36 लाख से अधिक बच्चों को खिलाई गई दवा

कृमि मुक्त उत्तराखंड अभियान

राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में चला व्यापक अभियान, 14 मई को मॉप-अप दिवस

अविकल उत्तराखंड

देहरादून। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन उत्तराखंड के तहत राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस (एनडीडी) पर प्रदेशभर में व्यापक जनस्वास्थ्य अभियान चलाया गया। अभियान के तहत 1 से 19 वर्ष तक के बच्चों और किशोरों को एल्बेंडाजोल दवा खिलाई गई। इसका उद्देश्य बच्चों को कृमि संक्रमण से बचाना, कुपोषण और एनीमिया पर नियंत्रण करना तथा उनके शारीरिक और मानसिक विकास को सुनिश्चित करना है। प्रदेशभर के स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों और सामुदायिक स्तर पर यह अभियान बड़े पैमाने पर संचालित किया गया।

अभियान का राज्य स्तरीय शुभारंभ देहरादून के UPS काठबंगला में हुआ, जहां करीब 200 बच्चों को दवा खिलाने के साथ स्वास्थ्य और स्वच्छता को लेकर जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। कार्यक्रम में निदेशक एनएचएम डॉ. रश्मि पंत ने बच्चों को हाथ धोने की सही विधि सिखाई और स्वच्छता के महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नियमित स्वास्थ्य अभियानों से बच्चों को बीमारियों से बचाया जा सकता है और स्वस्थ समाज की मजबूत नींव रखी जा सकती है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार वर्ष 2026 में प्रदेश के 36,77,037 बच्चों को इस अभियान के तहत लक्षित किया गया है। इनमें 20,119 आंगनवाड़ी केंद्रों में पंजीकृत 5,92,624 बच्चे, 16,626 सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों के 9,37,540 छात्र तथा 5,816 निजी विद्यालयों के 14,83,736 बच्चे शामिल हैं। इसके अलावा 6,63,137 ऐसे बच्चों की भी पहचान की गई है, जो स्कूल नहीं जाते और उन्हें विशेष रणनीति के तहत कवर किया जा रहा है।

अभियान को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग ने संयुक्त रूप से कार्य किया। आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और शिक्षकों ने गांव-गांव और स्कूलों तक पहुंचकर बच्चों को दवा खिलाई, ताकि कोई भी बच्चा इस अभियान से वंचित न रहे।

स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि जो बच्चे किसी कारणवश दवा नहीं ले पाए हैं, उनके लिए 14 मई को मॉप-अप दिवस आयोजित किया जाएगा। इस दिन छूटे हुए बच्चों को दवा खिलाई जाएगी।

स्वास्थ्य सचिव सचिन कुर्वे ने कहा कि कृमि संक्रमण बच्चों में एनीमिया और कुपोषण का प्रमुख कारण है, जिससे उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि एल्बेंडाजोल जैसी सुरक्षित दवा के जरिए इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को नियमित रूप से ऐसे अभियानों में शामिल करने और स्वच्छता अपनाने की अपील की।

एनएचएम के मिशन निदेशक मनुज गोयल ने कहा कि अभियान के सफल संचालन के लिए राज्य से लेकर ग्राम स्तर तक माइक्रोप्लानिंग की गई थी। उन्होंने बताया that अभियान के दौरान सुरक्षा मानकों का पूरा ध्यान रखा गया और छूटे हुए बच्चों को 14 मई के मॉप-अप दिवस पर कवर किया जाएगा।

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