्रति अतिशय अनुराग रखते हैं। अपने इसी रुचि एवं अनुराग के वशीभूत उन्होंने ‘विश्व इतिहास दर्शन’ तथा प्रस्तुत पुस्तक ‘सनातन प्रज्ञा-प्रवाह : वेदों से विवेकानंद तक’ का प्रणयन किया है। लेखक की पहली पुस्तक को पाठक समाज का प्रभूत प्रतिभाव प्राप्त हुआ है।

प्रकाश सुमन ध्यानी की एक अन्य पुस्तक हाल ही में आई है- ‘पानी है तो प्रकृति है, प्रकृति है तो जीवन है’ । आपके देशभर के पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर आलेख प्रकाशित होते रहते हैं। आप उत्तराखंड के दो मुख्यमंत्रियों, सर्वश्री भुवनचंद्र खंडूरी तथा रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, के सलाहकार (पर्यटन) रहे हैं तथा भारत सरकार के अनेक मंत्रालयों के सदस्य भी। वर्तमान में आप देहरादून में निवास करते हुए सतत सृजनशील हैं।

राष्ट्रीय पुस्तक न्यास ने 356 पेज की किताब का प्रकाशन कुया है। पुस्तक का मूल्य 440 रुपए रखा गया है।

लेखक- प्रकाश सुमन ध्यानी

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