विधायक ने कहा फ़ोटो डीप फेक जबकि माही बोली, उक्त महिला की पहचान उजागर हो
देखें वीडियो,पीड़िता ने पीएम मोदी व सीएम धामी से मांगा न्याय
दो साल पुरानी कथित अश्लील फोटो/वीडियो विवाद
अविकल थपलियाल
बागेश्वर। जिले के कपकोट क्षेत्र में वर्ष 2024 से सोशल मीडिया पर कथित अश्लील फोटो-वीडियो के प्रसारण को लेकर चला आ रहा विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। महिला की शिकायत पर पुलिस ने चरित्रहनन और सोशल मीडिया के माध्यम से बदनाम करने के आरोप में मुख्य आरोपी जगदीश गोस्वामी को गिरफ्तार कर लिया है।
वहीं, पीड़िता माही टाकुली ने आरोपी की गिरफ्तारी के बाद भी मामले की निष्पक्ष फॉरेंसिक जांच की मांग दोहराते हुए प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, राष्ट्रीय महिला आयोग, राज्य महिला आयोग और अन्य संबंधित अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है।
इस मम्मले में माही टाकुली ने एक और वीडियो फेसबुक पर वॉयरल किया है। माही ने कहा कि आरोपी की गिरफ्तारी से उसे न्याय नहीं मिलेगा। न्याय तब मिलेगा जब पुलिस उस कथित अश्लील फोटो में मौजूद महिला के बारे में बताए।
माही ने दावा किया कि 2024 में स्थानीय विधायक सुरेश गड़िया और एक महिला की वॉयरल अश्लील फ़ोटो में वो नहीं है। इस बारे में उसने 2024 में पुलिस को दी गयी तहरीर में आवश्यक कार्रवाई की मांग की थी।
माही टाकुली ने कहा कि पुलिस यह भी बताए कि उस समय क्यों नहीं जांच कर कार्रवाई की थी। माही टाकुली के कड़े स्टैंड के बाद स्थानीय भाजपा विधायक सुरेश गड़िया पर भी निष्पक्ष जांच का दबाव बन गया है।
हालांकि, बीते 30 जुलाई को माही टाकुली के आत्मदाह की धमकी देने व मुकदमा दर्ज होने के बाद भाजपा विधायक को मीडिया के सामने आना पड़ा। स्थानीय विधायक ने अश्लील फ़ोटो से पल्ला झाड़ते हुए इसे डीप फेक व राजनीति से प्रेरित साजिश करार दिया।
विधायक के बयान के बाद मंगलवार की रात आरोपी जगदीश गोस्वामी को गिरफ्तार कर लिया गया। लेकिन पुलिस गोस्वामी से अश्लील फ़ोटो व वीडियो से जुड़े सबूत नहीं ले पाई
इस बीच, माही टाकुली ने वीडियो जारी कर सपरिवार आत्मदाह की धमकी देकर सनसनी मचा दी। पुलिस-प्रशासन को कठघरे में खड़ा करते हुए माही टाकुली ने कहा कि दो साल से उसका व परिवार का गहरा मानसिक शोषण हुआ है। लिहाजा, अब पुलिस को अश्लील फ़ोटो व वीडियो में दिख रही महिला की पहचान उजागर करनी चाहिए ताकि उसको न्याय मिल सके।
माही टाकुली के अपने वक्तव्यों व मांग पर डटे रहने के कारण विधायक व पुलिस-प्रशासन की अग्नि परीक्षा भी शुरू हो गयी है। जबकि भाजपा विधायक ने फ़ोटो को डीप फेक करार दिया है। गौरतलब है कि पीड़िता माही टाकुली विधायक गड़िया की पत्नी की रिश्ते की चाची है।
आरोपी जगदीश गोस्वामी गिरफ्तार

अश्लील फ़ोटो विवाद की पृष्ठभूमि
दो साल तक।धक्के खाने के बाद पीड़िता माही टाकुली ने 30 जुलाई को कपकोट थाने में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि जगदीश गोस्वामी ने सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो प्रसारित किए, जिनमें उनके चरित्र पर लांछन लगाया गया और स्थानीय विधायक की छवि धूमिल करने का भी प्रयास किया गया। शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 79 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस और एसओजी की तीन टीमें लगातार विभिन्न जिलों में दबिश दे रही थीं। मंगलवार शाम उसे बैजनाथ क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस अब मामले में डिजिटल साक्ष्यों और अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।
उधर, माही टाकुली ने फेसबुक पर जारी विस्तृत पोस्ट में कहा कि पिछले दो वर्षों से वह मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक पीड़ा झेल रही हैं। उनका दावा है कि जिस कथित अश्लील फोटो के आधार पर उन्हें बदनाम किया गया, वह उनकी नहीं है। उन्होंने सरकार और जांच एजेंसियों से उस फोटो की वैज्ञानिक फॉरेंसिक जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच हो जाएगी तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि फोटो किसकी है और उसके बाद बिना प्रमाण बदनाम करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
माही टाकुली ने अपनी पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, पुलिस महानिदेशक, राष्ट्रीय महिला आयोग, उत्तराखंड राज्य महिला आयोग और कपकोट विधायक सुरेश गड़िया से निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कराने की अपील की है।
2024 का विवाद
वर्ष 2024 में कपकोट क्षेत्र में सोशल मीडिया पर एक कथित अश्लील फोटो और उससे जुड़े वीडियो तेजी से वायरल हुए थे। उस समय सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया था कि फोटो में दिखाई देने वाली महिला माही टाकुली हैं। माही टाकुली ने शुरू से ही इस दावे का खंडन करते हुए कहा कि फोटो उनकी नहीं है और उन्हें राजनीतिक एवं सामाजिक रूप से बदनाम करने के उद्देश्य से उनका नाम जोड़ा गया।
मामले ने उस समय भी व्यापक राजनीतिक और सामाजिक चर्चा बटोरी थी। सोशल मीडिया पर इसे लेकर कई वीडियो, पोस्ट और टिप्पणियां प्रसारित हुईं, जिनमें स्थानीय राजनीति और जनप्रतिनिधियों के नाम भी जोड़े गए। अब 2026 में महिला की शिकायत पर दर्ज मुकदमे में मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद यह मामला फिर चर्चा में है।
हालांकि, यह उल्लेखनीय है कि अब तक किसी फॉरेंसिक जांच की आधिकारिक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है, इसलिए यह निर्णायक रूप से स्थापित नहीं हुआ है कि वायरल फोटो किसकी थी। यही कारण है कि पीड़िता लगातार वैज्ञानिक जांच की मांग कर रही है, जबकि पुलिस मामले की विवेचना आगे बढ़ा रही है। इस प्रकरण में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।



