​ऋषिकेश-भानियावाला हाईवे पर पेड़ कटान का विरोध

एनएचएआई (NHAI) कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन

अविकल उत्तराखंड

​ऋषिकेश। स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों द्वारा ऋषिकेश-भानियावाला हाईवे के चौड़ीकरण के नाम पर काटे जा रहे पेड़ों के विरोध में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के कार्यालय पर एक विशाल प्रदर्शन किया गया।
इस प्रदर्शन में भारी संख्या में बुधवार को हुए स्थानीय लोगों ने हिस्सा लिया और पेड़ों की अंधाधुंध कटान को लेकर जनता में भारी रोष देखने को मिला।

इस आंदोलन में विशेष रूप से ‘जेन-जी’ (Gen-Z) और युवा पीढ़ी के बच्चों ने बड़ी संख्या में भागीदारी की।
युवाओं के भीतर इस पेड़ कटान को लेकर कड़ी नाराजगी थी, जिसे उन्होंने बेहद मुखर होकर अपने शब्दों में व्यक्त किया। कार्यक्रम में कई वक्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर अपने प्रखर विचार जनता के सामने रखे।
इस दौरान वक्ताओं और प्रदर्शनकारियों ने एनएचएआई प्रशासन के साथ-साथ सरकार के विरुद्ध भी जमकर नारेबाजी की और विरोध स्वरूप जनगीत भी गाए।
​प्रदर्शन के दौरान मुख्य वक्ता अनूप नौटियाल और पर्यावरण कार्यकर्ता हिमांशु अरोड़ा ने विभिन्न महत्वपूर्ण बातों पर प्रकाश डाला। अनूप नौटियाल ने हाईवे के निर्माण पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस हाईवे को चौड़ा करने की कोई वास्तविक आवश्यकता नहीं है। इसी क्रम में ऋषिकेश से आए कई प्रदर्शनकारियों ने भी इस बात को पुरजोर तरीके से उठाया कि वे अक्सर देहरादून से ऋषिकेश के बीच यात्रा करते हैं, लेकिन उन्हें आज तक इस रोड पर कभी कोई ट्रैफिक जाम नहीं दिखा। ऐसे में बिना जरूरत इतनी भारी संख्या में पेड़ों को काटना पूरी तरह तर्कहीन है।

आंदोलन के दौरान मयंक दत्ता सहित अन्य वक्ताओं ने एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया। मयंक दत्ता ने बताया कि जब उन्होंने इस परियोजना से जुड़े आधिकारिक दस्तावेजों और स्वीकृतियों (परमिशन) की छानबीन की, तो पता चला कि इस सड़क को बनाने के लिए दिए गए सरकारी जस्टिफिकेशन (औचित्य) में ‘वीआईपी मूवमेंट’ (VIP Movement) को मुख्य आधार बनाया गया है। वक्ताओं ने इस बात पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया कि महज कुछ वीआईपी लोगों के आवागमन की सुविधा के लिए 4400 से अधिक परिपक्व पेड़ों की बलि दी जा रही है।
​इसके साथ ही वक्ताओं ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि यह पूरा क्षेत्र हाथियों का प्राकृतिक आवास है और स्थानीय लोगों द्वारा इस रास्ते पर अक्सर हाथी देखे जाते हैं। प्रदर्शनकारियों में इस बात को लेकर भारी गुस्सा था कि विकास के नाम पर हाथियों का घर उजाड़कर यह सड़क क्यों बनाई जा रही है। केवल वीआईपी मूवमेंट के नाम पर हाथियों के गढ़ को नष्ट करना पूरी तरह संवेदनहीन है।

वहीं हिमांशु अरोड़ा ने संबोधित करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने 2020 के मधुमलाई जजमेंट में हाथियों के कॉरिडोर के संरक्षण की बात कही है और इसके बारे में प्रभावी निर्देश दिए हैं। उन्होंने आगे बताया कि इसके बावजूद एक मामला (अनिता कंडपाल मामला) अभी भी कोर्ट में लंबित है। इसके बावजूद प्रशासन द्वारा पेड़ काटने की इतनी जल्दबाजी की जा रही है, जो पूरी तरह गलत है।
​आंदोलन को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने स्पष्ट शब्दों में एक बड़ा राजनैतिक संदेश भी दिया। उन्होंने कहा, “हम किसी भी ऐसी पार्टी को वोट नहीं देंगे जो हमारे जल, जंगल और जमीन के खिलाफ है। आने वाले चुनाव में हम पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाली ऐसी पार्टियों का, चाहे वो कोई भी हो, सड़क पर उतरकर भरपूर विरोध करेंगे।”

​प्रदर्शनकारियों ने कार्यालय के बाहर जोरदार नारेबाजी करते हुए एनएचएआई के अधिकारियों को बाहर आने पर मजबूर किया। इसके बाद एनएचएआई के डायरेक्टर सौरभ सिंह खुद बाहर आए, जिनका जनता ने भारी नारेबाजी के साथ सामना किया। प्रदर्शनकारियों ने एक प्रार्थना पत्र के माध्यम से डायरेक्टर से पेड़ कटान से जुड़ी सभी स्वीकृतियों की जानकारी मांगी और उससे संबंधित आधिकारिक दस्तावेज तुरंत प्रदान करने की मांग की।
​कार्यक्रम के प्रमुख वक्ताओं और उपस्थित सहयोगियों में इरा चौहान, लोकेश ओरी, भीम पाली और विजय भट्ट आदि मुख्य रूप से शामिल रहे।



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