हरजीत लाली की पुस्तक इकोज ऑफ माई हार्ट पर परिचर्चा

अविकल उत्तराखंड

देहरादून। दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र द्वारा मंगलवार सुप्रसिद्ध लेखिका हरजीत लाली की नवीन कृति इकोज ऑफ माई हार्ट पर एक विशेष साहित्यिक परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और शिक्षा जगत से जुड़े अनेक लेखक, साहित्यकार, शिक्षाविद् एवं प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. संजीव चोपड़ा, आईएएस, निदेशक, वैली ऑफ वर्ड्स ने कहा कि इकोज ऑफ माई हार्ट केवल प्रेम-कविताओं का संकलन नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं, स्मृतियों और आत्मिक अनुभवों की एक गहन यात्रा है। उन्होंने कहा कि पुस्तक में प्रेम, विरह, प्रतीक्षा, समर्पण और आध्यात्मिक अनुभूतियों को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया गया है। ऐसी रचनाएँ पाठकों को अपने अंतर्मन से संवाद करने का अवसर प्रदान करती हैं।

विशिष्ट अतिथि करण सिन्हा ने कहा कि हरजीत लाली का लेखन भावनात्मक सच्चाई और आत्मीयता से परिपूर्ण है। उनकी रचनाओं में जीवन के विविध अनुभवों और मानवीय संबंधों की गहराई सहज रूप से उभरकर सामने आती है।

कार्यक्रम की चर्चाकार रत्ना मूनचा ने पुस्तक की विस्तृत समीक्षा प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह कृति प्रेम, स्मृति, प्रतीक्षा और मानवीय संबंधों के अनेक रंगों को समेटे हुए है। उन्होंने पुस्तक में संकलित कविताओं और लघुकथाओं की संवेदनात्मक गहराई, स्त्री-अनुभवों की अभिव्यक्ति तथा आत्मिक जुड़ाव के चित्रण को विशेष रूप से उल्लेखनीय बताया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक पाठकों को भीतर तक स्पर्श करने की क्षमता रखती है।

अपने वक्तव्य में लेखिका हरजीत लाली ने बताया कि इकोज ऑफ माई हार्ट उनकी दीर्घ रचनात्मक यात्रा का परिणाम है। पुस्तक में संकलित कविताएँ और लघुकथाएँ प्रेम, मिलन, बिछोह, स्मृतियों, आध्यात्मिकता और जीवन के सूक्ष्म भावों को अभिव्यक्त करती हैं। उन्होंने कहा कि यह संग्रह उन भावनाओं का दस्तावेज है जो समय के साथ समाप्त नहीं होतीं, बल्कि नए रूपों में जीवित रहती हैं।

हरजीत लाली साहित्य और सामाजिक सरोकारों से लंबे समय से जुड़ी रही हैं। उनकी रचनाओं में मानवीय संवेदनाओं, संबंधों की ऊष्मा तथा जीवन के विविध अनुभवों की गहरी समझ परिलक्षित होती है। इकोज ऑफ माई हार्ट उनकी एक महत्वपूर्ण कृति है, जिसमें दशकों के अनुभव, भावनात्मक परिपक्वता और काव्यात्मक अभिव्यक्ति का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।

कार्यक्रम में उपस्थित साहित्यकारों, लेखकों और प्रबुद्धजनों ने भी पुस्तक पर अपने सवाल जबाब भी किए और लेखिका को उनकी नवीन कृति के लिए शुभकामनाएँ दीं।

दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र द्वारा आयोजित यह साहित्यिक आयोजन साहित्य, संवेदना और सृजनशीलता के एक सार्थक उत्सव के रूप में स्मरणीय रहा। आज के कार्यक्रम में वंदना शिवा, चंद्रशेखर तिवारी, आलोक बी.लाल,कर्नल वी के दुग्गल, डॉ.लालता प्रसाद,सुंदर सिंह बिष्ट, हिमांशु आहूजा, आलोक कुमार, द्विजेंद्र बहुगुणा, सतपाल गांधी नरेन्द्र सिंह, मनोज पंजानी सहित अनेक लेखक, साहित्यकार व शहर के अन्य प्रबुद्ध जन शामिल रहे.

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