देखें, कोर्ट में आरोप पत्र पेश, पति समेत पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा
जबरन हलाला और प्रताड़ना के आरोप
अविकल उत्तराखण्ड
हरिद्वार। उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने के बाद ‘निकाह हलाला’ से जुड़ा पहला बड़ा मामला हरिद्वार जिले के बुग्गावाला थाना क्षेत्र में सामने आया है। गुरुवार 14 मई को इस मामले में रुड़की की कोर्ट में आरोप पत्र भी पेश कर दिया है।
महिला की शिकायत पर पुलिस ने उसके पति सहित पांच लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। अप्रैल माह में यह मामला सामने आने के बाद यह प्रकरण पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि राज्य में UCC लागू होने के बाद पहली बार हलाला जैसी प्रथा को लेकर कानूनी कार्रवाई की गई है।
इस प्रकरण में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए रुड़की की अदालत में आरोप पत्र भी पेश आया है।
पीड़िता शाहिन ने पुलिस को दी तहरीर में आरोप लगाया कि उसके पति मोहम्मद दानिश और ससुराल पक्ष के लोगों ने उसे लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया। महिला का कहना है कि पति ने उस पर जबरन ‘हलाला’ के लिए दबाव बनाया। जब उसने इसका विरोध किया तो उसके साथ मारपीट की गई और उसे घर से निकाल दिया गया।
शिकायत के आधार पर बुग्गावाला पुलिस ने पति मोहम्मद दानिश के अलावा मोहम्मद अरशद, परवेज, जावेद और गुलशाना के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

पुलिस ने इस मामले में समान नागरिक संहिता, उत्तराखंड 2024 (संशोधन 2026) की धारा 32(1)(ii) और 32(1)(iii) के तहत कार्रवाई की है। इन प्रावधानों में हलाला और इससे जुड़ी प्रथाओं को प्रतिबंधित एवं दंडनीय माना गया है।
इसके अलावा आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 115(2) और धारा 85 के तहत मारपीट और प्रताड़ना के आरोप लगाए गए हैं। वहीं मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों की सुरक्षा) अधिनियम 2019 की धारा 3 और 4 तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961 की धारा 3 और 4 भी मुकदमे में शामिल की गई हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच गंभीरता से की गई है। जांच के बाद उपनिरीक्षक मनोज कुमार ने आरोप पत्र तैयार कर न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय रुड़की की अदालत में प्रस्तुत किया है। पुलिस का कहना है कि सभी तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रदेश में 27 जनवरी 2025 से लागू समान नागरिक संहिता को महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा और वैवाहिक कुप्रथाओं पर रोक लगाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इसी क्रम में यह मामला UCC के प्रभावी क्रियान्वयन का पहला बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है।
कानून लागू होने के बाद सरकार लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि महिलाओं के सम्मान और अधिकारों से जुड़ी शिकायतों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले के बाद प्रदेश में UCC के तहत दर्ज होने वाले मामलों पर लोगों की नजर रहेगी। वहीं महिला संगठनों ने भी इस कार्रवाई को महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।

- Brief facts of the case (मामले से संबंधित संक्षिप्त तथ्य):
श्रीमान जी मुकदमा उपरोक्त थाना हाजा पर दिनांक 04.04.26 को वादिनी श्रीमती शाहिन पुत्री गुफरान पत्नी मौ० दानिश हाल नि० ग्राम मुजाहिदपुर सतीवाला बन्दरजूड थाना बुग्गावाला जनपद हरिद्वार की लिखित तहरीर के आधार पर अन्तर्गत धारा 3,4 दहेज प्रति० अधि० व 3,4 मुस्लिम विवाह अधि०, धारा 115(2), 85 बीएनएस विरुद्ध अभि०गण 1- मौ० दानिश (पति) पुत्र सईद 2- सईद (ससूर) पुत्र जिन्दा हसन 3- मौ० अरसद जेठ पुत्र सईद 4-प्रवेज (देवर) पुत्र सईद 5- जावेद (देवर) पुत्र सईद 6 श्रीमती गुलशाना (सास) पत्नी सईद 7- सलमा (नन्द) पत्नी मौ० फैजान व फैजान (नन्दोई) पुत्र नाम नामालूम निवासीगण ग्राम मजाहिदपुर सतीवाला मजबता बन्दरजूड थाना बुग्गावाला जिला हरिद्वार के पंजीकृत होकर विवेचना मुझ उ0नि0 के सुपुर्द की गयी दौराने विवेचना मुकदमा उपरोक्त में धारा 32 (1) (ii), 32(1) (iii) समान नागरिक संहिता उत्तराखण्ड अधि० के साक्ष्य पाये जाने पर धारा 32 (1) (ii), 32(1) (iii) समान नागरिक संहिता उत्तराखण्ड अधि० की वृद्धि की गयी। तथा अभि० रहमान पुत्र वहीद निवासी म0न0 20 टर्नर रोड़ क्लेमेन्टाउन सेवलाकला थाना कलेमेन्टाउन जनपद देहरादून की नामजदगी प्रकाश में आने पर मुकदमा उपरोक्त में अभि० रहमान नामजदगी दर्ज की गयी। नामजद अभि० गण को अन्तर्गत धारा 35(3) BNSS नोटिस तामील कराये गये। तमामी विवेचना में बयान वादीनी / पीडिता, बयान गवाहन, बयान स्वतंत्र गवाहन, अवलोकन मेडिकल रिपोर्ट मजरूबगण, बयान डॉ0 मेडिकल कर्ता, निरीक्षण घटनास्थल आदि से जुर्म धारा 3,4 दहेज प्रति० अधि० व 3,4 मुस्लिम विवाह अधि०, धारा 115(2), 85 बीएनएस व धारा 32 (1) (ii), 32(1) (iii) समान नागरिक संहिता उत्तराखण्ड अधि० विरुद्ध अभि० मौ० दानिश पुत्र शहीद निवासी ग्राम मुजाहिदपुर सतीवाला मजबता बंदरजूड़ थाना बुग्गावाला जिला हरिद्वार तथा जुर्म धारा 3,4 दहेज प्रति० अधि० व 115(2),85 बीएनएस विरूद्ध अभि०गण शहीद पुत्र जिन्दा हसन, मौ० अरसद पुत्र शहीद, प्रवेज पुत्र शहीद, जावेद पुत्र शहीद, श्रीमति गुलशाना पत्नी शहीद निवासीगण ग्राम मुजाहिदपुर सतीवाला मजबता बंदरजूड़ थाना बुग्गावाला जिला हरिद्वार, श्रीमति सलमा पत्नी फैजान पुत्री शहीद, फैजान पुत्र हासिम निवासीगण ग्राम हुसैनपुर मलकपुर थाना बेहट सहारपुर व रहमान पुत्र वहीद निवासी म0न0 20 टर्नर रोड़ क्लेमेनटाउन थाना क्लेमेनटाउन जिला देहरादून के बखूबी साबित है। अतः अभि०गण दानिश, शहीद, मौ० अरशद, प्रवेज, जावेद, श्रीमति गुलशाना, श्रीमति सलमा, फैजान व रहमान उपरोक्त का चालान जरिये आरोप पत्र दिनांक 14.05.26 के माननीय न्यायालय किया जाता है। माननीय न्यायालय से अनुरोध है कि सबूत तलब फरमाकर दण्डित करने की कृपा करें।
उत्तराखंड UCC की मुख्य विशेषताएं (2026 के अनुसार):विवाह और तलाक
सभी धर्मों के लिए एक समान नियम। बहुविवाह पर रोक और लड़कियों की शादी की उम्र 18 वर्ष।लिव-इन रिलेशनशिप: अनिवार्य रजिस्ट्रेशन। 18-21 साल के युवाओं के लिए माता-पिता की सहमति आवश्यक।विरासत और गोद लेना: बेटियों को बेटों के बराबर संपत्ति का अधिकार और सभी धर्मों में गोद लेने का समान अधिकार।छूट: जनजातीय समुदाय (Scheduled Tribes) को इस कानून से बाहर रखा गया है।पोर्टल: विवाह और अन्य सेवाओं के लिए आधिकारिक पोर्टल ucc.uk.gov.in है।
हालिया अपडेट (2026)
UCC लागू होने के बाद, राज्य में विवाह पंजीकरण के मामलों में काफी वृद्धि देखी गई है। अब शादियों का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन हो रहा है।हाल ही में यूसीसी के तहत ‘हलाला’ से जुड़ा पहला मामला सामने आया है, जिसमें पुलिस ने चार्जशीट दायर की है।सरकार ने 27 जनवरी 2025 से पहले की शादियों के पंजीकरण के लिए भी समय सीमा निर्धारित की है।

